27 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने माणा और जोशीमठ में परखी सैन्य तैयारियाँ, SPARE अभियान को भी दिखाई हरी झंडी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने माणा और जोशीमठ में परखी सैन्य तैयारियाँ, SPARE अभियान को भी दिखाई हरी झंडी

सारांश

थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ का माणा-जोशीमठ दौरा महज़ निरीक्षण नहीं था — यह सुरक्षा और विकास की दोहरी रणनीति का संदेश था। साथ ही, 4,850 किमी लंबा SPARE EV अभियान 4,500 मीटर से ऊँचे दर्रों पर हरित परिवहन की संभावनाओं को परख रहा है।

मुख्य बातें

थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने उत्तराखंड के माणा और जोशीमठ में परिचालन तैयारियों और युद्धक क्षमता की समीक्षा की।
माणा भारत के इस सीमावर्ती क्षेत्र का पहला गाँव है; जनरल सेठ ने यहाँ सीमावर्ती विकास और आजीविका के प्रयासों का जायज़ा लिया।
सेना प्रमुख ने आधुनिक तकनीक के व्यापक उपयोग और सैन्य क्षमताओं में निरंतर सुधार पर बल दिया।
12 अक्टूबर को दिल्ली छावनी से रवाना SPARE (स्टैलियंस पैन-हिमालयन ईवी राइडर्स एक्सपीडिशन) अभियान अब पूर्वोत्तर की ओर बढ़ रहा है।
यह अभियान लगभग 4,850 किलोमीटर लंबा है और नाथू ला व बुम ला जैसे 4,500 मीटर से ऊँचे दर्रों को पार करेगा।
इलेक्ट्रिक वाहनों का उच्च-ऊँचाई परीक्षण सेना की हरित परिवहन प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने उत्तराखंड के सीमावर्ती गढ़वाल क्षेत्र का दौरा कर माणा और जोशीमठ में भारतीय सेना की परिचालन तैयारियों और युद्धक क्षमता की व्यापक समीक्षा की। इस दौरे में उन्होंने अग्रिम मोर्चे पर तैनात जवानों से सीधी बातचीत की और सीमावर्ती बुनियादी ढाँचे के विकास कार्यों का भी जायज़ा लिया। माणा, जो भारत के इस सीमावर्ती क्षेत्र का पहला गाँव है, इस दौरे का विशेष केंद्र बिंदु रहा।

परिचालन तैयारियों की समीक्षा

जनरल सेठ ने माणा और जोशीमठ में सेना की युद्धक तत्परता, हथियार प्रणालियों और संचार बुनियादी ढाँचे से जुड़ी परियोजनाओं की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों और जवानों को बदलती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक का व्यापक उपयोग सुनिश्चित करने और हर परिस्थिति में सतर्क रहने पर विशेष बल दिया।

सेना प्रमुख ने कहा कि सीमाओं की अभेद्य सुरक्षा के लिए सैनिकों की क्षमता और तैयारी को निरंतर उन्नत बनाए रखना अनिवार्य है। बदलते सुरक्षा परिदृश्य में तकनीक और परिचालन दक्षता एक-दूसरे की पूरक हैं।

जवानों की सराहना और सामाजिक विकास पहल

जनरल धीरज सेठ ने अग्रिम क्षेत्रों में कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में तैनात जवानों के पेशेवर रवैये, समर्पण और अदम्य मनोबल की मुक्त कंठ से सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से उन सामूहिक प्रयासों को रेखांकित किया जिनके ज़रिए सेना और स्थानीय निवासी मिलकर क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा दे रहे हैं, सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित कर रहे हैं और आजीविका के स्थायी अवसर तैयार कर रहे हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब सरकार की 'वाइब्रेंट विलेज' जैसी योजनाओं के तहत सीमावर्ती गाँवों के सामाजिक-आर्थिक विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जनरल सेठ का यह दौरा स्पष्ट करता है कि भारतीय सेना केवल सुरक्षा नहीं, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में समग्र विकास की भागीदार भी है।

स्टैलियंस SPARE अभियान: हरित परिवहन की अनूठी पहल

उल्लेखनीय है कि जनरल सेठ ने 12 अक्टूबर को दिल्ली छावनी स्थित मानेकशॉ केंद्र से 'स्टैलियंस पैन-हिमालयन ईवी राइडर्स एक्सपीडिशन' (SPARE) को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। यह अभियान दल अब हिमालय के दुर्गम रास्तों से होते हुए माणा तक पहुँचा है और अब पूर्वोत्तर की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

यह दल लगभग 4,850 किलोमीटर लंबे मार्ग पर हिमालय, गंगा के मैदानी इलाकों और पूर्वोत्तर भारत के विविध भौगोलिक क्षेत्रों से गुज़रेगा। इस अभियान में नाथू ला और बुम ला जैसे उच्च-ऊँचाई वाले दर्रे भी शामिल हैं, जो समुद्र तल से 4,500 मीटर से अधिक की ऊँचाई पर स्थित हैं।

इलेक्ट्रिक वाहनों की चुनौती और महत्व

इतनी ऊँचाई पर न्यून तापमान, विरल वायु और दुर्गम चढ़ाई के बीच इलेक्ट्रिक वाहनों का सफलतापूर्वक संचालन इस अभियान को रक्षा क्षेत्र में हरित परिवहन के संदर्भ में ऐतिहासिक बनाता है। सेना का यह प्रयोग भविष्य में ऊँचाई वाले क्षेत्रों में EV तकनीक की व्यावहारिकता को परखने की दृष्टि से महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करेगा।

सुरक्षा और विकास: दोहरी प्राथमिकता

सेना प्रमुख का यह संपूर्ण दौरा भारतीय सेना की उस दोहरी भूमिका को रेखांकित करता है जिसमें वह एक साथ सीमाओं की परिचालन तैयारियों को पैना रखती है और सीमावर्ती समुदायों के जीवन-स्तर को ऊँचा उठाने में सक्रिय भागीदारी निभाती है। गौरतलब है कि उत्तराखंड का गढ़वाल क्षेत्र रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है और यहाँ सेना की उपस्थिति देश की उत्तरी सुरक्षा का मेरुदंड मानी जाती है। आने वाले समय में SPARE अभियान के पूर्वोत्तर तक पहुँचने के साथ यह देखना होगा कि हिमालयी परिस्थितियों में EV तकनीक किस हद तक व्यावहारिक साबित होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

500 मीटर से ऊँचाई पर इलेक्ट्रिक वाहनों का परीक्षण भविष्य की सैन्य लॉजिस्टिक्स नीति को आकार दे सकता है। सवाल यह है कि क्या इन प्रयासों के परिणाम व्यवस्थित रूप से दस्तावेज़ीकृत होंगे, ताकि नीति-निर्माण में वास्तविक डेटा का उपयोग हो सके।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने माणा और जोशीमठ का दौरा क्यों किया?
जनरल धीरज सेठ ने उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में सेना की परिचालन तैयारियों, युद्धक क्षमता और बुनियादी ढाँचा विकास परियोजनाओं की समीक्षा के लिए यह दौरा किया। उन्होंने अग्रिम मोर्चे पर तैनात जवानों से बातचीत की और आधुनिक तकनीक के उपयोग पर बल दिया।
माणा गाँव का सैन्य दृष्टि से क्या महत्व है?
माणा भारत के इस सीमावर्ती क्षेत्र का पहला गाँव है और रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। सेना यहाँ न केवल परिचालन तैयारी बनाए रखती है, बल्कि स्थानीय समुदाय के साथ मिलकर पर्यटन, सांस्कृतिक संरक्षण और आजीविका के अवसर भी विकसित कर रही है।
SPARE (स्टैलियंस पैन-हिमालयन ईवी राइडर्स एक्सपीडिशन) क्या है?
SPARE भारतीय सेना का एक अभियान है जिसे जनरल धीरज सेठ ने 12 अक्टूबर को दिल्ली छावनी के मानेकशॉ केंद्र से हरी झंडी दिखाई। यह दल लगभग 4,850 किलोमीटर लंबे मार्ग पर इलेक्ट्रिक वाहनों से हिमालय, गंगा के मैदानों और पूर्वोत्तर भारत को पार करेगा, जो सेना की हरित परिवहन प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
SPARE अभियान में किन-किन दर्रों को पार किया जाएगा?
अभियान में नाथू ला और बुम ला जैसे उच्च-ऊँचाई वाले दर्रे शामिल हैं, जो समुद्र तल से 4,500 मीटर से अधिक की ऊँचाई पर स्थित हैं। इन चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रदर्शन इस अभियान को विशिष्ट बनाता है।
सीमावर्ती क्षेत्रों में भारतीय सेना की विकास भूमिका क्या है?
सेना प्रमुख के दौरे से स्पष्ट है कि भारतीय सेना सुरक्षा के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देने, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और स्थानीय समुदायों के लिए स्थायी आजीविका के अवसर पैदा करने में भी सक्रिय भूमिका निभा रही है। यह 'वाइब्रेंट विलेज' जैसी सरकारी योजनाओं के अनुरूप है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 3 महीने पहले