सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने दक्षिणी कमान का दौरा किया, परिचालन तत्परता और स्वदेशी क्षमताओं की समीक्षा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने 31 अगस्त 2026 को दक्षिणी कमान मुख्यालय का दौरा किया और कमान की परिचालन तैयारियों, चल रही क्षमता वृद्धि पहलों तथा प्रशिक्षण व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की। भारतीय सेना के अनुसार, यह दौरा दक्षिणी कमान की युद्धक क्षमता और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की तैयारियों का मूल्यांकन करने के उद्देश्य से किया गया।
मुख्य घटनाक्रम
दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (जीओसी-इन-सी) लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर ने सेना प्रमुख को मौजूदा परिचालन परिस्थितियों, सेना की तैयारियों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और युद्धक क्षमता को सुदृढ़ बनाने के लिए उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी दी। इस समीक्षा में क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और क्षमता वृद्धि की प्रगति पर विशेष ध्यान दिया गया।
सेना प्रमुख की प्राथमिकताएँ
जनरल सेठ ने युद्ध के बदलते स्वरूप को ध्यान में रखते हुए निरंतर परिचालन तत्परता बनाए रखने, परिस्थितियों के अनुरूप अनुकूलन, नई तकनीकों को तेज़ी से अपनाने और तकनीक, रणनीति एवं प्रक्रियाओं (टीटीपी) को लगातार बेहतर बनाने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य की चुनौतियों के लिए वास्तविक परिस्थितियों पर आधारित प्रशिक्षण अनिवार्य है।
सेना प्रमुख ने तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय — जिसे सैन्य भाषा में 'जॉइंटनेस' कहा जाता है — और स्वदेशी रक्षा क्षमताओं के विकास को प्रोत्साहित करने पर भी ज़ोर दिया। उनके अनुसार, इन उपायों से भारतीय सेना को अधिक सक्षम, तकनीकी रूप से सशक्त और भविष्य के लिए तैयार बनाया जा सकेगा।
अधिकारियों और जवानों की सराहना
जनरल धीरज सेठ ने दक्षिणी कमान के सभी अधिकारियों और जवानों की पेशेवर प्रतिबद्धता, समर्पण और उत्कृष्ट कार्यशैली की सराहना की। उन्होंने सैनिकों से मिशन पर पूरा ध्यान केंद्रित रखने और दक्षिणी कमान की परिचालन बढ़त को बनाए रखने का आह्वान किया।
सेवानिवृत्त अधिकारियों को विदाई
इसी अवसर पर सेना प्रमुख ने उन अधिकारियों को विदाई दी जो 31 अगस्त को सेवानिवृत्त हो रहे थे। भारतीय सेना ने कहा कि मातृभूमि की रक्षा में समर्पित ये अधिकारी अब अपने अनुभव, अनुशासन और मूल्य-आधारित नेतृत्व के माध्यम से राष्ट्र निर्माण की नई दिशाओं को प्रज्वलित करते रहेंगे।
आगे की राह
यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब भारतीय सेना आधुनिकीकरण और स्वदेशीकरण की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रही है। दक्षिणी कमान की परिचालन समीक्षाएँ सेना की समग्र तैयारी सुनिश्चित करने की नियमित प्रक्रिया का हिस्सा हैं, और इस तरह के उच्चस्तरीय दौरे भविष्य की सुरक्षा रणनीति को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।