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जनरल धीरज सेठ की रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से पहली मुलाकात, सेना आधुनिकीकरण पर चर्चा

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जनरल धीरज सेठ की रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से पहली मुलाकात, सेना आधुनिकीकरण पर चर्चा

सारांश

जनरल धीरज सेठ ने थलसेना प्रमुख बनने के बाद पहली बार रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की। 'विजय' दृष्टिकोण के तहत AI, स्वदेशीकरण और त्रि-सेना संयुक्तता उनकी प्राथमिकताएं हैं — यह बैठक भारतीय सेना की नई रणनीतिक दिशा की पहली औपचारिक झलक है।

मुख्य बातें

जनरल धीरज सेठ ने 3 जुलाई 2026 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से कर्तव्य भवन-2, नई दिल्ली में पहली शिष्टाचार भेंट की।
जनरल सेठ ने 30 जून 2026 को भारत के 31वें थलसेना प्रमुख के रूप में पदभार संभाला।
उन्होंने 'विजय' नामक सामरिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया, जिसका मार्गदर्शक मंत्र 'जय से विजय' है।
प्राथमिकताओं में AI-आधारित क्षमताएं , स्वदेशी रक्षा उद्योग और तीनों सेनाओं के बीच संयुक्तता शामिल हैं।
जनरल सेठ इससे पहले सेना उप प्रमुख थे; उन्होंने रेगिस्तान और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-विरोधी अभियानों में भूमिका निभाई है।
निवर्तमान सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी 30 जून 2026 को सेवानिवृत्त हुए।

भारतीय थलसेना के 31वें सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने 3 जुलाई 2026 को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-2 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से शिष्टाचार भेंट की। 30 जून 2026 को थलसेना प्रमुख का पदभार संभालने के बाद रक्षा मंत्री से यह उनकी पहली औपचारिक मुलाकात थी।

बैठक में किन मुद्दों पर हुई चर्चा

बैठक के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जनरल सेठ को नई जिम्मेदारी संभालने पर शुभकामनाएं दीं। रिपोर्टों के अनुसार, दोनों के बीच भारतीय सेना की वर्तमान परिचालन तैयारियों, सीमाओं पर सुरक्षा स्थिति, सेना के आधुनिकीकरण, स्वदेशी रक्षा प्रणालियों को बढ़ावा देने तथा भविष्य की चुनौतियों से निपटने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श हुआ।

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत अपनी सैन्य क्षमताओं को तेजी से आधुनिक बना रहा है और बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य के अनुरूप सशस्त्र बलों के व्यापक पुनर्गठन पर विशेष बल दिया जा रहा है।

'विजय' दृष्टिकोण: नए सेना प्रमुख का रोडमैप

पदभार ग्रहण करने के अगले ही दिन जनरल धीरज सेठ ने 'विजय' नामक अपना सामरिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। इसके तहत उनका लक्ष्य भारतीय सेना को अत्याधुनिक तकनीक से लैस, बहु-क्षेत्रीय युद्धक्षेत्र में सक्षम और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करना है।

उनकी प्राथमिकताओं में एआई-आधारित क्षमताओं का विस्तार, स्वदेशी रक्षा उद्योग को प्रोत्साहन, आत्मनिर्भरता को बढ़ावा और तीनों सेनाओं के बीच संयुक्तता को मजबूत करना शामिल है। उनका मार्गदर्शक मंत्र 'जय से विजय' है — जो संयुक्तता, आत्मनिर्भरता और नवाचार के माध्यम से सैन्य क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का संदेश देता है।

जनरल सेठ का सैन्य अनुभव

जनरल धीरज सेठ ने थलसेना प्रमुख का पदभार संभालने से पूर्व सेना उप प्रमुख के रूप में कार्य किया था। उन्होंने रेगिस्तानी क्षेत्र से लेकर जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-विरोधी अभियानों तक विविध और महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। पदभार ग्रहण करते हुए उन्होंने कहा कि 'भारतीय सेना का नेतृत्व करना उनके लिए गर्व और विनम्रता का विषय है।'

उन्होंने 'कर्तव्य, सम्मान और राष्ट्र सर्वोपरि' के सिद्धांतों के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता दोहराते हुए राष्ट्र की सुरक्षा के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देने का संकल्प व्यक्त किया।

निवर्तमान सेना प्रमुख का विदाई

जनरल सेठ ने जनरल उपेंद्र द्विवेदी (PVSM, AVSM) के सेवानिवृत्त होने के बाद यह पद संभाला। जनरल द्विवेदी 30 जून 2026 को सेवानिवृत्त हुए। गौरतलब है कि नए सेना प्रमुख और रक्षा मंत्री के बीच यह प्रारंभिक बैठक आने वाले समय में भारतीय सेना की रणनीतिक दिशा और प्राथमिकताओं के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी — भारतीय सेना का AI और स्वदेशीकरण एजेंडा वर्षों से घोषणाओं के स्तर पर ही अटका रहा है। रक्षा मंत्री के साथ यह पहली बैठक प्रतीकात्मक तो है, पर यह देखना होगा कि 'जय से विजय' का नारा बजट आवंटन और खरीद सुधारों में कितना उतरता है। भारत-पाक तनाव के बाद सैन्य आधुनिकीकरण पर राजनीतिक दबाव बढ़ा है, ऐसे में नए सेना प्रमुख के पास अवसर भी है और जवाबदेही भी।
RashtraPress
2 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जनरल धीरज सेठ कौन हैं और वे कब थलसेना प्रमुख बने?
जनरल धीरज सेठ भारत के 31वें थलसेना प्रमुख हैं, जिन्होंने 30 जून 2026 को पदभार संभाला। इससे पहले वह सेना के उप प्रमुख के पद पर कार्यरत थे और रेगिस्तानी क्षेत्र से लेकर जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-विरोधी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा चुके हैं।
जनरल सेठ और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की बैठक में क्या चर्चा हुई?
रिपोर्टों के अनुसार, बैठक में सेना की परिचालन तैयारियों, सीमाओं पर सुरक्षा स्थिति, सेना के आधुनिकीकरण, स्वदेशी रक्षा प्रणालियों और भविष्य की चुनौतियों से निपटने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श हुआ। रक्षा मंत्री ने जनरल सेठ को नई जिम्मेदारी पर शुभकामनाएं भी दीं।
जनरल सेठ का 'विजय' दृष्टिकोण क्या है?
'विजय' जनरल धीरज सेठ का सामरिक दृष्टिकोण है, जिसे उन्होंने पदभार ग्रहण के अगले दिन प्रस्तुत किया। इसका मार्गदर्शक मंत्र 'जय से विजय' है और इसमें AI-आधारित क्षमताओं का विस्तार, स्वदेशी रक्षा उद्योग को प्रोत्साहन, आत्मनिर्भरता और तीनों सेनाओं के बीच संयुक्तता को मजबूत करना शामिल है।
जनरल उपेंद्र द्विवेदी के बाद नए सेना प्रमुख की नियुक्ति क्यों महत्वपूर्ण है?
जनरल उपेंद्र द्विवेदी (PVSM, AVSM) 30 जून 2026 को सेवानिवृत्त हुए। ऐसे समय में जब भारत अपनी सैन्य क्षमताओं को तेजी से आधुनिक बना रहा है और वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य बदल रहा है, नए सेना प्रमुख की नियुक्ति और उनकी रणनीतिक प्राथमिकताएं आने वाले वर्षों में भारतीय सेना की दिशा तय करेंगी।
भारतीय सेना के आधुनिकीकरण में AI की क्या भूमिका होगी?
जनरल सेठ ने AI-आधारित क्षमताओं के विस्तार को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में रखा है। इसमें बहु-क्षेत्रीय युद्धक्षेत्र में प्रभावी संचालन, स्वदेशी तकनीक का व्यापक उपयोग और तीनों सेनाओं के बीच समन्वय को डिजिटल प्लेटफॉर्म से मजबूत करना शामिल है।
राष्ट्र प्रेस
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