9 जुलाई 2026
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थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने एलओसी का दौरा किया, पुंछ-राजौरी में आतंकवाद-रोधी तैयारियों की समीक्षा

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थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने एलओसी का दौरा किया, पुंछ-राजौरी में आतंकवाद-रोधी तैयारियों की समीक्षा

सारांश

थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ का पुंछ-राजौरी दौरा महज़ औपचारिकता नहीं था — यह एलओसी पर बढ़ती आतंकी गतिविधियों के बीच सुरक्षा ग्रिड की सीधी परख थी। व्हाइट नाइट कोर की तैनाती, तकनीक-आधारित निगरानी और जन-केंद्रित पहलों की एकसाथ समीक्षा बताती है कि सेना सीमा पर दोहरी रणनीति — सैन्य और नागरिक — पर काम कर रही है।

मुख्य बातें

थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने 9 जुलाई 2026 को पुंछ , राजौरी और सुंदरबनी सेक्टर में एलओसी का दौरा किया।
व्हाइट नाइट कोर की तैनाती, घुसपैठ-रोधी तंत्र और आतंकवाद-रोधी ग्रिड की प्रभावशीलता की विस्तृत समीक्षा की गई।
आधुनिक निगरानी प्रणालियों और तकनीक-आधारित सुरक्षा उपायों के उपयोग में वृद्धि की जानकारी दी गई।
सीमावर्ती इलाकों में सड़क, संचार नेटवर्क और सैन्य सुविधाओं के निर्माण की प्रगति की भी समीक्षा हुई।
सेना प्रमुख ने स्थानीय समुदायों के सशक्तीकरण और 'प्रथम गाँव' पहल की सराहना करते हुए इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास का सेतु बताया।

भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने 9 जुलाई 2026 को जम्मू-कश्मीर के पुंछ, राजौरी और सुंदरबनी सेक्टर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) से लगे अग्रिम सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा किया। इस यात्रा में उन्होंने सुरक्षा स्थिति, सैन्य तैयारियों और आतंकवाद-रोधी अभियानों की व्यापक समीक्षा की।

मुख्य घटनाक्रम

जनरल सेठ ने व्हाइट नाइट कोर की विभिन्न तैनातियों और परिचालन व्यवस्थाओं का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया। वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने उन्हें नियंत्रण रेखा पर मौजूदा सुरक्षा परिदृश्य, पाकिस्तान की ओर से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों, घुसपैठ-रोधी तंत्र और आतंकवाद-रोधी ग्रिड की प्रभावशीलता के बारे में विस्तृत जानकारी दी।

सेना प्रमुख को क्षेत्र में सैनिकों की तैनाती, निगरानी व्यवस्था, खुफिया समन्वय और बदलती सुरक्षा परिस्थितियों के अनुरूप अपनाई जा रही रणनीतियों से भी अवगत कराया गया।

तकनीक आधारित निगरानी का मूल्यांकन

जनरल सेठ ने आधुनिक निगरानी प्रणालियों, तकनीक-आधारित सुरक्षा उपायों और सैन्य इकाइयों द्वारा विकसित क्षेत्रीय नवाचारों का मूल्यांकन किया। उन्हें बताया गया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी क्षमता बढ़ाने, घुसपैठ की कोशिशों का समय रहते पता लगाने और त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए उन्नत तकनीकों का उपयोग लगातार बढ़ाया जा रहा है।

सेना प्रमुख ने विभिन्न इकाइयों की एकीकृत परिचालन तत्परता का आकलन करते हुए सैनिकों की उच्च स्तरीय तैयारी पर संतोष व्यक्त किया।

आधारभूत संरचना और जन-केंद्रित पहलें

जनरल सेठ ने सीमावर्ती इलाकों में सड़कों, संचार नेटवर्क, सैन्य सुविधाओं और अन्य महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं के निर्माण एवं उन्नयन की प्रगति की भी समीक्षा की। यह मजबूत आधारभूत ढाँचा न केवल सैन्य अभियानों की दक्षता बढ़ाता है, बल्कि स्थानीय नागरिकों के जीवन स्तर को सुधारने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

उन्होंने भारत के 'प्रथम गाँव' के रूप में विकसित किए जा रहे सीमावर्ती क्षेत्रों में चल रही जन-केंद्रित पहलों की जानकारी ली। सेना द्वारा स्थानीय समुदायों के सशक्तीकरण, शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए किए जा रहे प्रयासों पर विशेष चर्चा की गई। जनरल सेठ ने इन पहलों को राष्ट्रीय सुरक्षा और स्थानीय विकास के बीच मजबूत सेतु बताते हुए उनकी सराहना की।

सैनिकों से संवाद और आह्वान

सेना प्रमुख ने अग्रिम चौकियों पर तैनात अधिकारियों और जवानों से सीधी बातचीत की। उन्होंने कठिन भौगोलिक और मौसमीय परिस्थितियों में तैनात जवानों के समर्पण, साहस और पेशेवर दक्षता की प्रशंसा की। उन्होंने सभी रैंकों को परिचालन उत्कृष्टता बनाए रखने, मिशन पर केंद्रित रहने और बदलती चुनौतियों के अनुरूप स्वयं को लगातार सक्षम बनाने का आह्वान किया।

क्यों अहम है यह दौरा

यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ की कोशिशों और आतंकवादी गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, सेना प्रमुख की यह यात्रा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने तथा सैनिकों का मनोबल ऊँचा रखने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। गौरतलब है कि पुंछ-राजौरी क्षेत्र हाल के महीनों में आतंकवादी गतिविधियों के लिहाज़ से संवेदनशील रहा है, जो इस समीक्षा दौरे को और अधिक प्रासंगिक बनाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

परिचालन अनिवार्यता को दर्शाता है। तकनीक-आधारित निगरानी और जन-केंद्रित पहलों को एकसाथ परखना बताता है कि सेना अब केवल 'काउंटर-टेरर' नहीं, बल्कि 'काउंटर-नैरेटिव' रणनीति पर भी ध्यान दे रही है। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि उच्च-स्तरीय दौरों की आवृत्ति और ज़मीनी सुरक्षा परिणामों के बीच की खाई को पाटने के लिए ठोस, सत्यापन-योग्य आँकड़े सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने एलओसी का दौरा क्यों किया?
जनरल धीरज सेठ ने 9 जुलाई 2026 को पुंछ, राजौरी और सुंदरबनी सेक्टर का दौरा कर सुरक्षा स्थिति, सैन्य तैयारियों और आतंकवाद-रोधी अभियानों की व्यापक समीक्षा की। यह दौरा ऐसे समय में हुआ जब नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ और आतंकवादी गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
व्हाइट नाइट कोर क्या है और इसकी क्या भूमिका है?
व्हाइट नाइट कोर भारतीय सेना की वह प्रमुख इकाई है जो जम्मू-कश्मीर के पुंछ-राजौरी क्षेत्र में एलओसी की सुरक्षा के लिए तैनात है। जनरल सेठ ने इसकी विभिन्न तैनातियों और परिचालन व्यवस्थाओं का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया।
एलओसी पर कौन-सी नई तकनीकें तैनात की जा रही हैं?
सेना प्रमुख को बताया गया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी क्षमता बढ़ाने के लिए उन्नत निगरानी प्रणालियाँ और तकनीक-आधारित सुरक्षा उपाय लगातार बढ़ाए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य घुसपैठ की कोशिशों का समय रहते पता लगाना और त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना है।
सीमावर्ती क्षेत्रों में 'प्रथम गाँव' पहल क्या है?
यह पहल भारत के सुदूर सीमावर्ती गाँवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की योजना है, जिसमें सेना शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार में सहयोग करती है। जनरल सेठ ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और स्थानीय विकास के बीच मजबूत सेतु बताया।
इस दौरे का सैनिकों के मनोबल पर क्या असर होगा?
जनरल सेठ ने अग्रिम चौकियों पर तैनात अधिकारियों और जवानों से सीधी बातचीत कर उनके समर्पण और पेशेवर दक्षता की प्रशंसा की। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, सेना प्रमुख का ऐसा प्रत्यक्ष दौरा कठिन परिस्थितियों में तैनात जवानों का मनोबल ऊँचा रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
राष्ट्र प्रेस
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