सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने माणा और जोशीमठ में परखी सैन्य तैयारियाँ, SPARE अभियान को भी दिखाई हरी झंडी
सारांश
मुख्य बातें
थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने उत्तराखंड के सीमावर्ती गढ़वाल क्षेत्र का दौरा कर माणा और जोशीमठ में भारतीय सेना की परिचालन तैयारियों और युद्धक क्षमता की व्यापक समीक्षा की। इस दौरे में उन्होंने अग्रिम मोर्चे पर तैनात जवानों से सीधी बातचीत की और सीमावर्ती बुनियादी ढाँचे के विकास कार्यों का भी जायज़ा लिया। माणा, जो भारत के इस सीमावर्ती क्षेत्र का पहला गाँव है, इस दौरे का विशेष केंद्र बिंदु रहा।
परिचालन तैयारियों की समीक्षा
जनरल सेठ ने माणा और जोशीमठ में सेना की युद्धक तत्परता, हथियार प्रणालियों और संचार बुनियादी ढाँचे से जुड़ी परियोजनाओं की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों और जवानों को बदलती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक का व्यापक उपयोग सुनिश्चित करने और हर परिस्थिति में सतर्क रहने पर विशेष बल दिया।
सेना प्रमुख ने कहा कि सीमाओं की अभेद्य सुरक्षा के लिए सैनिकों की क्षमता और तैयारी को निरंतर उन्नत बनाए रखना अनिवार्य है। बदलते सुरक्षा परिदृश्य में तकनीक और परिचालन दक्षता एक-दूसरे की पूरक हैं।
जवानों की सराहना और सामाजिक विकास पहल
जनरल धीरज सेठ ने अग्रिम क्षेत्रों में कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में तैनात जवानों के पेशेवर रवैये, समर्पण और अदम्य मनोबल की मुक्त कंठ से सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से उन सामूहिक प्रयासों को रेखांकित किया जिनके ज़रिए सेना और स्थानीय निवासी मिलकर क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा दे रहे हैं, सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित कर रहे हैं और आजीविका के स्थायी अवसर तैयार कर रहे हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब सरकार की 'वाइब्रेंट विलेज' जैसी योजनाओं के तहत सीमावर्ती गाँवों के सामाजिक-आर्थिक विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जनरल सेठ का यह दौरा स्पष्ट करता है कि भारतीय सेना केवल सुरक्षा नहीं, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में समग्र विकास की भागीदार भी है।
स्टैलियंस SPARE अभियान: हरित परिवहन की अनूठी पहल
उल्लेखनीय है कि जनरल सेठ ने 12 अक्टूबर को दिल्ली छावनी स्थित मानेकशॉ केंद्र से 'स्टैलियंस पैन-हिमालयन ईवी राइडर्स एक्सपीडिशन' (SPARE) को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। यह अभियान दल अब हिमालय के दुर्गम रास्तों से होते हुए माणा तक पहुँचा है और अब पूर्वोत्तर की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
यह दल लगभग 4,850 किलोमीटर लंबे मार्ग पर हिमालय, गंगा के मैदानी इलाकों और पूर्वोत्तर भारत के विविध भौगोलिक क्षेत्रों से गुज़रेगा। इस अभियान में नाथू ला और बुम ला जैसे उच्च-ऊँचाई वाले दर्रे भी शामिल हैं, जो समुद्र तल से 4,500 मीटर से अधिक की ऊँचाई पर स्थित हैं।
इलेक्ट्रिक वाहनों की चुनौती और महत्व
इतनी ऊँचाई पर न्यून तापमान, विरल वायु और दुर्गम चढ़ाई के बीच इलेक्ट्रिक वाहनों का सफलतापूर्वक संचालन इस अभियान को रक्षा क्षेत्र में हरित परिवहन के संदर्भ में ऐतिहासिक बनाता है। सेना का यह प्रयोग भविष्य में ऊँचाई वाले क्षेत्रों में EV तकनीक की व्यावहारिकता को परखने की दृष्टि से महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करेगा।
सुरक्षा और विकास: दोहरी प्राथमिकता
सेना प्रमुख का यह संपूर्ण दौरा भारतीय सेना की उस दोहरी भूमिका को रेखांकित करता है जिसमें वह एक साथ सीमाओं की परिचालन तैयारियों को पैना रखती है और सीमावर्ती समुदायों के जीवन-स्तर को ऊँचा उठाने में सक्रिय भागीदारी निभाती है। गौरतलब है कि उत्तराखंड का गढ़वाल क्षेत्र रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है और यहाँ सेना की उपस्थिति देश की उत्तरी सुरक्षा का मेरुदंड मानी जाती है। आने वाले समय में SPARE अभियान के पूर्वोत्तर तक पहुँचने के साथ यह देखना होगा कि हिमालयी परिस्थितियों में EV तकनीक किस हद तक व्यावहारिक साबित होती है।