रक्षा निर्यात में 50 गुना उछाल, मिलेट्स और ऊर्जा विविधीकरण से मजबूत होगी भारत की आत्मनिर्भरता: विशेषज्ञ
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा उत्पादन, मिलेट्स निर्यात और ऊर्जा विविधीकरण भारत की आत्मनिर्भरता की राह में तीन निर्णायक स्तंभ बन सकते हैं। 15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर विशेषज्ञों ने कहा कि स्वदेशी रक्षा निर्माण, मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का विस्तार और विविध ऊर्जा स्रोतों का विकास भारत की आर्थिक एवं रणनीतिक शक्ति को नई ऊँचाई दे सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ये क्षेत्र मिलकर भारत को वैश्विक भू-राजनीतिक दबावों से सुरक्षित रखने में सक्षम हैं।
रक्षा उत्पादन और निर्यात में ऐतिहासिक उछाल
रक्षा विशेषज्ञ ब्रिगेडियर हेमंत महाजन (सेवानिवृत्त) ने कहा कि 2014 की तुलना में भारत का रक्षा उत्पादन लगभग पाँच गुना बढ़ चुका है, जबकि मित्र और पड़ोसी देशों को रक्षा निर्यात में करीब 50 गुना की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि घरेलू स्तर पर रक्षा उपकरणों के उत्पादन में यह वृद्धि देश की रणनीतिक क्षमताओं को सुदृढ़ करती है और विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता को उल्लेखनीय रूप से घटाती है।
महाजन ने कहा, 'आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र केवल आर्थिक लाभ ही नहीं देता, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्वदेशी तकनीक और निर्माण क्षमता बढ़ने से भारत वैश्विक रक्षा बाजार में अपनी उपस्थिति मजबूत कर सकता है और आपात परिस्थितियों में बाहरी देशों पर निर्भरता से बच सकता है।' गौरतलब है कि यह प्रगति ऐसे समय में आई है जब वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखलाएँ भू-राजनीतिक तनावों के कारण अस्थिर हो रही हैं।
मिलेट्स: घरेलू पोषण से वैश्विक बाज़ार तक
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय से जुड़े चार्टर्ड अकाउंटेंट आदित्य सेश ने कहा कि भारत द्वारा हाल के वर्षों में किए गए मुक्त व्यापार समझौते कृषि उत्पादों, विशेष रूप से मिलेट्स के लिए नए निर्यात अवसर खोल सकते हैं। उन्होंने बताया कि बाजरा, ज्वार और रागी जैसे मिलेट्स कम पानी में उगाए जा सकते हैं, लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं और पोषण की दृष्टि से भी अत्यधिक लाभकारी हैं।
सेश ने कहा, 'मिलेट्स का उपयोग देश के भीतर तो किया ही जा सकता है, साथ ही इन्हें निर्यात भी किया जा सकता है। आज जिन कई प्रकार के सीरियल बार और स्वास्थ्य उत्पादों का आयात किया जाता है, उनमें मिलेट्स का उपयोग किया जा सकता है।' उन्होंने बताया कि मिलेट्स की बढ़ती माँग का असर बाज़ार में दिखने लगा है और इस वर्ष इनके दामों में लगभग 15 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि देखी गई है।
सेश ने महाराष्ट्र को भारत की कृषि वृद्धि का महत्वपूर्ण केंद्र बताते हुए कहा कि राज्य की विविध कृषि-जलवायु परिस्थितियाँ उसे खाद्यान्न, फल और सब्जियों के उत्पादन में विशेष बढ़त देती हैं। उन्होंने कहा कि भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग और वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) जैसी पहलें किसानों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य दिलाने में सहायक हो सकती हैं।
ऊर्जा विविधीकरण: एकल स्रोत पर निर्भरता का जोखिम
ऊर्जा सुरक्षा पर सेश ने कहा कि वैश्विक आपूर्ति बाधाओं और भू-राजनीतिक तनावों के दौर में किसी एक ऊर्जा स्रोत पर निर्भर रहना जोखिमपूर्ण हो सकता है। उन्होंने एथेनॉल मिश्रित ईंधन (ई20) को बढ़ावा देने के साथ-साथ सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, हाइड्रोजन ऊर्जा और परमाणु ऊर्जा में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में लगभग हर वस्तु और संसाधन को रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसे में भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि बाहरी व्यवधान उसकी संप्रभुता, आर्थिक स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित न कर सकें।
सप्तधारा पर व्यापारियों की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित 'सप्तधारा' को देश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण रोडमैप बताते हुए छत्तीसगढ़ के रायगढ़ के स्थानीय व्यापारियों ने इसका स्वागत किया। कपड़ा व्यापारी विजय छाबड़ा ने कहा कि सप्तधारा के तहत मैन्युफैक्चरिंग, कृषि एवं फूड प्रोसेसिंग, टेक्नोलॉजी और एआई, गति शक्ति, रक्षा एवं सिविल डिफेंस, ग्रीन-ब्लू इकॉनमी और भारत की सॉफ्ट पावर जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
व्यापारी रवि कटारे ने कहा कि यदि सरकार उद्योगों के लिए कच्चा माल सस्ती दरों पर उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी कदम उठाती है, तो उत्पादन लागत घटेगी और इसका लाभ व्यापारियों के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं को भी मिलेगा। व्यापारी विजय अग्रवाल ने कहा कि कोरोना महामारी के बाद से कारोबार कई चुनौतियों से गुजर रहा है और नई उद्योग नीति व सप्तधारा के प्रयास व्यापार को पुनः गति देने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
व्यापारी ओमकार सिंह बग्गा ने कहा कि यदि इन योजनाओं को जमीनी स्तर पर तेजी से लागू किया जाता है और उद्योगों को जरूरी सुविधाएँ एवं सस्ता कच्चा माल उपलब्ध कराया जाता है, तो अगले 5 से 7 वर्ष भारत की आर्थिक प्रगति के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। विशेषज्ञों और व्यापारियों दोनों की राय में, इन क्षेत्रों में नीतिगत निरंतरता और त्वरित क्रियान्वयन ही भारत की आत्मनिर्भरता की असली कसौटी होगी।