थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ का 'विजय' विजन: AI, ड्रोन और आत्मनिर्भरता से सजेगी भारतीय सेना
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय सेना के नवनियुक्त थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ ने 1 जुलाई को पदभार संभालते हुए सेना को तकनीक-सक्षम, बहुआयामी और भविष्य की हर चुनौती के लिए पूरी तरह तैयार बल बनाने का संकल्प लिया। उन्होंने अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं को 'विजय' नामक अवधारणा में समाहित किया है, जो रक्षा मंत्री द्वारा घोषित 'परिवर्तन के दशक' की सोच से प्रेरित है और आने वाले वर्षों में भारतीय सेना की कार्ययोजना का आधार बनेगी।
पदभार ग्रहण समारोह और श्रद्धांजलि
बुधवार, 1 जुलाई को रक्षा मंत्रालय मुख्यालय, नई दिल्ली में आयोजित समारोह में जनरल सेठ को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। उन्होंने प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री द्वारा जताए गए विश्वास के लिए आभार व्यक्त किया तथा राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। जनरल सेठ ने स्पष्ट किया कि वर्तमान वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य तेज़ी से बदल रहा है, जहाँ पारंपरिक सीमा-चुनौतियों के साथ-साथ साइबर, अंतरिक्ष, सूचना और प्रौद्योगिकी आधारित नए खतरे भी उभर रहे हैं।
'विजय' के पाँच स्तंभ
जनरल सेठ के अनुसार 'विजय' अवधारणा पाँच प्रमुख स्तंभों पर टिकी है। पहला स्तंभ — सतर्कता और युद्धक तत्परता — सीमाओं की सुरक्षा, उभरते खतरों पर निरंतर निगरानी, खुफिया क्षमता को सुदृढ़ करना और हर परिस्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देने की तैयारी को केंद्र में रखता है।
दूसरा स्तंभ — नवाचार और परिवर्तन — भविष्य के युद्धक्षेत्र की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए हथियारों के आधुनिकीकरण के साथ-साथ सैन्य सिद्धांतों, रणनीतियों और संचालन पद्धतियों में बदलाव की माँग करता है। इसके अंतर्गत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन, स्वायत्त प्रणालियों, साइबर क्षमताओं और उन्नत संचार तकनीकों के व्यापक उपयोग पर विशेष बल दिया जाएगा।
तीसरा स्तंभ — संयुक्तता और एकीकरण — तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय, संयुक्त अभियानों की क्षमता और संसाधनों के अधिक प्रभावी उपयोग पर केंद्रित है। यह दृष्टिकोण भविष्य के एकीकृत युद्धक्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप माना जा रहा है।
चौथा स्तंभ — आत्मनिर्भरता — स्वदेशी रक्षा उत्पादन, घरेलू उद्योगों के साथ सहयोग और भारतीय तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देकर सेना की आवश्यकताओं को देश के भीतर ही पूरा करने की दिशा में प्रयासों को गति देगा। यह आत्मनिर्भर भारत अभियान को मज़बूती देने के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा ढाँचे को भी सशक्त करेगा।
पाँचवाँ स्तंभ — सैनिक कल्याण और मनोबल — जनरल सेठ ने सैनिकों को भारतीय सेना की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए उनके कल्याण, प्रशिक्षण, पेशेवर विकास और मनोबल को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही। उनके शब्दों में, 'एक अग्निवीर से लेकर सबसे वरिष्ठ वेटरन तक — सब योद्धा हैं, और यही योद्धा हमारी सेना की सबसे बड़ी ताकत हैं।'
आधुनिकीकरण की ज़रूरत क्यों
गौरतलब है कि यह विजन ऐसे समय में सामने आया है जब भारत की उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर सुरक्षा दबाव बना हुआ है और वैश्विक स्तर पर युद्ध के स्वरूप में तेज़ी से बदलाव आ रहा है। यूक्रेन संघर्ष से लेकर पश्चिम एशिया तक, ड्रोन और AI-आधारित युद्धनीति की केंद्रीय भूमिका ने पारंपरिक सैन्य सिद्धांतों को चुनौती दी है। ऐसे में जनरल सेठ का तकनीक-केंद्रित दृष्टिकोण सामरिक दृष्टि से प्रासंगिक माना जा रहा है।
आगे की राह
जनरल सेठ ने कर्तव्य, सम्मान और राष्ट्र सर्वोपरि की भावना के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना अपनी गौरवशाली परंपराओं को बनाए रखते हुए भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को निरंतर विकसित करती रहेगी और देश की संप्रभुता तथा राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहेगी। 'विजय' विजन के क्रियान्वयन की दिशा में आने वाले महीनों में ठोस नीतिगत कदमों की प्रतीक्षा रहेगी।