भारत का रक्षा उत्पादन 10 वर्षों में 174% बढ़कर ₹1.54 लाख करोड़, निर्यात 34 गुना उछला: डॉ. जितेंद्र सिंह
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मंगलवार, 5 मई 2026 को प्रयागराज में आयोजित नॉर्थ टेक सिम्पोजियम 2026 को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने रक्षा उपकरणों के एक बड़े आयातक से उभरते निर्यातक के रूप में अपनी पहचान स्थापित की है। इस अवधि में देश का रक्षा उत्पादन 174 प्रतिशत बढ़कर ₹1.54 लाख करोड़ हो गया, जबकि रक्षा निर्यात 34 गुना उछलकर ₹23,622 करोड़ तक पहुँच गया।
रक्षा उत्पादन में ऐतिहासिक वृद्धि
डॉ. सिंह ने बताया कि कुल रक्षा निर्यात में लगभग ₹15,000 करोड़ का योगदान निजी क्षेत्र से आया है, जो सहयोगात्मक रक्षा निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव को रेखांकित करता है। उन्होंने कहा कि भारत अपने रक्षा क्षेत्र की यात्रा के एक निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है, जहाँ प्रौद्योगिकी, स्वदेशी इनोवेशन और निजी क्षेत्र की भागीदारी देश की नई वैश्विक पहचान तय कर रही है।
तकनीकी संप्रभुता पर ज़ोर
भारत के बढ़ते तकनीकी आधार का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्र अब रक्षा तैयारियों का अहम हिस्सा बन चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने क्वांटम-सिक्योर कम्युनिकेशन क्षमताओं में तेज़ी से प्रगति की है, जो भविष्य की युद्ध प्रणालियों में निर्णायक भूमिका निभाएगी। गौरतलब है कि अब युद्ध केवल शारीरिक शक्ति से नहीं, बल्कि उन्नत तकनीक, रियल-टाइम डेटा सिस्टम और ऑटोमेटेड प्लेटफॉर्म्स से भी संचालित हो रहा है।
बजट 2026-27 में रक्षा आवंटन
सरकार के बढ़ते समर्थन पर प्रकाश डालते हुए डॉ. सिंह ने बताया कि बजट 2026-27 में रक्षा क्षेत्र के लिए ₹6.81 लाख करोड़ आवंटित किए गए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9.5 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने कहा कि फंडिंग और नीतिगत पहलों के ज़रिए सरकार अनुसंधान, विकास और तैनाती के लिए एक मज़बूत इकोसिस्टम तैयार कर रही है।
नॉर्थ टेक सिम्पोजियम 2026 की भूमिका
नॉर्थ टेक सिम्पोजियम 2026 का आयोजन 4 से 6 मई तक प्रयागराज में किया जा रहा है। यह कार्यक्रम सशस्त्र बलों, उद्योग, अकादमिक संस्थानों और स्टार्टअप्स को एक मंच पर लाकर मिशन-उन्मुख स्वदेशी समाधान विकसित करने का अवसर देता है। इस आयोजन में 280 से अधिक उद्योग भागीदार हिस्सा ले रहे हैं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मानवरहित सिस्टम, काउंटर-ड्रोन टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स, साइबर व इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, कम्युनिकेशन सिस्टम और उच्च ऊँचाई वाले क्षेत्रों के लिए ऑपरेशनल सपोर्ट जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हो रहा है।
आत्मनिर्भर रक्षा इकोसिस्टम की राह
डॉ. सिंह ने सशस्त्र बलों की परिचालन ज़रूरतों, वैज्ञानिक अनुसंधान और औद्योगिक क्षमता के बीच समन्वय मज़बूत करने पर बल दिया, ताकि एक आत्मनिर्भर और सशक्त रक्षा इकोसिस्टम तैयार हो सके। उन्होंने विश्वास जताया कि सशस्त्र बलों, उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के सहयोगात्मक प्रयासों से भारत शीघ्र ही एक अग्रणी रक्षा प्रौद्योगिकी राष्ट्र के रूप में उभरेगा।