पेट्रोल ₹98.64, डीजल ₹91.58 प्रति लीटर: दिल्ली में ईंधन महंगाई से आम जनता बेहाल
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में मंगलवार, 19 मई से पेट्रोल की कीमत ₹98.64 प्रति लीटर और डीजल ₹91.58 प्रति लीटर हो गई है। ताज़ा बढ़ोतरी में पेट्रोल पर 86 पैसे और डीजल पर 83 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की गई है। इस इजाफे के बाद आम उपभोक्ताओं में निराशा और नाराज़गी साफ देखी जा रही है।
पेट्रोल पंपों पर उमड़ी भीड़
ईंधन की बढ़ी कीमतों की खबर फैलते ही उत्तर प्रदेश के बलिया में पेट्रोल पंपों पर वाहन चालकों की लंबी कतारें लग गईं। लोग आगे और कीमत बढ़ने की आशंका में अभी ही टंकी भरवाने पहुँचे। स्थानीय निवासियों ने एकमत होकर कहा कि युद्ध की परिस्थितियों के कारण ईंधन की कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं और इसकी सबसे ज़्यादा मार आम आदमी पर पड़ रही है।
उपभोक्ताओं की आवाज़
दिल्ली में एक उपभोक्ता ने कहा, 'मुझे सुबह ड्यूटी पर जाते समय ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के बारे में पता चला। बढ़ोतरी से फर्क तो पड़ रहा है, लेकिन हम कर भी क्या सकते हैं। युद्ध की स्थिति के कारण सभी देशों में हालात एक जैसे ही हैं। 2-3 रुपए बढ़ रहे हैं तो निश्चित तौर पर बजट पर असर पड़ रहा है।'
एक अन्य उपभोक्ता, जो सड़क किनारे कपड़ों का व्यवसाय करते हैं, ने बताया कि यह उनकी रोज़ाना की कमाई का ज़रिया है और ईंधन महंगा होने से उनकी आय पर सीधा असर पड़ रहा है। दिल्ली निवासी कृष्णा पाठक ने कहा कि देश में महंगाई लगातार बढ़ रही है — गैस से लेकर पेट्रोल-डीजल तक सब कुछ महंगा हो गया है, और घर चलाना मुश्किल होता जा रहा है।
मुंबई के निवासी दीपक सोलंकी ने कहा कि कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन आम आदमी के पास कोई विकल्प नहीं है — सबसे ज़्यादा परेशानी उसी को उठानी पड़ रही है।
बलिया में भी आक्रोश
बलिया में एक स्थानीय नागरिक ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि तीन रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। उन्होंने कहा कि गैस, डीजल, पेट्रोल — हर चीज़ महंगी हो गई है और पेट्रोल पंपों पर घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है।
युद्ध और वैश्विक बाज़ार का असर
कई उपभोक्ताओं ने ईंधन मूल्य वृद्धि के पीछे वैश्विक युद्ध परिस्थितियों को ज़िम्मेदार ठहराया। एक नागरिक ने माना कि सरकार हालात को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है, लेकिन इसका असर ज़मीन पर दिख रहा है। आलोचकों का कहना है कि इस महंगाई की मार सबसे ज़्यादा निम्न आय वर्ग और छोटे व्यवसायियों पर पड़ रही है।
आगे क्या
यह ताज़ा बढ़ोतरी ऐसे समय में आई है जब पहले से ही खाद्य पदार्थों और रसोई गैस की कीमतें ऊँची बनी हुई हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यदि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें नरम नहीं पड़तीं, तो आने वाले हफ्तों में और बढ़ोतरी से इनकार नहीं किया जा सकता।