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थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ का जम्मू-कश्मीर दौरा: एलओसी से अमरनाथ तक सुरक्षा ग्रिड की समीक्षा

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थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ का जम्मू-कश्मीर दौरा: एलओसी से अमरनाथ तक सुरक्षा ग्रिड की समीक्षा

सारांश

थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने पद संभालने के बाद पहली बार उत्तरी कमान का दौरा किया — एलओसी से कश्मीर घाटी तक सुरक्षा ग्रिड, अमरनाथ यात्रा की तैयारियाँ और स्वदेशी तकनीकी नवाचार सभी उनकी प्राथमिकता में रहे। उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री से मुलाकात ने नागरिक-सैन्य समन्वय को नई दिशा दी।

मुख्य बातें

थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने 7 से 9 जुलाई 2025 के बीच उत्तरी कमान का अपना पहला आधिकारिक दौरा किया।
कुपवाड़ा , उरी , मानसबल , पुंछ , राजौरी और सुंदरबनी के अग्रिम सैन्य ठिकानों का निरीक्षण किया गया।
चिनार कोर और व्हाइट नाइट कोर मुख्यालयों में आतंकवाद-रोधी ग्रिड, एलओसी सुरक्षा और अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा हुई।
जनरल सेठ ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री से मुलाकात कर सुरक्षा समन्वय पर चर्चा की।
सेना की स्वदेशी तकनीक आधारित नवाचार प्रदर्शनी का अवलोकन किया; तकनीक-आधारित सैन्य आधुनिकीकरण पर विशेष बल दिया।
सेना प्रमुख ने सीमावर्ती गाँवों में शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास कार्यक्रमों की समीक्षा कर सामुदायिक सशक्तिकरण को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ा।

थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने 7 से 9 जुलाई 2025 के बीच उत्तरी कमान का अपना पहला आधिकारिक दौरा पूरा किया — इस पद पर नियुक्ति के बाद यह उनकी जम्मू-कश्मीर की प्रथम यात्रा थी। इस दौरान उन्होंने नियंत्रण रेखा (एलओसी) से लेकर कश्मीर घाटी और जम्मू क्षेत्र तक सुरक्षा तैयारियों, आतंकवाद-रोधी ग्रिड और सैन्य युद्धक क्षमता का व्यापक आकलन किया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री से भी मुलाकात कर केंद्र शासित प्रदेश में सुरक्षा समन्वय पर विचार-विमर्श किया।

मुख्य घटनाक्रम: कहाँ-कहाँ गए जनरल सेठ

तीन दिवसीय दौरे में जनरल सेठ ने श्रीनगर स्थित चिनार कोर मुख्यालय, व्हाइट नाइट कोर मुख्यालय तथा कुपवाड़ा, उरी और मानसबल के अग्रिम सैन्य ठिकानों का दौरा किया। जम्मू क्षेत्र में उन्होंने पुंछ, राजौरी और सुंदरबनी के सीमावर्ती इलाकों का भी निरीक्षण किया।

प्रत्येक स्थान पर सेना प्रमुख को परिचालन तैनाती, निगरानी तंत्र, आतंकवाद-रोधी अभियानों की स्थिति और क्षेत्रीय नवाचारों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने अग्रिम मोर्चों पर तैनात सैनिकों से सीधे संवाद किया और उनके समर्पण एवं पेशेवर दक्षता की सराहना की।

अमरनाथ यात्रा सुरक्षा और परिचालन समीक्षा

चिनार कोर मुख्यालय में जनरल सेठ ने विशेष रूप से श्री अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा की। यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय और आतंकवाद-रोधी तंत्र की मजबूती पर विशेष ध्यान दिया गया। गौरतलब है कि यह दौरा ऐसे समय में हुआ जब घाटी में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ों की घटनाएँ सामने आती रही हैं।

सेना प्रमुख ने सैन्य इकाइयों में स्वदेशी तकनीकों पर आधारित नवाचार प्रदर्शनी का अवलोकन किया और उभरती प्रौद्योगिकियों को तेजी से अपनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए तकनीक-आधारित सैन्य आधुनिकीकरण अपरिहार्य है।

उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री से मुलाकात

दौरे के दौरान जनरल सेठ ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री से अलग-अलग मुलाकात की। इन बैठकों में केंद्र शासित प्रदेश में सुरक्षा स्थिति, स्थिरता और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। यह बैठकें इस दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं कि सेना, नागरिक प्रशासन और राज्य सरकार के बीच संयुक्त रणनीति को और सुदृढ़ किया जा सके।

सामुदायिक सशक्तिकरण: सेना की दोहरी भूमिका

जनरल सेठ ने सीमावर्ती क्षेत्रों में भारतीय सेना द्वारा संचालित जन-केंद्रित कार्यक्रमों की भी समीक्षा की। भारत के प्रथम गाँवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और सामुदायिक सहयोग के क्षेत्र में सेना की विभिन्न इकाइयों द्वारा किए जा रहे कार्यों की उन्होंने सराहना की। उन्होंने कहा कि सेना केवल सीमाओं की रक्षा नहीं करती, बल्कि दूरदराज के क्षेत्रों में विकास और सामाजिक स्थिरता को भी बढ़ावा देती है।

आगे की राह: सतर्कता और आधुनिकीकरण पर जोर

दौरे के समापन पर जनरल सेठ ने सभी रैंकों के सैनिकों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के कर्मियों की परिचालन उत्कृष्टता की प्रशंसा की। उन्होंने 'राष्ट्र सर्वोपरि' की भावना और विकसित भारत 2047 के संकल्प के साथ सेना को भविष्य की चुनौतियों के लिए सदैव तैयार रहने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उत्तरी कमान और उससे संबद्ध सभी सैन्य संरचनाएँ देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने में अपनी भूमिका निभाती रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

उरी और राजौरी-पुंछ बेल्ट का एक साथ दौरा यह दर्शाता है कि सेना घाटी और जम्मू दोनों मोर्चों पर एकसाथ सतर्क है। उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री से मुलाकात इस दृष्टि से उल्लेखनीय है कि निर्वाचित सरकार के साथ सैन्य-नागरिक समन्वय को संस्थागत रूप देने की कोशिश हो रही है — जो पूर्ण राज्यत्व की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है। स्वदेशी तकनीकी नवाचार पर जोर यह भी बताता है कि आधुनिकीकरण अब केवल बजट की घोषणाओं तक सीमित नहीं, बल्कि ज़मीनी इकाइयों तक पहुँच रहा है।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने जम्मू-कश्मीर का दौरा क्यों किया?
थलसेना प्रमुख का पद संभालने के बाद जनरल धीरज सेठ ने उत्तरी कमान का यह पहला आधिकारिक दौरा किया, जिसमें एलओसी सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी ग्रिड और अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा व्यवस्थाओं का व्यापक आकलन करना मुख्य उद्देश्य था। यह दौरा 7 से 9 जुलाई 2025 के बीच संपन्न हुआ।
जनरल सेठ ने जम्मू-कश्मीर में कौन-कौन से स्थानों का दौरा किया?
जनरल सेठ ने श्रीनगर स्थित चिनार कोर मुख्यालय, व्हाइट नाइट कोर मुख्यालय, कुपवाड़ा, उरी, मानसबल, पुंछ, राजौरी और सुंदरबनी के अग्रिम सैन्य ठिकानों का दौरा किया। इन स्थानों पर उन्हें सुरक्षा स्थिति, निगरानी तंत्र और परिचालन तैयारियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।
अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा समीक्षा में क्या शामिल था?
चिनार कोर मुख्यालय में जनरल सेठ ने अमरनाथ यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय, आतंकवाद-रोधी तंत्र और निगरानी व्यवस्था की समीक्षा की। यात्रा मार्ग पर सैन्य तैनाती और प्रतिक्रिया क्षमता का भी आकलन किया गया।
जनरल सेठ ने उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री से मुलाकात में क्या चर्चा हुई?
इन बैठकों में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति, स्थिरता और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। नागरिक प्रशासन और सेना के बीच संयुक्त रणनीति को और मजबूत करने पर सहमति जताई गई।
सेना प्रमुख ने स्वदेशी तकनीक पर क्यों जोर दिया?
जनरल सेठ ने जम्मू-कश्मीर में सेना की स्वदेशी तकनीकों पर आधारित नवाचार प्रदर्शनी का अवलोकन किया और कहा कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए उभरती प्रौद्योगिकियों को तेजी से अपनाना आवश्यक है। उन्होंने परिचालन क्षमता बढ़ाने के लिए तकनीक-आधारित सैन्य आधुनिकीकरण को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
राष्ट्र प्रेस
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