रक्षा उत्पादन में रिकॉर्ड ₹1.78 लाख करोड़: वित्त वर्ष 2026 में 15.6% की छलांग, 2014 से चार गुना वृद्धि
सारांश
मुख्य बातें
भारत का रक्षा उत्पादन वित्त वर्ष 2025-26 में ₹1.78 लाख करोड़ के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँच गया है — पिछले वित्त वर्ष के ₹1.54 लाख करोड़ की तुलना में यह 15.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। केंद्र सरकार ने बुधवार, 17 जून 2026 को यह जानकारी दी। रक्षा मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, यह आँकड़ा वित्त वर्ष 2013-14 के ₹43,746 करोड़ से लगभग चार गुना अधिक है।
मुख्य आँकड़े और वृद्धि का सफर
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2020-21 में रक्षा उत्पादन का मूल्य ₹84,643 करोड़ था। उसके बाद से अब तक इसमें 110 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह लगातार ऊर्ध्वगामी प्रवृत्ति दर्शाती है कि पिछले पाँच वर्षों में रक्षा विनिर्माण क्षेत्र ने असाधारण गति पकड़ी है।
गौरतलब है कि वित्त वर्ष 2013-14 में यह क्षेत्र मुख्यतः सरकारी उपक्रमों पर निर्भर था और निजी क्षेत्र की भागीदारी नगण्य थी। तब से नीतिगत सुधारों की एक श्रृंखला ने इस परिदृश्य को बदल दिया है।
सरकार की प्रतिक्रिया
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में इस उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को दिया। उन्होंने रक्षा उत्पादन विभाग तथा सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के सामूहिक प्रयासों की सराहना की।
मंत्री ने कहा कि "लगातार नीतिगत समर्थन, नई पहलों, निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी और बढ़ती निर्यात क्षमताओं के साथ, रक्षा उत्पादन क्षेत्र आने वाले वर्षों में और अधिक तेज़ी से आगे बढ़ने के लिए तैयार है।" रक्षा मंत्रालय ने इसे 'आत्मनिर्भर भारत' पहल के तहत रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया।
निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका
कुल उत्पादन में रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (PSU) और अन्य PSU की हिस्सेदारी लगभग 76 प्रतिशत रही। निजी क्षेत्र का योगदान 24 प्रतिशत रहा, जो वित्त वर्ष 2024-25 के 22 प्रतिशत से अधिक है।
मूल्य के संदर्भ में, वित्त वर्ष 2025-26 में निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी ₹42,000 करोड़ के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँची — जो रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र में इसकी बढ़ती भूमिका को रेखांकित करती है। यह बदलाव महत्वपूर्ण है, क्योंकि एक दशक पहले तक रक्षा उत्पादन लगभग पूरी तरह सरकारी उपक्रमों का एकाधिकार था।
रक्षा निर्यात पर असर
घरेलू उत्पादन में वृद्धि का सीधा प्रभाव रक्षा निर्यात पर भी पड़ा है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात ₹38,424 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, उत्पादन क्षमता में विस्तार ने निर्यात योग्य अधिशेष तैयार करने में बड़ी भूमिका निभाई है।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक रक्षा बाज़ार में भारतीय उपकरणों की माँग बढ़ रही है और सरकार 2029 तक ₹50,000 करोड़ के वार्षिक रक्षा निर्यात का लक्ष्य रखती है।
आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी और नीतिगत सुधारों की निरंतरता इस वृद्धि को बनाए रखने की कुंजी होगी। रक्षा मंत्रालय ने संकेत दिया है कि आने वाले वर्षों में अधिक उत्पादन श्रेणियों में लाइसेंसिंग प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा, जिससे नए निवेशकों के लिए प्रवेश की राह आसान होगी।