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जम्मू-कश्मीर स्टेटहुड: फारूक अब्दुल्ला ने जंतर-मंतर प्रदर्शन के लिए 52 नेताओं को भेजा निमंत्रण

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जम्मू-कश्मीर स्टेटहुड: फारूक अब्दुल्ला ने जंतर-मंतर प्रदर्शन के लिए 52 नेताओं को भेजा निमंत्रण

सारांश

जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा दिलाने की माँग अब सड़क पर उतरेगी। फारूक अब्दुल्ला ने मानसून सत्र के पहले दिन जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया है और 52 राष्ट्रीय नेताओं को निमंत्रण भेजा है — यह परीक्षा है कि संघवाद का मुद्दा विपक्ष को कितना एकजुट कर पाता है।

मुख्य बातें

नेशनल कॉन्फ्रेंस संसद के मानसून सत्र के पहले दिन जंतर-मंतर, नई दिल्ली पर जम्मू-कश्मीर स्टेटहुड बहाली की माँग को लेकर प्रदर्शन करेगी।
फारूक अब्दुल्ला ने 52 प्रमुख राजनीतिक नेताओं और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों को औपचारिक निमंत्रण भेजा है।
निमंत्रित नेताओं में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, अरविंद केजरीवाल, शरद पवार समेत अनेक प्रमुख विपक्षी चेहरे शामिल हैं।
5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 निरस्त होने के बाद संसद में दिए गए स्टेटहुड बहाली के वादे को अब तक पूरा नहीं किया गया है।
2024 में शांतिपूर्ण विधानसभा चुनाव और उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद भी राज्य का दर्जा बहाल नहीं हुआ।
प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण और संवैधानिक होगा; कोई नई माँग नहीं, केवल संसदीय वादे की पूर्ति की अपील।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा (स्टेटहुड) बहाल करने की माँग को लेकर संसद के आगामी मानसून सत्र के पहले दिन नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की घोषणा की है। इस प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उन्होंने देशभर के 52 प्रमुख राजनीतिक नेताओं, जम्मू-कश्मीर के विभिन्न दलों के प्रतिनिधियों और नागरिक समाज के प्रमुख चेहरों को औपचारिक निमंत्रण भेजा है।

प्रदर्शन की पृष्ठभूमि

5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 निरस्त कर जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन किया और उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया। उस समय संसद में सरकार की ओर से यह स्पष्ट आश्वासन दिया गया था कि उचित समय पर राज्य का दर्जा पुनः बहाल किया जाएगा। डॉ. अब्दुल्ला ने अपने निमंत्रण पत्र में रेखांकित किया कि जम्मू-कश्मीर के लोगों ने उन आश्वासनों पर भरोसा करते हुए किसी आंदोलन का रास्ता नहीं चुना और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी की।

वर्ष 2024 में शांतिपूर्ण विधानसभा चुनाव संपन्न हुए और उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में निर्वाचित सरकार कार्यरत है। बावजूद इसके, राज्य का दर्जा अब तक बहाल नहीं किया गया है — यह तथ्य नेशनल कॉन्फ्रेंस के इस प्रदर्शन की केंद्रीय वजह है।

डॉ. अब्दुल्ला का तर्क: संघवाद का सवाल

डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि वे यह अपील केवल नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष के रूप में नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा के पूर्व सदस्य और दशकों के सार्वजनिक जीवन के अनुभव के आधार पर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल जम्मू-कश्मीर की भावनाओं तक सीमित नहीं है — यह भारत की संघीय व्यवस्था और संविधान की मूल भावना से जुड़ा विषय है।

उनके अनुसार, राज्यों को प्रशासनिक इकाइयाँ मात्र नहीं, बल्कि जनता की लोकतांत्रिक इच्छाशक्ति का प्रतीक माना गया है। ऐसे में स्टेटहुड बहाली में हो रही लगातार देरी लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती है। उन्होंने सभी दलों से एकजुट होकर इस संवैधानिक माँग का समर्थन करने की अपील की।

किन-किन नेताओं को मिला निमंत्रण

नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जिन प्रमुख नेताओं को आमंत्रित किया है, उनमें कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव, एनसीपी (एसपी) के प्रमुख शरद पवार, शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे और आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल शामिल हैं।

जम्मू-कश्मीर से जुड़े नेताओं में डीपीएपी प्रमुख गुलाम नबी आजाद, पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती, जम्मू-कश्मीर भाजपा अध्यक्ष सतपाल शर्मा, अपनी पार्टी के अध्यक्ष अल्ताफ बुखारी, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस प्रमुख सज्जाद गनी लोन, जम्मू-कश्मीर कांग्रेस अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा, सीपीआई (एम) नेता मोहम्मद यूसुफ तारीगामी, अवामी इत्तेहाद पार्टी के प्रमुख शेख अब्दुल राशिद, मीरवाइज उमर फारूक और जम्मू-कश्मीर के ग्रैंड मुफ्ती नासिर-उल-इस्लाम को भी निमंत्रण भेजा गया है। इसके अलावा बसपा प्रमुख मायावती, बीजेडी प्रमुख नवीन पटनायक, वाईएसआर कांग्रेस के जगन मोहन रेड्डी, बीआरएस प्रमुख के. चंद्रशेखर राव, शिरोमणि अकाली दल के सुखबीर सिंह बादल, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी, सीपीएम महासचिव एमए बेबी और सीपीआई महासचिव डी. राजा के नाम भी सूची में हैं।

प्रदर्शन की प्रकृति और माँग

नेशनल कॉन्फ्रेंस ने स्पष्ट किया है कि जंतर-मंतर पर होने वाला यह प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक होगा। इसमें कोई नई माँग नहीं उठाई जाएगी — केवल उसी वादे को पूरा करने की माँग की जाएगी, जो संसद में केंद्र सरकार द्वारा किया गया था। यह प्रदर्शन मानसून सत्र के पहले दिन आयोजित करने की योजना है, ताकि इसका संसदीय संदर्भ में अधिकतम असर हो।

आगे क्या

यह देखना अहम होगा कि विपक्ष के कितने बड़े नेता इस प्रदर्शन में व्यक्तिगत रूप से शामिल होते हैं, क्योंकि भागीदारी का स्तर ही इस मुद्दे पर राष्ट्रीय राजनीतिक एकजुटता की असली परीक्षा होगी। मानसून सत्र के दौरान संसद में भी यह मुद्दा गूँजने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न महज प्रतीकात्मक विरोध। लेकिन असली सवाल यह है कि 52 में से कितने नेता वास्तव में आएँगे, क्योंकि विपक्षी एकता के ऐसे आयोजन अक्सर निमंत्रण-सूची और उपस्थिति-सूची में बड़ा फ़र्क दिखाते हैं। यह भी गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर भाजपा अध्यक्ष को भी निमंत्रण भेजकर अब्दुल्ला ने इसे दलगत नहीं, संवैधानिक मुद्दा बनाने की चतुर कोशिश की है। यदि सत्तारूढ़ दल के स्थानीय नेता भी शामिल हों, तो यह केंद्र के लिए राजनीतिक असुविधा बढ़ाएगा — और यही इस प्रदर्शन की असली ताक़त होगी।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेशनल कॉन्फ्रेंस का जंतर-मंतर प्रदर्शन किस माँग को लेकर है?
यह प्रदर्शन जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा (स्टेटहुड) बहाल करने की माँग को लेकर है। 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 निरस्त करते समय संसद में केंद्र सरकार ने उचित समय पर स्टेटहुड बहाल करने का वादा किया था, जो अब तक पूरा नहीं हुआ है।
यह प्रदर्शन कब और कहाँ होगा?
नेशनल कॉन्फ्रेंस संसद के आगामी मानसून सत्र के पहले दिन नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर यह लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन आयोजित करेगी। मानसून सत्र की सटीक तारीख की आधिकारिक घोषणा होने पर प्रदर्शन की तिथि भी स्पष्ट होगी।
फारूक अब्दुल्ला ने किन-किन नेताओं को निमंत्रण भेजा है?
डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने कुल 52 नेताओं को निमंत्रण भेजा है। इनमें सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, अरविंद केजरीवाल, शरद पवार, उद्धव ठाकरे, महबूबा मुफ्ती, गुलाम नबी आजाद और मीरवाइज उमर फारूक समेत राष्ट्रीय व जम्मू-कश्मीर के प्रमुख नेता शामिल हैं।
क्या यह प्रदर्शन केवल विपक्षी दलों का है?
नहीं। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जम्मू-कश्मीर भाजपा अध्यक्ष सतपाल शर्मा को भी निमंत्रण भेजा है। डॉ. अब्दुल्ला ने इसे दलगत नहीं, बल्कि भारत की संघीय व्यवस्था और संविधान की मूल भावना से जुड़ा विषय बताते हुए सभी दलों से एकजुटता की अपील की है।
2024 के विधानसभा चुनाव के बाद भी स्टेटहुड क्यों नहीं मिली?
2024 में जम्मू-कश्मीर में शांतिपूर्ण विधानसभा चुनाव हुए और उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में निर्वाचित सरकार कार्यरत है, लेकिन केंद्र सरकार ने अब तक राज्य का दर्जा बहाल नहीं किया है। इस पर केंद्र की ओर से कोई आधिकारिक समयसीमा घोषित नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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