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ऋतुराज गायकवाड़ बोले — मिडिल ऑर्डर में बैटिंग अलग चुनौती, 100+ पारियों का ओपनर अनुभव काम आता है

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ऋतुराज गायकवाड़ बोले — मिडिल ऑर्डर में बैटिंग अलग चुनौती, 100+ पारियों का ओपनर अनुभव काम आता है

सारांश

ओपनर से मध्यक्रम तक — ऋतुराज गायकवाड़ ने गुवाहाटी में खुलकर बात की। 100 से ज़्यादा फर्स्ट-क्लास ओपनिंग पारियों के अनुभव के बाद अब चौथे नंबर की ज़िम्मेदारी, लंबे अंतराल की घबराहट, और वर्तमान पर फोकस — यही है उनकी सोच।

मुख्य बातें

ऋतुराज गायकवाड़ ने गुवाहाटी में माना कि मिडिल ऑर्डर में बैटिंग करना उनके लिए तकनीकी और मानसिक, दोनों रूप से अलग चुनौती है।
फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में 100 से ज़्यादा ओपनिंग पारियों का अनुभव रखने वाले गायकवाड़ अब भारत के लिए चौथे नंबर पर उतर रहे हैं।
अब तक खेले 10 वनडे मैचों में उन्होंने 1 शतक और 1 अर्धशतक की मदद से 241 रन बनाए हैं।
तिरुवनंतपुरम में 8 विकेट की जीत में गायकवाड़ 13 रन पर नाबाद रहे।
उन्होंने बताया कि दिसंबर 2025 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ शतक के बाद से लंबा अंतराल रहा, जिससे वापसी पर घबराहट स्वाभाविक थी।
गायकवाड़ का संदेश — भविष्य की चिंता नहीं, मैदान पर वर्तमान में अपना सर्वश्रेष्ठ देना ही लक्ष्य।

भारतीय बल्लेबाज ऋतुराज गायकवाड़ ने 30 सितंबर 2026 को गुवाहाटी में ब्रॉडकास्टर से बात करते हुए स्वीकार किया कि अंतरराष्ट्रीय मैचों के बीच लंबे अंतराल के बाद टीम में वापसी पर स्वाभाविक घबराहट होती है। उन्होंने कहा कि अपनी परंपरागत ओपनिंग भूमिका छोड़कर मध्यक्रम में उतरना न केवल तकनीकी, बल्कि मानसिक दृष्टि से भी एक अलग अनुभव है।

मिडिल ऑर्डर की अलग चुनौतियाँ

गायकवाड़ ने अपनी बात को विस्तार देते हुए कहा, 'बहुत अंतर है। मैंने जैसा कहा कि फर्स्ट-क्लास लेवल पर 100 से ज़्यादा पारियों में ओपनिंग की है। इसी वजह से मिडिल ऑर्डर में बैटिंग करना, खासकर इंटरनेशनल क्रिकेट में अलग-अलग चुनौतियाँ लेकर आता है। आपको स्ट्राइक रोटेट करनी होती है। आपको यह पक्का करना होता है कि आप सही विकल्प चुनें।'

उन्होंने पावरप्ले और मिडिल ओवर्स के फर्क पर भी रोशनी डाली — 'पावरप्ले में फील्डर अंदर होते हैं, इसलिए बाउंड्री अपेक्षाकृत आसान होती है। मिडिल ऑर्डर में आपको परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालना पड़ता है और अपनी ताकत पर भरोसा रखना पड़ता है, चाहे वह कुछ भी हो।'

वनडे करियर में अब तक का प्रदर्शन

गायकवाड़ अपने करियर में मुख्यतः ओपनिंग बल्लेबाज के रूप में जाने जाते हैं, लेकिन जब भी भारतीय टीम में चौथे नंबर पर खिलाड़ी की ज़रूरत पड़ी, उन्होंने वह ज़िम्मेदारी निभाई है। अब तक खेले गए 10 वनडे मैचों में उन्होंने एक शतक और एक अर्धशतक की मदद से कुल 241 रन बनाए हैं। तिरुवनंतपुरम में हुई हालिया जीत में वे 13 रन पर नाबाद रहे, जहाँ भारत ने 8 विकेट से मैच अपने नाम किया।

लंबे अंतराल के बाद वापसी की घबराहट

गायकवाड़ ने उस मनोवैज्ञानिक दबाव का भी ज़िक्र किया जो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से लंबे समय बाहर रहने के बाद महसूस होता है। उन्होंने कहा, 'सच कहूँ तो, वह बहुत पहले की बात है — दिसंबर 2025 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ शतक। उसके बाद मैंने कई पारियाँ खेलीं, आईपीएल भी था, अलग-अलग कंडीशन में और अलग-अलग नंबर पर बल्लेबाजी की। लंबे समय बाद इंटरनेशनल लेवल पर वापसी करने पर थोड़ी घबराहट होती है — लेकिन पिछले गेम में मैदान पर थोड़ी देर टिके रहना बेहतर रहा।'

गौरतलब है कि यह वह दौर है जब भारतीय टीम प्रबंधन मध्यक्रम में विकल्पों को लेकर प्रयोग कर रहा है और गायकवाड़ की अनुकूलन क्षमता उनके चयन की एक बड़ी वजह मानी जा रही है।

वर्तमान पर फोकस, भविष्य की चिंता नहीं

टीम में अपनी जगह को लेकर बनी अनिश्चितता पर गायकवाड़ ने परिपक्व जवाब दिया। उन्होंने कहा, 'बात बस अपना बेस्ट देने की है। जब तक भारत के लिए खेलने का मौका मिल रहा है, बस मैदान पर जाकर अपना बेस्ट देना जरूरी है — न कि यह सोचना कि आगे मौके मिलेंगे या नहीं। कभी-कभी इसे समझना या स्वीकार करना मुश्किल होता है, लेकिन आपको अपने देश के लिए खेलने का आनंद लेना चाहिए।'

यह ऐसे समय में आया है जब आने वाले सीरीज मैचों में गायकवाड़ की भूमिका और भी अहम होने की संभावना है — उनके प्रदर्शन पर नज़र बनाए रखना दिलचस्प होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब टीम दबाव में हो और उन्हें पाँचवें-छठे ओवर से नहीं, बल्कि तीसवें ओवर के बाद पारी बाँधनी हो। यह ऐसे समय में भी प्रासंगिक है जब भारतीय चयनकर्ता नंबर-4 की स्थायी भूमिका की तलाश में हैं। गायकवाड़ की परिपक्वता और 'वर्तमान पर फोकस' वाली मानसिकता सराहनीय है, लेकिन मुख्यधारा की कवरेज यह नहीं पूछती कि क्या यह टीम की रणनीतिक ज़रूरत है या कि गायकवाड़ ओपनर के रूप में कहीं ज़्यादा प्रभावशाली हो सकते थे।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऋतुराज गायकवाड़ मिडिल ऑर्डर में बैटिंग को चुनौतीपूर्ण क्यों मानते हैं?
गायकवाड़ ने फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में 100 से ज़्यादा पारियाँ ओपनर के रूप में खेली हैं, इसलिए मिडिल ऑर्डर में स्ट्राइक रोटेशन और सही विकल्प चुनना उनके लिए तकनीकी और मानसिक दोनों तरह की अलग चुनौती है। पावरप्ले जैसी आसान बाउंड्री मध्यक्रम में नहीं मिलतीं, जिससे खेल की शैली बदलनी पड़ती है।
वनडे क्रिकेट में ऋतुराज गायकवाड़ का अब तक का प्रदर्शन कैसा रहा है?
गायकवाड़ ने अब तक 10 वनडे मैचों में 1 शतक और 1 अर्धशतक की मदद से कुल 241 रन बनाए हैं। उनका सबसे हालिया प्रदर्शन तिरुवनंतपुरम में 8 विकेट की जीत में 13 रन नाबाद रहना था।
ऋतुराज गायकवाड़ ने आखिरी अंतरराष्ट्रीय शतक कब बनाया था?
गायकवाड़ ने अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय शतक दिसंबर 2025 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ बनाया था। उन्होंने खुद माना कि तब से काफी लंबा वक्त गुज़र चुका है, जिसके बीच आईपीएल और घरेलू क्रिकेट की पारियाँ भी शामिल रहीं।
गायकवाड़ टीम में अनिश्चितता को कैसे संभालते हैं?
उन्होंने कहा कि वे बहुत आगे की सोचने के बजाय वर्तमान पर ध्यान देते हैं। उनके अनुसार, जब तक भारत के लिए खेलने का मौका मिले, बस मैदान पर जाकर अपना सर्वश्रेष्ठ देना ज़रूरी है और इस अवसर का आनंद लेना चाहिए।
क्या ऋतुराज गायकवाड़ भारतीय टीम में ओपनर के रूप में खेलते हैं?
अधिकांश मैचों में गायकवाड़ ओपनर के रूप में खेलते हैं, लेकिन जब भी भारतीय टीम में मध्यक्रम में जगह खाली हुई है, उन्होंने चौथे नंबर पर बल्लेबाजी की ज़िम्मेदारी निभाई है। यह लचीलापन उन्हें टीम के लिए एक बहुउद्देशीय विकल्प बनाता है।
राष्ट्र प्रेस
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