जम्मू-कश्मीर राज्य दर्जा बहाली: फारूक अब्दुल्ला के जंतर-मंतर प्रदर्शन को माकपा का समर्थन, 52 नेताओं से अपील
सारांश
मुख्य बातें
नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला द्वारा संसद के मानसून सत्र के पहले दिन नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [माकपा] ने अपना समर्थन दे दिया है। यह प्रदर्शन जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर आयोजित किया जा रहा है। माकपा ने सभी राजनीतिक दलों, संगठनों और नागरिकों से इस आंदोलन में शामिल होने की अपील की है।
माकपा का रुख और एकजुटता की अपील
माकपा की जम्मू-कश्मीर राज्य समिति के सचिव मोहम्मद अब्बास राथर ने कहा कि राज्य का दर्जा बहाल करने का मुद्दा किसी एक दल या क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जम्मू-कश्मीर के सभी समुदायों और नागरिकों से जुड़ा हुआ है। उन्होंने सभी से आपसी मतभेद भुलाकर इस आंदोलन में एकजुट होने का आह्वान किया।
राथर ने यह भी रेखांकित किया कि 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35-ए को निरस्त कर जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों — जम्मू-कश्मीर और लद्दाख — में विभाजित कर दिया था। उनका आरोप है कि यह निर्णय स्थानीय हितधारकों से व्यापक विचार-विमर्श किए बिना लिया गया।
सर्वोच्च न्यायालय का निर्देश और अधूरा वादा
माकपा नेता ने स्पष्ट किया कि भले ही अनुच्छेद 370 और 35-ए को हटाने के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय की न्यायिक मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को जल्द से जल्द जम्मू-कश्मीर का राज्य दर्जा बहाल करने का स्पष्ट निर्देश दिया था। राथर के अनुसार, यह वादा अब तक पूरा नहीं किया गया है।
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार ने 12 जुलाई 2024 को अधिसूचना जारी कर 'ट्रांजैक्शन ऑफ बिजनेस रूल्स' में संशोधन किया, जिससे उपराज्यपाल मनोज सिन्हा को पुलिस, कानून-व्यवस्था और अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों की नियुक्ति एवं तबादलों जैसे विषयों में अतिरिक्त कार्यकारी अधिकार मिल गए। माकपा का आरोप है कि इससे निर्वाचित सरकार का जनादेश और उसकी शक्तियाँ कमज़ोर हुई हैं।
इंडिया गठबंधन से अपील और 52 नेताओं को न्योता
नेशनल कॉन्फ्रेंस इस प्रदर्शन को जम्मू-कश्मीर के राज्य दर्जे की बहाली के लिए अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक अभियान मान रही है। फारूक अब्दुल्ला ने इंडिया गठबंधन के सभी दलों से इसमें भागीदारी का आग्रह किया है।
सूत्रों के अनुसार, अब्दुल्ला ने देशभर के 52 नेताओं को इस प्रदर्शन में शामिल होने का निमंत्रण दिया है — जिनमें कांग्रेस की सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी, द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) प्रमुख एम.के. स्टालिन, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय शामिल हैं।
केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया
केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। सूत्रों का दावा है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय का मानना है कि फिलहाल जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए परिस्थितियाँ पूरी तरह अनुकूल नहीं हैं।
आगे क्या होगा
माकपा का कहना है कि राज्य दर्जे की बहाली में और देरी से जम्मू-कश्मीर के लोगों में असंतोष और निराशा और गहरी होगी। गौरतलब है कि यह प्रदर्शन संसद के मानसून सत्र के ठीक पहले दिन आयोजित किया जा रहा है, जो इसे राजनीतिक रूप से और अधिक महत्वपूर्ण बनाता है। अब देखना यह होगा कि इंडिया गठबंधन के कितने दल इस मंच पर एकजुट होते हैं।