राजनाथ सिंह: रक्षा उत्पादन ₹46,000 करोड़ से बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़, निर्यात में 5,500% उछाल
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 14 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आकाशवाणी के माध्यम से सशस्त्र बलों को संबोधित करते हुए कहा कि आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार रक्षा क्षेत्र के ज़रिए सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' जैसी पहलों ने पिछले 12 वर्षों में देश के रक्षा क्षेत्र को आमूल रूप से बदल दिया है और भारत अब वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर रहा है।
रक्षा उत्पादन में चार गुना वृद्धि
राजनाथ सिंह ने आँकड़ों के हवाले से बताया कि वित्त वर्ष 2013-14 में देश का रक्षा उत्पादन मात्र ₹46,000 करोड़ था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड ₹1.78 लाख करोड़ तक पहुँच गया — यानी एक दशक में लगभग चार गुना बढ़ोतरी। कुल रक्षा उत्पादन में रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और अन्य सार्वजनिक संस्थाओं की हिस्सेदारी 76 प्रतिशत रही, जबकि निजी क्षेत्र की भागीदारी पिछले वित्त वर्ष के 22 प्रतिशत से बढ़कर 24 प्रतिशत हो गई।
रक्षा मंत्री ने इसे संरचनात्मक बदलावों का प्रमाण बताया और कहा कि निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी रक्षा क्षेत्र में लगातार बेहतर होते कारोबारी माहौल का संकेत है।
रक्षा निर्यात में ऐतिहासिक उछाल
राजनाथ सिंह ने बताया कि वित्त वर्ष 2013-14 में भारत का रक्षा निर्यात केवल ₹686 करोड़ था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर रिकॉर्ड ₹38,424 करोड़ हो गया — यह 5,500 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है। उन्होंने कहा, 'आज भारत में 145 रक्षा निर्यातक हैं और हमारे उत्पाद 80 से अधिक देशों को निर्यात किए जा रहे हैं। मुझे विश्वास है कि हम 2029 तक ₹50,000 करोड़ के रक्षा निर्यात के लक्ष्य को हासिल कर लेंगे।'
रक्षा बजट और पूंजीगत व्यय में बड़ा इज़ाफ़ा
रक्षा मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2013-14 में रक्षा बजट ₹2.53 लाख करोड़ था, जो वित्त वर्ष 2026-27 में बढ़कर ₹7.85 लाख करोड़ हो गया है। पूंजीगत व्यय भी ₹94,588 करोड़ से बढ़कर ₹2.19 लाख करोड़ पहुँच गया है। अनुसंधान एवं विकास (R&D) बजट वित्त वर्ष 2014-15 के ₹15,283 करोड़ से 90 प्रतिशत बढ़कर वित्त वर्ष 2026-27 में ₹29,100 करोड़ हो गया है। गौरतलब है कि पिछले एक वर्ष में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने ₹8.75 लाख करोड़ से अधिक की परियोजनाओं के लिए आवश्यकता की स्वीकृति दी है।
स्वदेशी हथियार प्रणालियों की सफलता
राजनाथ सिंह ने स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी में हुई प्रगति का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उन्नत अग्नि मिसाइल का MIRV (मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल) प्रौद्योगिकी से लैस होकर सफल परीक्षण रणनीतिक प्रतिरोधक क्षमता में एक नया आयाम जोड़ता है। इसके अलावा लंबी दूरी की जमीन पर हमला करने वाली क्रूज मिसाइल, रुद्र-2 हवा से सतह पर मार करने वाली मिसाइल, नौसैनिक पोत रोधी मिसाइल-एसआर और पिनाका लंबी दूरी की निर्देशित रॉकेट प्रणाली के सफल परीक्षणों का भी उल्लेख किया।
रक्षा मंत्री ने बताया कि स्वदेशी 'कुश' लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल का पहला सफल परीक्षण भी हो चुका है, जिससे देश की वायु रक्षा क्षमता और मज़बूत हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अब उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जो हाइपरसोनिक मिसाइल प्रौद्योगिकी विकसित करने में सक्षम हैं।
सीमावर्ती विकास और सशस्त्र बलों की भूमिका
रक्षा मंत्री ने रक्षा खरीद में किए गए बुनियादी सुधारों का उल्लेख किया, जिनमें फील्ड कमांडरों की वित्तीय सीमा को दोगुना करना और राजस्व मद के माध्यम से ₹1.25 लाख करोड़ से अधिक की खरीद को सुगम बनाना शामिल है। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में संपर्क और कनेक्टिविटी बढ़ाना सरकार के प्रमुख एजेंडे में है। राजनाथ सिंह ने प्राकृतिक आपदाओं के समय सशस्त्र बलों की 'पहले प्रतिक्रिया देने वाले' की भूमिका की भी सराहना की और कहा कि देश हो या विदेश, सशस्त्र बल हमेशा सबसे पहले मदद के लिए पहुँचते हैं। आने वाले वर्षों में स्वदेशी युद्धपोत, विमान और उन्नत सैन्य प्रणालियाँ रक्षा बलों की क्षमताओं को और अधिक सुदृढ़ करेंगी।