ऋतुराज गायकवाड़ बोले — मिडिल ऑर्डर में बैटिंग अलग चुनौती, 100+ पारियों का ओपनर अनुभव काम आता है
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय बल्लेबाज ऋतुराज गायकवाड़ ने 30 सितंबर 2026 को गुवाहाटी में ब्रॉडकास्टर से बात करते हुए स्वीकार किया कि अंतरराष्ट्रीय मैचों के बीच लंबे अंतराल के बाद टीम में वापसी पर स्वाभाविक घबराहट होती है। उन्होंने कहा कि अपनी परंपरागत ओपनिंग भूमिका छोड़कर मध्यक्रम में उतरना न केवल तकनीकी, बल्कि मानसिक दृष्टि से भी एक अलग अनुभव है।
मिडिल ऑर्डर की अलग चुनौतियाँ
गायकवाड़ ने अपनी बात को विस्तार देते हुए कहा, 'बहुत अंतर है। मैंने जैसा कहा कि फर्स्ट-क्लास लेवल पर 100 से ज़्यादा पारियों में ओपनिंग की है। इसी वजह से मिडिल ऑर्डर में बैटिंग करना, खासकर इंटरनेशनल क्रिकेट में अलग-अलग चुनौतियाँ लेकर आता है। आपको स्ट्राइक रोटेट करनी होती है। आपको यह पक्का करना होता है कि आप सही विकल्प चुनें।'
उन्होंने पावरप्ले और मिडिल ओवर्स के फर्क पर भी रोशनी डाली — 'पावरप्ले में फील्डर अंदर होते हैं, इसलिए बाउंड्री अपेक्षाकृत आसान होती है। मिडिल ऑर्डर में आपको परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालना पड़ता है और अपनी ताकत पर भरोसा रखना पड़ता है, चाहे वह कुछ भी हो।'
वनडे करियर में अब तक का प्रदर्शन
गायकवाड़ अपने करियर में मुख्यतः ओपनिंग बल्लेबाज के रूप में जाने जाते हैं, लेकिन जब भी भारतीय टीम में चौथे नंबर पर खिलाड़ी की ज़रूरत पड़ी, उन्होंने वह ज़िम्मेदारी निभाई है। अब तक खेले गए 10 वनडे मैचों में उन्होंने एक शतक और एक अर्धशतक की मदद से कुल 241 रन बनाए हैं। तिरुवनंतपुरम में हुई हालिया जीत में वे 13 रन पर नाबाद रहे, जहाँ भारत ने 8 विकेट से मैच अपने नाम किया।
लंबे अंतराल के बाद वापसी की घबराहट
गायकवाड़ ने उस मनोवैज्ञानिक दबाव का भी ज़िक्र किया जो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से लंबे समय बाहर रहने के बाद महसूस होता है। उन्होंने कहा, 'सच कहूँ तो, वह बहुत पहले की बात है — दिसंबर 2025 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ शतक। उसके बाद मैंने कई पारियाँ खेलीं, आईपीएल भी था, अलग-अलग कंडीशन में और अलग-अलग नंबर पर बल्लेबाजी की। लंबे समय बाद इंटरनेशनल लेवल पर वापसी करने पर थोड़ी घबराहट होती है — लेकिन पिछले गेम में मैदान पर थोड़ी देर टिके रहना बेहतर रहा।'
गौरतलब है कि यह वह दौर है जब भारतीय टीम प्रबंधन मध्यक्रम में विकल्पों को लेकर प्रयोग कर रहा है और गायकवाड़ की अनुकूलन क्षमता उनके चयन की एक बड़ी वजह मानी जा रही है।
वर्तमान पर फोकस, भविष्य की चिंता नहीं
टीम में अपनी जगह को लेकर बनी अनिश्चितता पर गायकवाड़ ने परिपक्व जवाब दिया। उन्होंने कहा, 'बात बस अपना बेस्ट देने की है। जब तक भारत के लिए खेलने का मौका मिल रहा है, बस मैदान पर जाकर अपना बेस्ट देना जरूरी है — न कि यह सोचना कि आगे मौके मिलेंगे या नहीं। कभी-कभी इसे समझना या स्वीकार करना मुश्किल होता है, लेकिन आपको अपने देश के लिए खेलने का आनंद लेना चाहिए।'
यह ऐसे समय में आया है जब आने वाले सीरीज मैचों में गायकवाड़ की भूमिका और भी अहम होने की संभावना है — उनके प्रदर्शन पर नज़र बनाए रखना दिलचस्प होगा।