भारत का रक्षा निर्यात 12 वर्षों में 56 गुना बढ़ा: ₹686 करोड़ से ₹38,424 करोड़ तक, 80 देशों में पहुंची माँग
सारांश
मुख्य बातें
भारत का वार्षिक रक्षा निर्यात 2013-14 के ₹686 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में रिकॉर्ड ₹38,424 करोड़ तक पहुँच गया है — यह बारह वर्षों में लगभग 56 गुना की वृद्धि है। 17 जून 2026 को जारी एक आधिकारिक फैक्ट शीट के अनुसार, आज भारत के सैन्य उपकरणों की माँग विश्व के 80 से अधिक देशों में है, जो देश को वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में एक उभरती हुई शक्ति के रूप में स्थापित करती है।
नीतिगत सुधारों की भूमिका
'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' अभियानों के अंतर्गत सरकार ने रक्षा क्षेत्र में कई संरचनात्मक बदलाव किए। रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP) 2020 और रक्षा खरीद मैनुअल (DPM) 2025 के माध्यम से प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया, स्वदेशी सामग्री के उपयोग को अनिवार्य किया गया और निजी क्षेत्र तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए नए अवसरों के द्वार खोले गए। सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची, सृजन डीप पोर्टल और उदार प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नीति जैसी पहलों ने निजी क्षेत्र की भागीदारी को नई ऊँचाई दी।
रक्षा बजट और स्वदेशी उत्पादन में उछाल
आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, देश का रक्षा बजट 2013-14 के ₹2.53 लाख करोड़ से बढ़कर 2026-27 में ₹7.85 लाख करोड़ हो गया है। इसी अवधि में स्वदेशी रक्षा उत्पादन 2014-15 के ₹46,429 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹1.78 लाख करोड़ तक पहुँच गया। यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि भारत धीरे-धीरे आयात पर निर्भरता कम कर रहा है।
डीआरडीओ और अनुसंधान में निवेश
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने अत्याधुनिक तकनीकों को युद्धक्षेत्र के लिए तैयार प्रणालियों में बदलने में निर्णायक भूमिका निभाई है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास के लिए बजट आवंटन 2014-15 के ₹13,716.14 करोड़ से बढ़कर 2026-27 में ₹29,100.25 करोड़ हो गया है — यह 112 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है। गौरतलब है कि 2022-23 में सरकार ने रक्षा अनुसंधान बजट का 25 प्रतिशत उद्योगों, स्टार्टअप्स और शैक्षणिक संस्थानों के लिए आवंटित किया था। 2024 में इस उद्देश्य के लिए ₹1,757 करोड़ की राशि निर्धारित की गई।
निजी क्षेत्र के लिए खुली DRDO की प्रयोगशालाएँ
पारदर्शिता और सहयोग बढ़ाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने DRDO की 24 प्रयोगशालाओं की परीक्षण सुविधाएँ रक्षा परीक्षण पोर्टल पर उपलब्ध कराई हैं। इससे निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स को रक्षा तकनीकों के विकास और परीक्षण में सीधी सहायता मिल रही है। मानक संचालन प्रक्रियाएँ (SOP) भी तैयार की गई हैं ताकि सहयोग का ढाँचा सुव्यवस्थित रहे।
आगे की राह: विजन 2047
सरकार का कहना है कि पिछले एक दशक के प्रयासों ने विजन 2047 को ध्यान में रखते हुए एक आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार रक्षा तंत्र की मजबूत नींव रखी है। रणनीतिक साझेदारियों और स्वदेशी रक्षा प्लेटफॉर्म के माध्यम से भारत वैश्विक स्तर पर एक जिम्मेदार रक्षा साझेदार के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। यदि यही गति बनी रही, तो अगले दशक में भारत शीर्ष वैश्विक रक्षा निर्यातकों की सूची में अपनी जगह पक्की कर सकता है।