2030 तक 50,000 करोड़ रुपए का रक्षा निर्यात, उत्पादन तंत्र को सशक्त बनाने की दिशा में कदम: संजय सेठ
सारांश
Key Takeaways
- भारत 2030 तक 50,000 करोड़ रुपए का रक्षा निर्यात करेगा।
- केंद्रीय बजट 2026-27 में 7.85 लाख करोड़ रुपये का आवंटन होगा।
- एमएसएमई और स्टार्ट-अप का रक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान।
- कॉन्क्लेव में आधुनिक तकनीकों पर चर्चा हुई।
- आत्मनिर्भरता के लक्ष्य की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
नई दिल्ली, 20 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारत का लक्ष्य है कि वह वर्ष 2030 तक 50,000 करोड़ रुपए का रक्षा निर्यात करेगा। इसके साथ ही देश में 3 लाख करोड़ रुपए का रक्षा उत्पादन भी किया जाएगा। रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने इस लक्ष्य को प्राप्त करने का आश्वासन दिया।
रक्षा राज्यमंत्री ने नेशनल डिफेंस इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव 2026 में यह बात कही। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्रीय बजट 2026-27 में रक्षा मंत्रालय को 7.85 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया जाएगा, जो एमएसएमई और स्टार्ट-अप के लिए नए अवसरों का सृजन करेगा।
इस कॉन्क्लेव में देश के रक्षा उत्पादन तंत्र को मजबूत करने और आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल पर विस्तार से चर्चा की गई। इसमें एमएसएमई, डिफेंस पीएसयूज, निजी रक्षा कंपनियां, स्टार्ट-अप, नीति-निर्माता और शिक्षाविद शामिल हुए।
समापन सत्र में संजय सेठ ने कहा कि एमएसएमई और स्टार्ट-अप राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करते हुए भारत को वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र बनाने में महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भरता के दृष्टिकोण का भी उल्लेख किया।
रक्षा उत्पादन सचिव संजय कुमार ने बताया कि इस कॉन्क्लेव ने एमएसएमई को उद्योग जगत और नीति-निर्माताओं के साथ संवाद का मौका दिया। इससे तकनीकी विकास और आपूर्ति श्रृंखला के एकीकरण की संभावनाएं बढ़ी हैं।
कॉन्क्लेव के दौरान कई महत्वपूर्ण तकनीकी सत्र हुए, जिनमें तोपखाना, छोटे हथियार, विशेष धातुएं, और नौसैनिक प्लेटफॉर्म जैसे क्षेत्र शामिल थे। इसके साथ ही, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्री 4.0 पर भी चर्चा की गई।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह सम्मेलन आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में मददगार साबित हुआ है। संजय सेठ ने कहा कि भारत रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है और वैश्विक स्तर पर एक भरोसेमंद साझेदार बनता जा रहा है।
कॉन्क्लेव में एमएसएमई की भूमिका पर चर्चा हुई और बताया गया कि कैसे उन्नत निर्माण तकनीकों से ये उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री विकसित कर रहे हैं। यह पहल भारत के आत्मनिर्भर रक्षा विनिर्माण तंत्र को और मजबूत बना रही है।