भारत ने रक्षा निर्यात में नया रिकॉर्ड बनाया: 38,424 करोड़ रुपए, 62.66%25 की वृद्धि
सारांश
Key Takeaways
- भारत का रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपए तक पहुँच गया है।
- 62.66 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
- 2030 तक 50,000 करोड़ रुपए के रक्षा निर्यात का लक्ष्य।
- रक्षा मंत्रालय ने 1.86 लाख करोड़ रुपए का पूंजीगत बजट पूरा किया।
- भारत की रक्षा क्षमताओं पर वैश्विक विश्वास बढ़ रहा है।
नई दिल्ली, 2 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत ने रक्षा निर्यात के क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर हासिल किया है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में देश का रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपए तक पहुँच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 62.66 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि है।
यह ध्यान देने योग्य है कि भारत ने वर्ष 2030 तक 50,000 करोड़ रुपए के रक्षा निर्यात का लक्ष्य तय किया है। इसके साथ ही देश में 3 लाख करोड़ रुपए का रक्षा उत्पादन भी किया जाएगा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जानकारी देते हुए कहा कि इस वर्ष रक्षा निर्यात में 14,802 करोड़ रुपए की महत्वपूर्ण बढ़ोतरी हुई है। यह बढ़ोतरी इस बात को दर्शाती है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की रक्षा क्षमताओं और उन्नत मैन्युफैक्चरिंग पर तेजी से विश्वास बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि इस उपलब्धि में रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र और निजी उद्योग दोनों का योगदान महत्वपूर्ण रहा है। कुल निर्यात में भारतीय सार्वजनिक उपक्रमों का योगदान 54.84 प्रतिशत और निजी क्षेत्र का 45.16 प्रतिशत रहा है। ये आंकड़े यह दर्शाते हैं कि भारत का रक्षा क्षेत्र अब एक मजबूत, सहयोगी और आत्मनिर्भर ढांचे के रूप में विकसित हो रहा है।
रक्षा मंत्री ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रेरणादायक नेतृत्व में भारत रक्षा निर्यात के क्षेत्र में नई सफलताओं की कहानी लिख रहा है। सरकार की आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया जैसी नीतियों के माध्यम से, देश न केवल अपनी जरूरतों को पूरा कर रहा है, बल्कि वैश्विक बाजार में अपनी पहचान भी बना रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के रक्षा उत्पादों की बढ़ती गुणवत्ता, प्रतिस्पर्धात्मक मूल्य और तकनीकी क्षमता ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी मांग को बढ़ावा दिया है। आगामी वर्षों में रक्षा निर्यात को और बढ़ाने के लिए सरकार नई रणनीतियों और साझेदारियों पर काम कर रही है। रक्षा निर्यात का यह रिकॉर्ड भारत के रक्षा क्षेत्र में बढ़ती ताकत, आत्मनिर्भरता और वैश्विक स्तर पर बढ़ते प्रभाव का स्पष्ट संकेत है।
रक्षा मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2025-26 में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। मंत्रालय ने अपने पूंजीगत बजट का पूरा उपयोग कर लिया है, जिसका कुल राशि 1.86 लाख करोड़ रुपए थी। यह लगातार दूसरा वर्ष है जब रक्षा मंत्रालय ने अपना पूरा कैपिटल बजट खर्च किया है। वित्त वर्ष 2024-25 में भी कई वर्षों में पहली बार पूंजीगत बजट का पूर्ण उपयोग किया गया था। वहीं यदि समग्र बजट का अवलोकन करें तो वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा मंत्रालय के पूरे बजट का 99.62 प्रतिशत उपयोग हुआ है, जिसमें नागरिक व्यय और पेंशन भी शामिल हैं।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, प्रारंभ में पूंजीगत व्यय के लिए 1.80 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया था, लेकिन सेनाओं की बढ़ती जरूरतों के चलते इसे बढ़ाकर 1.86 लाख करोड़ रुपए किया गया। इस खर्च का अधिकांश भाग आधुनिक सैन्य उपकरणों की खरीद पर केंद्रित था। सबसे अधिक खर्च लड़ाकू विमानों और उनके इंजनों की खरीद पर हुआ। इसके अतिरिक्त, विभिन्न सैन्य उपकरणों जैसे कि गोला-बारूद, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और जहाजों के निर्माण पर भी बड़ा खर्च किया गया।
रक्षा मंत्रालय का कहना है कि इस प्रकार का प्रभावी खर्च न केवल सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण में तेजी लाएगा, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास को भी मजबूती देगा। इसके अलावा, इससे देश की अर्थव्यवस्था को भी लाभ होगा क्योंकि पूंजीगत खर्च का प्रभाव कई क्षेत्रों में दिखाई देता है, जिससे निवेश बढ़ता है और रोजगार के नए अवसर सृजित होते हैं।