नागपुर हवाई अड्डा आधुनिकीकरण: कैबिनेट ने AAI भूमि लीज 2039 तक बढ़ाई, GMR को 30 साल की रियायत

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नागपुर हवाई अड्डा आधुनिकीकरण: कैबिनेट ने AAI भूमि लीज 2039 तक बढ़ाई, GMR को 30 साल की रियायत

सारांश

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नागपुर हवाई अड्डे की AAI भूमि लीज 2039 तक बढ़ाने को मंजूरी दी, जिससे GMR को 30 साल की रियायत का रास्ता खुला। MIHAN परियोजना के तहत यह हवाई अड्डा 3 करोड़ यात्री क्षमता के साथ मध्य भारत का प्रमुख विमानन केंद्र बनेगा।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 13 मई 2026 को AAI की भूमि लीज अवधि 6 अगस्त 2039 तक बढ़ाने को मंजूरी दी।
MIL अब GMR नागपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (GNIAL) को वाणिज्यिक संचालन तिथि से 30 वर्षों की रियायत दे सकेगा।
सर्वोच्च न्यायालय के 27 सितंबर 2024 के फैसले के बाद 8 अक्टूबर 2024 को MIL-GNIAL रियायत समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे।
चरणबद्ध विकास के तहत हवाई अड्डे की अंतिम क्षमता 3 करोड़ यात्री प्रतिवर्ष होगी।
MIHAN परियोजना के तहत नागपुर को मध्य भारत के प्रमुख मल्टी-मोडल कार्गो हब के रूप में विकसित किया जाएगा।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार, 13 मई 2026 को डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, नागपुर के उन्नयन और आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा निर्णय लेते हुए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) द्वारा मिहान इंडिया लिमिटेड (MIL) को पट्टे पर दी गई भूमि की लीज अवधि को 6 अगस्त 2039 तक बढ़ाने की मंजूरी दे दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक के बाद पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत हवाई अड्डे का दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित हो सकेगा।

निर्णय का मुख्य घटनाक्रम

सरकारी बयान के अनुसार, इस फैसले के बाद MIL वाणिज्यिक संचालन तिथि (COD) से 30 वर्षों के लिए नागपुर हवाई अड्डे का लाइसेंस रियायतग्राही GMR नागपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (GNIAL) को दे सकेगा। यह निर्णय नागपुर में मल्टी-मोडल इंटरनेशनल कार्गो हब और एयरपोर्ट (MIHAN) परियोजना के तहत इस हवाई अड्डे को मध्य भारत के प्रमुख क्षेत्रीय विमानन केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

पृष्ठभूमि और कानूनी यात्रा

वर्ष 2009 में AAI और महाराष्ट्र एयरपोर्ट डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (MADC) ने 49:51 के इक्विटी अनुपात में संयुक्त उद्यम कंपनी MIL का गठन किया था। उसी वर्ष AAI की हवाई अड्डा संपत्तियाँ MIL को हस्तांतरित की गईं, लेकिन भूमि सीमांकन संबंधी विवादों के कारण लीज डीड में वर्षों तक देरी होती रही।

वर्ष 2016 में MIL ने PPP मॉडल के तहत हवाई अड्डा संचालन हेतु वैश्विक निविदा जारी की, जिसमें GMR एयरपोर्ट्स लिमिटेड (GAL) 5.76% राजस्व हिस्से के साथ उच्चतम बोलीदाता बनी। बाद में यह राजस्व हिस्सा संशोधित होकर सकल राजस्व का 14.49% कर दिया गया। हालाँकि मार्च 2020 में MIL ने बोली प्रक्रिया रद्द कर दी, जिसे GAL ने बॉम्बे उच्च न्यायालय में चुनौती दी। अंततः सर्वोच्च न्यायालय ने 27 सितंबर 2024 को GAL के पक्ष में फैसला सुनाया, जिसके बाद 8 अक्टूबर 2024 को MIL और GNIAL के बीच रियायत समझौते पर हस्ताक्षर हुए।

विकास की योजना और क्षमता

सरकार के अनुसार, चरणबद्ध विकास के तहत इस हवाई अड्डे की अंतिम क्षमता 3 करोड़ यात्रियों को प्रतिवर्ष संभालने की होगी। यह परियोजना न केवल विदर्भ क्षेत्र में हवाई संपर्क को मजबूत करेगी, बल्कि माल ढुलाई क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि लाएगी। गौरतलब है कि MIHAN परियोजना को मध्य भारत के आर्थिक बुनियादी ढाँचे की रीढ़ के रूप में देखा जाता है।

आम जनता और क्षेत्र पर असर

नागपुर हवाई अड्डे का यह उन्नयन विदर्भ के व्यापारिक और औद्योगिक समुदाय के लिए विशेष महत्व रखता है। बेहतर हवाई संपर्क से क्षेत्र में निवेश आकर्षित होने और रोज़गार के अवसर बढ़ने की संभावना है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार देशभर में हवाई अड्डों के निजीकरण और आधुनिकीकरण को प्राथमिकता दे रही है।

आगे क्या होगा

लीज अवधि विस्तार की मंजूरी के बाद अब GNIAL को औपचारिक रूप से 30 वर्षीय रियायत सौंपी जाएगी। हवाई अड्डे के विकास कार्य के चरणबद्ध क्रियान्वयन की समय-सीमा और विस्तृत योजना जल्द सार्वजनिक होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

2020 में उसका रद्द होना, और फिर सर्वोच्च न्यायालय तक की लड़ाई। यह दर्शाता है कि भारत में बड़े हवाई अड्डा निजीकरण सौदे तकनीकी मंजूरियों से अधिक कानूनी और नौकरशाही अवरोधों में उलझते हैं। MIHAN की क्षमता दशकों पुरानी है, लेकिन क्रियान्वयन की गति हमेशा महत्वाकांक्षा से पीछे रही है। असली परीक्षा अब GMR की क्षमता की होगी — कि वह विदर्भ जैसे अर्ध-औद्योगिक क्षेत्र में 3 करोड़ यात्री क्षमता को वास्तविकता में बदल पाता है या नहीं।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नागपुर हवाई अड्डे के आधुनिकीकरण को कैबिनेट की मंजूरी का क्या अर्थ है?
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने AAI द्वारा MIL को पट्टे पर दी गई भूमि की लीज अवधि 6 अगस्त 2039 तक बढ़ाने की अनुमति दी है, जिससे GMR नागपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड को 30 वर्षों की रियायत मिलने का रास्ता खुल गया है। इससे PPP मॉडल के तहत हवाई अड्डे का दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित होगा।
GMR को नागपुर हवाई अड्डे की रियायत कैसे मिली?
2016 में वैश्विक निविदा में GMR एयरपोर्ट्स लिमिटेड उच्चतम बोलीदाता बनी थी, लेकिन MIL ने मार्च 2020 में बोली प्रक्रिया रद्द कर दी। GMR ने इसे बॉम्बे उच्च न्यायालय में चुनौती दी और सर्वोच्च न्यायालय ने 27 सितंबर 2024 को GMR के पक्ष में फैसला सुनाया, जिसके बाद 8 अक्टूबर 2024 को रियायत समझौते पर हस्ताक्षर हुए।
MIHAN परियोजना क्या है और नागपुर के लिए इसका महत्व क्यों है?
MIHAN यानी मल्टी-मोडल इंटरनेशनल कार्गो हब और एयरपोर्ट, नागपुर को मध्य भारत के प्रमुख विमानन और कार्गो केंद्र के रूप में विकसित करने की महत्वाकांक्षी परियोजना है। इसके तहत हवाई अड्डे की अंतिम क्षमता 3 करोड़ यात्री प्रतिवर्ष तक पहुँचाने का लक्ष्य है, जो विदर्भ क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि के लिए निर्णायक होगी।
MIL क्या है और इसमें AAI की क्या भूमिका है?
मिहान इंडिया लिमिटेड (MIL) एक संयुक्त उद्यम कंपनी है, जिसका गठन 2009 में AAI और महाराष्ट्र एयरपोर्ट डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (MADC) ने 49:51 के इक्विटी अनुपात में किया था। AAI की हवाई अड्डा संपत्तियाँ और भूमि MIL को हस्तांतरित की गई थीं, जो अब GNIAL को रियायत देगी।
नागपुर हवाई अड्डे के विकास से आम यात्रियों को क्या फायदा होगा?
3 करोड़ यात्री क्षमता के साथ नागपुर हवाई अड्डा मध्य भारत के प्रमुख हवाई अड्डों में शामिल हो जाएगा, जिससे विदर्भ क्षेत्र में हवाई संपर्क बेहतर होगा। इससे अधिक उड़ानें, बेहतर सुविधाएँ और माल ढुलाई में वृद्धि होगी, जो क्षेत्र के व्यापार और रोज़गार को भी बढ़ावा देगी।
राष्ट्र प्रेस
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