हिमाचल प्रदेश जल कानून संकलन जारी: CM सुक्खू ने की जल शक्ति विभाग की पहल की सराहना
सारांश
मुख्य बातें
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 9 जुलाई 2026 को शिमला में 'हिमाचल प्रदेश के जल कानून' नामक संकलन का विमोचन किया — जो जल शक्ति विभाग द्वारा तैयार किया गया अपनी तरह का पहला दस्तावेज़ है। इस एकल खंड में राज्य के जल प्रबंधन को नियंत्रित करने वाले सभी प्रमुख अधिनियम, नियम, नीतिगत अधिसूचनाएँ, तकनीकी नियमावली और प्रशासनिक परिपत्र एक साथ संकलित किए गए हैं।
संकलन में क्या है
यह प्रकाशन कई दशकों में विकसित हुए कानूनी, तकनीकी और प्रशासनिक प्रावधानों को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराता है। इसमें जल शुल्क संबंधी जानकारी, हिमाचल प्रदेश लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2011 के अंतर्गत सेवा गारंटियाँ, निविदा प्रक्रियाएँ, भर्ती मानदंड, मंजूरी देने वाले अधिकारियों की वित्तीय शक्तियाँ और मान्यता प्राप्त जल गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाओं की सूची शामिल है।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि यह संकलन अधिकारियों, इंजीनियरों, ठेकेदारों और नागरिकों — सभी के लिए एक प्रामाणिक संदर्भ दस्तावेज़ के रूप में काम करेगा।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर ज़ोर
मुख्यमंत्री के अनुसार, यह प्रकाशन राज्य भर में जल आपूर्ति, सीवरेज और सिंचाई सेवाओं के वितरण में पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता को बढ़ाएगा। विभिन्न प्रभागों, सर्किलों और क्षेत्रों में तैनात अधिकारी अब वैधानिक प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करते हुए जमीनी स्तर पर सोच-समझकर निर्णय ले सकेंगे।
ठेकेदारों को निविदा और मंजूरी प्रक्रियाओं में अधिक स्पष्टता मिलेगी, जबकि नागरिकों को जल सेवाओं से जुड़ी जानकारी एकल-खिड़की प्रारूप में सुलभ होगी।
जल जीवन मिशन में हिमाचल की उपलब्धि
मुख्यमंत्री सुक्खू ने इस अवसर पर बताया कि हिमाचल प्रदेश, जल जीवन मिशन को लागू करने में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है — राज्य के 99.9 प्रतिशत घरों तक नल का पानी पहुँचाया जा चुका है। सतत जल प्रबंधन और सार्वजनिक सेवा वितरण में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राज्य को 2026 में राष्ट्रीय जल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
गौरतलब है कि यह पुरस्कार ऐसे समय में मिला है जब देश के कई राज्य जल संकट और अनियमित आपूर्ति से जूझ रहे हैं।
आगे की राह
मुख्यमंत्री सुक्खू ने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल सुशासन को मजबूत करने, सेवा वितरण में सुधार लाने और जल शक्ति विभाग के कामकाज में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने में दीर्घकालिक योगदान देगी। संस्थागत संदर्भ ढाँचे को मज़बूत करने वाला यह संकलन राज्य की जल नीति को एक नई दिशा देने का प्रयास है।