ऑस्ट्रेलिया में डिप्थीरिया का बड़ा प्रकोप: नॉर्दर्न टेरिटरी में 133 मामले, क्वींसलैंड और साउथ ऑस्ट्रेलिया तक पहुँचा संक्रमण

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ऑस्ट्रेलिया में डिप्थीरिया का बड़ा प्रकोप: नॉर्दर्न टेरिटरी में 133 मामले, क्वींसलैंड और साउथ ऑस्ट्रेलिया तक पहुँचा संक्रमण

सारांश

ऑस्ट्रेलिया में दशकों का सबसे बड़ा डिप्थीरिया प्रकोप नॉर्दर्न टेरिटरी से निकलकर क्वींसलैंड और साउथ ऑस्ट्रेलिया तक पहुँच गया है। 133 से अधिक मामले, एक संदिग्ध मौत और हर हफ्ते 15-20 नए केस — यह संकट आदिवासी समुदायों में टीकाकरण की कमी को उजागर करता है।

मुख्य बातें

नॉर्दर्न टेरिटरी में डिप्थीरिया के 133 मामले दर्ज; साउथ ऑस्ट्रेलिया में 6 और क्वींसलैंड में 5 तक मामले।
स्वास्थ्य मंत्री मार्क बटलर ने इसे 'पिछले कई दशकों में सबसे बड़ा' प्रकोप बताया।
डिप्थीरिया से जुड़ी एक संदिग्ध मौत की जाँच अधिकारियों द्वारा जारी।
प्रत्येक सप्ताह 15 से 20 नए मामले सामने आ रहे हैं; आदिवासी समुदाय सर्वाधिक प्रभावित।
बूस्टर खुराक की अनुशंसित अवधि 10 साल से घटाकर 5 साल की गई।
सेंट्रल ऑस्ट्रेलिया में हजारों लोग अभी भी बूस्टर खुराक से वंचित।

ऑस्ट्रेलिया के नॉर्दर्न टेरिटरी में डिप्थीरिया का प्रकोप हाल के दशकों में देश का सबसे गंभीर मामला बन चुका है, और अब यह संक्रमण पड़ोसी राज्यों क्वींसलैंड तथा साउथ ऑस्ट्रेलिया तक फैल गया है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने मंगलवार, 19 मई 2026 को यह जानकारी सार्वजनिक की। स्वास्थ्य मंत्री मार्क बटलर ने इसे 'शायद पिछले कई दशकों में सबसे बड़ा' प्रकोप बताया है।

मामलों की स्थिति और भौगोलिक विस्तार

नेशनल नोटिफिएबल डिजीज सर्विलांस सिस्टम के आँकड़ों के अनुसार, अब तक नॉर्दर्न टेरिटरी में 133 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त साउथ ऑस्ट्रेलिया में 6 मामले और क्वींसलैंड में 5 तक मामले सामने आए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, नॉर्दर्न टेरिटरी में प्रत्येक सप्ताह लगभग 15 से 20 नए मामले सामने आ रहे हैं, जो संक्रमण की निरंतर गति को दर्शाता है।

संदिग्ध मौत और सरकारी प्रतिक्रिया

स्वास्थ्य मंत्री मार्क बटलर ने पुष्टि की है कि अधिकारी डिप्थीरिया से जुड़ी एक संदिग्ध मौत की जाँच कर रहे हैं। यह जानकारी उन्होंने ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (ABC) को दिए साक्षात्कार में दी। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार आदिवासी और दूर-दराज के समुदायों में टीकाकरण अभियान को गति देने की कोशिश कर रही है।

आदिवासी समुदायों पर सबसे अधिक असर

यह प्रकोप खासतौर पर आदिवासी (Aboriginal) समुदायों को प्रभावित कर रहा है, विशेषकर दूरदराज के क्षेत्रों में। स्वास्थ्य अधिकारी अब एबोरिजिनल मेडिकल सेवाओं के साथ समन्वय करके परीक्षण और टीकाकरण की गति बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। स्थानीय स्वास्थ्य नेताओं के अनुसार, सेंट्रल ऑस्ट्रेलिया में अभी भी हजारों लोग अपनी बूस्टर खुराक लेने में पीछे हैं, हालाँकि हाल के हफ्तों में टीकाकरण की दर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

डिप्थीरिया क्या है और यह कैसे फैलता है

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, डिप्थीरिया एक संक्रामक रोग है जो विषाक्त पदार्थ (टॉक्सिन) उत्पन्न करने वाले बैक्टीरिया से होता है। यह संक्रमित व्यक्ति के खाँसने या छींकने से एक से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है। गौरतलब है कि कुछ संक्रमित लोगों में लक्षण नहीं दिखते, फिर भी वे दूसरों को संक्रमित करने में सक्षम होते हैं। इस बीमारी में बनने वाला टॉक्सिन श्वास नली को नुकसान पहुँचाता है और शरीर के अन्य अंगों तक भी फैल सकता है। सामान्य लक्षणों में बुखार, गले में खराश और गर्दन की ग्रंथियों में सूजन शामिल हैं।

टीकाकरण नीति में बदलाव और विशेषज्ञों की सलाह

डिप्थीरिया कभी बच्चों की मृत्यु का एक प्रमुख कारण था, परन्तु यह टीकाकरण से रोकी जा सकने वाली बीमारी है। जब समुदाय में रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, तो यह पुनः उभर सकती है। अधिकारियों ने अब जोखिम वाले वयस्कों के लिए बूस्टर खुराक की अनुशंसित अवधि दस साल से घटाकर पाँच साल कर दी है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि गले में दर्द या त्वचा में संक्रमण जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत परीक्षण कराएँ। यह प्रकोप इस बात की याद दिलाता है कि टीकाकरण कार्यक्रमों में किसी भी कमी के गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणाम हो सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि टीकाकरण कार्यक्रमों में संरचनात्मक असमानता का प्रमाण है — जहाँ आदिवासी और दूरदराज के समुदाय बार-बार सबसे पीछे छूट जाते हैं। बूस्टर अंतराल को दस साल से घटाकर पाँच साल करने का निर्णय सही दिशा में है, लेकिन यह सवाल उठता है कि यह बदलाव प्रकोप से पहले क्यों नहीं हुआ। मुख्यधारा की कवरेज मामलों की गिनती पर केंद्रित है, जबकि असली मुद्दा यह है कि सेंट्रल ऑस्ट्रेलिया में हजारों लोग एक रोकी जा सकने वाली बीमारी के सामने असुरक्षित क्यों थे।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऑस्ट्रेलिया में डिप्थीरिया का यह प्रकोप कितना गंभीर है?
यह हाल के दशकों में ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा डिप्थीरिया प्रकोप है। नॉर्दर्न टेरिटरी में 133 मामले, साउथ ऑस्ट्रेलिया में 6 और क्वींसलैंड में 5 तक मामले दर्ज हैं, और एक संदिग्ध मौत की जाँच भी जारी है।
डिप्थीरिया क्या है और यह कैसे फैलता है?
WHO के अनुसार, डिप्थीरिया एक संक्रामक बीमारी है जो टॉक्सिन उत्पन्न करने वाले बैक्टीरिया से होती है और संक्रमित व्यक्ति के खाँसने या छींकने से फैलती है। इसके सामान्य लक्षणों में बुखार, गले में खराश और गर्दन की ग्रंथियों में सूजन शामिल हैं। कुछ संक्रमित लोगों में लक्षण नहीं दिखते, फिर भी वे दूसरों को संक्रमित कर सकते हैं।
क्या डिप्थीरिया से बचाव संभव है?
हाँ, डिप्थीरिया टीकाकरण से रोकी जा सकने वाली बीमारी है। अधिकारियों ने जोखिम वाले वयस्कों के लिए बूस्टर खुराक की अनुशंसित अवधि दस साल से घटाकर पाँच साल कर दी है। गले में दर्द या त्वचा संक्रमण जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत परीक्षण कराने की सलाह दी गई है।
यह प्रकोप किन समुदायों को सबसे अधिक प्रभावित कर रहा है?
यह प्रकोप मुख्य रूप से आदिवासी (Aboriginal) समुदायों को प्रभावित कर रहा है, विशेषकर दूरदराज के इलाकों में। स्वास्थ्य अधिकारी एबोरिजिनल मेडिकल सेवाओं के साथ मिलकर परीक्षण और टीकाकरण बढ़ाने पर काम कर रहे हैं।
ऑस्ट्रेलियाई सरकार इस प्रकोप से निपटने के लिए क्या कदम उठा रही है?
स्वास्थ्य अधिकारी एबोरिजिनल मेडिकल सेवाओं के साथ समन्वय कर टेस्टिंग और टीकाकरण की गति बढ़ा रहे हैं। बूस्टर खुराक अंतराल को कम किया गया है और लोगों से लक्षण दिखने पर तुरंत परीक्षण कराने की अपील की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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