पीरियड्स से पहले हार्मोनल बदलाव क्यों बढ़ाते हैं एक्ने का खतरा, त्वचा विशेषज्ञों की राय
सारांश
मुख्य बातें
पीरियड्स शुरू होने से कुछ दिन पहले महिलाओं और युवतियों के चेहरे पर अचानक पिंपल्स उभरना एक सामान्य लेकिन परेशान करने वाली समस्या है। त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार, इसकी जड़ बाहरी गंदगी या गलत स्किन केयर नहीं, बल्कि शरीर के भीतर होने वाले हार्मोनल बदलाव हैं। यह स्थिति चिकित्सकीय भाषा में हार्मोनल एक्ने कहलाती है।
मासिक चक्र और हार्मोन का उतार-चढ़ाव
मासिक धर्म का पूरा चक्र लगभग 28 दिनों का होता है, जिसमें शरीर के कई हार्मोन निरंतर बदलते रहते हैं। चक्र की शुरुआत में एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ता है, जो त्वचा को साफ और संतुलित बनाए रखता है। जैसे-जैसे चक्र आगे बढ़ता है, प्रोजेस्टेरोन का स्तर ऊपर चढ़ने लगता है। लेकिन पीरियड्स के निकट आते-आते एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन दोनों में गिरावट आती है, और इस दौरान टेस्टोस्टेरोन का सापेक्षिक प्रभाव बढ़ जाता है — यही असंतुलन पिंपल्स की समस्या को जन्म देता है।
सीबम उत्पादन और बंद रोमछिद्र
मेडिकल शोध के अनुसार, प्रोजेस्टेरोन का बढ़ा हुआ स्तर त्वचा की ऑयल ग्लैंड्स को अधिक सक्रिय कर देता है। इससे सीबम — यानी त्वचा का प्राकृतिक तेल — सामान्य से अधिक मात्रा में उत्पन्न होने लगता है। सामान्य परिस्थितियों में यह तेल त्वचा को नमी और सुरक्षा देता है, किंतु अत्यधिक उत्पादन से रोमछिद्र बंद होने लगते हैं और हल्की सूजन भी आ सकती है।
जब टेस्टोस्टेरोन का प्रभाव और बढ़ता है, तो यह अतिरिक्त तेल धूल, मृत त्वचा कोशिकाओं और गंदगी के साथ मिलकर छिद्रों को पूरी तरह अवरुद्ध कर देता है। बंद छिद्रों में बैक्टीरिया तेज़ी से पनपते हैं, जिससे सूजन और संक्रमण की स्थिति बनती है। इसीलिए कई महिलाओं को इस दौरान ब्लैकहेड्स, व्हाइटहेड्स और लाल दाने देखने को मिलते हैं — विशेषकर ठुड्डी और जॉलाइन पर।
सिर्फ बाहरी उपाय काफी नहीं
त्वचा विशेषज्ञों का स्पष्ट मत है कि हार्मोनल एक्ने की समस्या मूलतः अंदरूनी है, इसलिए केवल फेसवॉश या क्रीम बदलने से स्थायी राहत नहीं मिलती। तनाव, नींद की कमी, अनियमित खानपान और शरीर का मेटाबॉलिज्म — ये सभी कारक हार्मोन संतुलन को प्रभावित करते हैं और एक्ने की तीव्रता बढ़ा सकते हैं। यह ऐसे समय में और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब युवतियों में जीवनशैली संबंधी समस्याएँ बढ़ रही हैं।
रोज़मर्रा की आदतें जो मदद कर सकती हैं
चिकित्सकों के अनुसार, चेहरे की नियमित सफाई, त्वचा को बार-बार छूने से परहेज़ और मोबाइल स्क्रीन को साफ रखना बैक्टीरिया के फैलाव को कम कर सकता है। इसके अलावा, धूम्रपान और अत्यधिक तैलीय भोजन से दूरी लाभकारी मानी जाती है। डॉक्टरों का यह भी कहना है कि संतुलित वज़न बनाए रखना ज़रूरी है, क्योंकि अतिरिक्त वज़न हार्मोनल असंतुलन को और गहरा कर सकता है।
पोषण की भूमिका
पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, ज़िंक, ओमेगा-3 फैटी एसिड, और विटामिन ए, सी, डी व ई जैसे पोषक तत्व त्वचा के स्वास्थ्य में अहम भूमिका निभाते हैं। ये तत्व शरीर में सूजन घटाने और स्किन रिपेयर में सहायक हैं। सीफूड, नट्स, हरी सब्ज़ियाँ, डेयरी उत्पाद और मौसमी फल संतुलित आहार का अनिवार्य हिस्सा होने चाहिए। यदि समस्या गंभीर हो या बार-बार उभरे, तो किसी त्वचा रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना उचित रहेगा।