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भारत का रक्षा उत्पादन 2025-26 में रिकॉर्ड ₹1.78 लाख करोड़, निर्यात 80 से अधिक देशों तक पहुंचा

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भारत का रक्षा उत्पादन 2025-26 में रिकॉर्ड ₹1.78 लाख करोड़, निर्यात 80 से अधिक देशों तक पहुंचा

सारांश

एक दशक के सुधारों का नतीजा — भारत का रक्षा उत्पादन ₹4,746 करोड़ से उछलकर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुँचा और निर्यात 80 से अधिक देशों तक फैला। 2029 तक ₹3 लाख करोड़ उत्पादन और ₹50,000 करोड़ निर्यात का लक्ष्य — आत्मनिर्भरता से वैश्विक रक्षा शक्ति की ओर भारत का सफर।

मुख्य बातें

भारत का रक्षा उत्पादन 2025-26 में ₹1.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा, जो 2013-14 में ₹4,746 करोड़ था।
रक्षा निर्यात ₹686 करोड़ से बढ़कर ₹38,424 करोड़ ; भारतीय उपकरण अब 80 से अधिक देशों में निर्यात।
सरकार का लक्ष्य 2029 तक ₹3 लाख करोड़ उत्पादन और ₹50,000 करोड़ निर्यात।
रक्षा R&D आवंटन 2014-15 के ₹13,716 करोड़ से बढ़कर 2026-27 में ₹29,100 करोड़ — 112% से अधिक वृद्धि।
97 तेजस एमके-1ए (~₹62,000 करोड़) और 156 एलसीएच 'प्रचंड' (~₹62,700 करोड़) की खरीद को मंजूरी।
DAC ने ₹6 लाख करोड़ से अधिक की स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के लिए AoN दी।

भारत का रक्षा उत्पादन 2025-26 में ₹1.78 लाख करोड़ के ऐतिहासिक स्तर पर पहुँच गया है — जो 2013-14 में मात्र ₹4,746 करोड़ था। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार द्वारा जारी फैक्टशीट के अनुसार, पिछले एक दशक में किए गए व्यापक रक्षा सुधारों ने भारत को सैन्य उपकरणों के उत्पादन और निर्यात में आत्मनिर्भर एवं वैश्विक स्तर पर विश्वसनीय शक्ति के रूप में स्थापित किया है।

उत्पादन और निर्यात के आंकड़े

2025-26 में रक्षा उत्पादन में सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों की हिस्सेदारी 76 प्रतिशत रही, जबकि निजी क्षेत्र ने 24 प्रतिशत योगदान दिया। रक्षा निर्यात के मोर्चे पर भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है — 2013-14 में जहाँ निर्यात मात्र ₹686 करोड़ था, वह 2025-26 में बढ़कर ₹38,424 करोड़ हो गया। भारतीय सैन्य उपकरण अब 80 से अधिक देशों में निर्यात किए जा रहे हैं।

निर्यात में निजी क्षेत्र का योगदान ₹17,353 करोड़ यानी 45.16 प्रतिशत रहा, जबकि रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों ने ₹21,071 करोड़ यानी 54.84 प्रतिशत का योगदान दिया।

सरकार का अगला लक्ष्य

केंद्र सरकार ने 2029 तक सालाना ₹3 लाख करोड़ का रक्षा उत्पादन और ₹50,000 करोड़ का रक्षा निर्यात हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक रक्षा बाज़ार में भारत की साख तेज़ी से बढ़ रही है और कई देश भारतीय रक्षा उत्पादों में रुचि दिखा रहे हैं।

अनुसंधान एवं विकास में निवेश

रक्षा अनुसंधान एवं विकास के लिए आवंटन 2014-15 में ₹13,716.14 करोड़ से बढ़कर 2026-27 में ₹29,100.25 करोड़ हो गया है, जो 112 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है। 2022-23 से रक्षा अनुसंधान एवं विकास बजट का 25 प्रतिशत हिस्सा उद्योग, स्टार्टअप और अकादमिक संस्थानों के लिए आरक्षित किया गया है।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की 24 प्रयोगशालाओं में उपलब्ध परीक्षण सुविधाओं को डिफेंस टेस्टिंग पोर्टल (DTP) के माध्यम से घरेलू निर्माताओं, स्टार्टअप और उद्योग के लिए सशुल्क आधार पर सुलभ बनाया गया है।

स्वदेशी खरीद और प्रमुख परियोजनाएँ

भारत की सर्वोच्च रक्षा खरीद संस्था रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने ₹6 लाख करोड़ से अधिक की DRDO-डिज़ाइन और भारतीय उद्योग-निर्मित रक्षा प्रणालियों के लिए आवश्यकता की स्वीकृति (AoN) दी है। स्वदेशी रक्षा खरीद के तहत 97 तेजस एमके-1ए लड़ाकू विमानों की लगभग ₹62,000 करोड़ और 156 एलसीएच 'प्रचंड' हेलीकॉप्टरों की लगभग ₹62,700 करोड़ की खरीद को मंजूरी दी गई है।

गौरतलब है कि रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP) 2020 और इससे पहले रक्षा खरीद प्रक्रिया (DPP) 2016 ने 'मेक इन इंडिया' को गति दी। रक्षा खरीद मैनुअल (DPM) 2025 ने लगभग ₹1 लाख करोड़ की राजस्व खरीद प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया, मंजूरियों में तेज़ी लाई और स्वदेशी परियोजनाओं के लिए दंड प्रावधानों में राहत दी।

आने वाले वर्षों में इन सुधारों की असली परीक्षा यह होगी कि क्या भारत वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में स्थायी स्थान बना पाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका अधिकांश हिस्सा अभी भी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से आता है — निजी क्षेत्र की 24% हिस्सेदारी बताती है कि 'मेक इन इंडिया' की वास्तविक जड़ें अभी उतनी गहरी नहीं हैं जितनी होनी चाहिए। निर्यात में 80 देशों तक पहुँच प्रभावशाली है, परंतु ₹38,424 करोड़ का आंकड़ा वैश्विक रक्षा निर्यात बाज़ार में भारत की हिस्सेदारी को देखते हुए अभी भी सीमित है। 2029 तक ₹3 लाख करोड़ उत्पादन का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है — असली कसौटी यह होगी कि क्या निजी क्षेत्र इस यात्रा में बराबरी का भागीदार बन पाता है, या सार्वजनिक उपक्रम ही इस रथ को खींचते रहेंगे।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का रक्षा उत्पादन 2025-26 में कितना रहा?
सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, भारत का रक्षा उत्पादन 2025-26 में ₹1.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा। तुलना के लिए, 2013-14 में यह आंकड़ा मात्र ₹4,746 करोड़ था।
भारत कितने देशों को रक्षा उपकरण निर्यात करता है?
भारत अब 80 से अधिक देशों को सैन्य उपकरण निर्यात करता है। रक्षा निर्यात 2013-14 के ₹686 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹38,424 करोड़ हो गया है।
2029 तक रक्षा उत्पादन और निर्यात का लक्ष्य क्या है?
केंद्र सरकार ने 2029 तक सालाना ₹3 लाख करोड़ का रक्षा उत्पादन और ₹50,000 करोड़ का रक्षा निर्यात हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
तेजस एमके-1ए और प्रचंड हेलीकॉप्टर खरीद की क्या स्थिति है?
स्वदेशी रक्षा खरीद के तहत 97 तेजस एमके-1ए लड़ाकू विमानों की लगभग ₹62,000 करोड़ और 156 एलसीएच 'प्रचंड' हेलीकॉप्टरों की लगभग ₹62,700 करोड़ की खरीद को मंजूरी दी जा चुकी है। ये परियोजनाएँ घरेलू एयरोस्पेस और रक्षा विनिर्माण क्षमता को मजबूत करेंगी।
रक्षा R&D बजट में कितनी वृद्धि हुई है?
रक्षा अनुसंधान एवं विकास आवंटन 2014-15 के ₹13,716.14 करोड़ से बढ़कर 2026-27 में ₹29,100.25 करोड़ हो गया है, जो 112 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है। 2022-23 से इस बजट का 25 प्रतिशत हिस्सा उद्योग, स्टार्टअप और अकादमिक संस्थानों के लिए खोला गया है।
राष्ट्र प्रेस
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