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फारूक अब्दुल्ला का ऐलान: दिल्ली प्रदर्शन के लिए किसी से समर्थन नहीं माँगेंगे, जंतर-मंतर पर होगा मार्च

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फारूक अब्दुल्ला का ऐलान: दिल्ली प्रदर्शन के लिए किसी से समर्थन नहीं माँगेंगे, जंतर-मंतर पर होगा मार्च

सारांश

फारूक अब्दुल्ला का संदेश साफ है — जम्मू-कश्मीर के राज्य दर्जे की लड़ाई नेशनल कॉन्फ्रेंस अपनी शर्तों पर लड़ेगी। मानसून सत्र के पहले दिन जंतर-मंतर पर मार्च की घोषणा के साथ पार्टी ने दबाव बढ़ाया है, लेकिन भीतर से आगा रूहुल्लाह मेहदी की अनुच्छेद 370 वाली माँग एकता की तस्वीर को जटिल बनाती है।

मुख्य बातें

फारूक अब्दुल्ला ने 11 जून को स्पष्ट किया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस दिल्ली प्रदर्शन के लिए किसी दल से समर्थन नहीं माँगेगी।
मानसून सत्र के पहले दिन जंतर-मंतर पर विरोध मार्च की घोषणा; माँग — पूर्ण राज्य दर्जा और संवैधानिक गारंटी।
यह निर्णय लगभग सात घंटे चली एनसी विधायकों की बैठक में लिया गया।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इंडिया ब्लॉक के सहयोगी दलों से शामिल होने की अपील की है।
सांसद आगा रूहुल्लाह मेहदी ने प्रदर्शन में अनुच्छेद 370 की बहाली को भी शामिल करने की माँग रखी; पार्टी बैठकों से बाहर किए जाने की खबरें।

नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने 11 जून को स्पष्ट कर दिया कि उनकी पार्टी जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने की माँग को लेकर नई दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन के लिए किसी भी राजनीतिक दल से समर्थन का अनुरोध नहीं करेगी। श्रीनगर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि जो भी स्वेच्छा से शामिल होना चाहे, उसका स्वागत है — लेकिन पार्टी किसी के दरवाज़े पर नहीं जाएगी।

प्रदर्शन की रूपरेखा

नेशनल कॉन्फ्रेंस ने संसद के आगामी मानसून सत्र के पहले दिन नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध मार्च निकालने की घोषणा की है। यह निर्णय पिछले सप्ताह लगभग सात घंटे तक चली एनसी विधायकों की बैठक में लिया गया। मार्च की दो केंद्रीय माँगें हैं — जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा और संवैधानिक गारंटियों की बहाली।

पार्टी के उपाध्यक्ष एवं जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इंडिया ब्लॉक के सभी सहयोगी दलों से इस प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है। हालाँकि फारूक अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर की किसी भी पार्टी को औपचारिक निमंत्रण न भेजने की बात दोहराई।

फारूक अब्दुल्ला के प्रमुख बयान

जब उनसे पूछा गया कि क्या सभी दलों को एकजुट करने की कोशिश होगी, तो फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि राज्य के दर्जे की बहाली पर सभी दल पहले से ही एकमत हैं। जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा वापस मिलने की संभावना पर उन्होंने कहा, "मैं भगवान नहीं हूँ। यह केवल अल्लाह जानता है और दिल्ली में सत्ता में बैठे लोग जानते हैं।"

उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी विशेष दर्जे की बहाली के लिए लगातार संघर्षरत है और चुप नहीं बैठी है। उनके शब्दों में — "जो अधिकार हमसे छीने गए हैं, उनके विरुद्ध विरोध करने का हमें संवैधानिक अधिकार है।"

पार्टी में आंतरिक मतभेद

एनसी सांसद आगा रूहुल्लाह मेहदी ने कहा कि वे इस प्रदर्शन में शामिल होंगे, लेकिन उनका मानना है कि आंदोलन की मुख्य माँग में अनुच्छेद 370 की बहाली को भी शामिल किया जाना चाहिए। गौरतलब है कि मेहदी और पार्टी नेतृत्व के बीच पिछले कुछ समय से दूरी बनी हुई है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अपने 2024 चुनावी घोषणापत्र के कई वादों को पूरा करने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए। इसके बाद से उन्हें पार्टी की बैठकों में आमंत्रित नहीं किया जा रहा है।

यह ऐसे समय में आया है जब एनसी सरकार पर केंद्र के साथ संबंधों को लेकर पार्टी के भीतर और बाहर दोनों ओर से सवाल उठ रहे हैं।

आगे क्या

संसद का मानसून सत्र परंपरागत रूप से जुलाई के तीसरे सप्ताह में शुरू होता है, और एनसी का प्रदर्शन उसी पहले दिन निर्धारित है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इंडिया ब्लॉक के कितने घटक दल जंतर-मंतर पर उपस्थित होते हैं और क्या यह प्रदर्शन संसद के भीतर किसी ठोस राजनीतिक दबाव में बदल पाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

रणनीतिक मजबूरी अधिक लगता है — क्योंकि इंडिया ब्लॉक के भीतर जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर व्यापक राजनीतिक एकजुटता कभी भी सहज नहीं रही। असली विरोधाभास यह है कि उमर अब्दुल्ला सहयोगियों से अपील कर रहे हैं, जबकि फारूक अब्दुल्ला औपचारिक निमंत्रण से इनकार कर रहे हैं — यह एक ही पार्टी की दो आवाज़ें हैं। इससे भी गहरा सवाल यह है कि जंतर-मंतर की भीड़ संसद के भीतर ठोस दबाव में कैसे बदलेगी, जब पार्टी के अपने सांसद अनुच्छेद 370 जैसे मूल मुद्दे पर नेतृत्व से अलग राग अलाप रहे हैं।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फारूक अब्दुल्ला ने दिल्ली प्रदर्शन पर क्या कहा?
फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस जम्मू-कश्मीर के राज्य दर्जे की माँग को लेकर होने वाले दिल्ली प्रदर्शन में शामिल होने के लिए किसी भी राजनीतिक दल से अनुरोध नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि जो स्वेच्छा से आना चाहे, उसका स्वागत है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस का जंतर-मंतर मार्च कब होगा?
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने संसद के मानसून सत्र के पहले दिन नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध मार्च निकालने की घोषणा की है। संसद का मानसून सत्र परंपरागत रूप से जुलाई के तीसरे सप्ताह में शुरू होता है।
इस प्रदर्शन की मुख्य माँगें क्या हैं?
प्रदर्शन की दो केंद्रीय माँगें हैं — जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करना और संवैधानिक गारंटियों की पुनर्स्थापना। हालाँकि पार्टी सांसद आगा रूहुल्लाह मेहदी चाहते हैं कि अनुच्छेद 370 की बहाली को भी माँग में शामिल किया जाए।
आगा रूहुल्लाह मेहदी और नेशनल कॉन्फ्रेंस नेतृत्व के बीच विवाद क्या है?
सांसद आगा रूहुल्लाह मेहदी ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 2024 के चुनावी घोषणापत्र के कई वादे पूरे नहीं किए। इसके बाद से उन्हें पार्टी की बैठकों में आमंत्रित नहीं किया जा रहा है, जो पार्टी के भीतर आंतरिक तनाव का संकेत है।
इंडिया ब्लॉक की इस प्रदर्शन में क्या भूमिका होगी?
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इंडिया ब्लॉक के सभी सहयोगी दलों से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है। लेकिन फारूक अब्दुल्ला ने स्पष्ट किया है कि औपचारिक निमंत्रण नहीं भेजे जाएँगे, इसलिए ब्लॉक की वास्तविक भागीदारी अभी अनिश्चित है।
राष्ट्र प्रेस
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