फारूक अब्दुल्ला के 'पूर्ण राज्य' आंदोलन पर भाजपा का तीखा पलटवार: 'अभी नहीं बने अनुकूल हालात'
सारांश
मुख्य बातें
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की माँग को लेकर प्रदर्शन का ऐलान किया है। इस मुहिम के तहत उन्होंने 52 राजनीतिक दलों के नेताओं को पत्र लिखकर एकजुटता की अपील की है। इस घोषणा पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं राज्यसभा सांसद तरुण चुघ ने कहा कि यह प्रदर्शन नाकामी, वादाखिलाफी और विफलता पर पर्दा डालने की कोशिश है। उन्होंने कहा, 'अब्दुल्ला साहब कभी अपना मैनिफेस्टो निकालकर देखिए — आपने अभी तक अपना कोई भी वादा पूरा नहीं किया है।' चुघ ने नेशनल कॉन्फ्रेंस पर जम्मू-कश्मीर को 'दशकों तक परिवारवादी, भ्रष्ट और अलगाववादी राजनीति में झोंकने' का आरोप लगाया।
उन्होंने 1990 की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि जिन लोगों ने मुख्यमंत्री रहते हुए जम्मू-कश्मीर को अशांति की आग में धकेला, जिसके चलते 1 लाख 60 हजार कश्मीरी पंडितों को पलायन करना पड़ा, वे आज शांति और विकास के नए दौर पर 'नजर लगाना' चाहते हैं। चुघ ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर में शांति, विकास और पर्यटन को पटरी पर लाया है, लेकिन ये नेता जानबूझकर इसे बाधित करना चाहते हैं।
शाहनवाज हुसैन का सवाल: 52 ही क्यों?
भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन ने फारूक अब्दुल्ला के पत्र-अभियान पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए कहा कि देश में और भी पंजीकृत दल हैं, उन्हें भी पत्र भेजा जाना चाहिए था। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'धरना देने या चिट्ठी लिखने से कुछ नहीं होने वाला' और सरकार जम्मू-कश्मीर की वास्तविक स्थिति के आधार पर ही कोई निर्णय लेगी।
मनन कुमार मिश्रा: 'अनुकूल परिस्थितियाँ जरूरी'
राज्यसभा सांसद मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि जब स्थितियाँ अनुकूल होंगी तब पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाएगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वर्तमान में बच्चों को पाठ्यक्रम में 'आतंकियों की तारीफ' पढ़ाई जा रही है और ऐसे माहौल में पूर्ण राज्य का दर्जा देने के लिए देश तैयार नहीं होगा। मिश्रा ने कहा, 'अभी वे परिस्थितियाँ नहीं बनी हैं — जब संसद और देश पूरी तरह संतुष्ट होंगे, तब यह दर्जा मिलेगा।'
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि जम्मू-कश्मीर के केंद्रशासित प्रदेश बनने के बाद पत्थरबाजी की घटनाएँ समाप्त हो गई हैं और क्षेत्र में शांति कायम है।
पृष्ठभूमि: पूर्ण राज्य की माँग का संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से जम्मू-कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश के रूप में शासित है। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने नवंबर 2024 के विधानसभा चुनावों में जीत हासिल की थी और पूर्ण राज्य का दर्जा उसके प्रमुख चुनावी वादों में से एक रहा है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने पहले भी संकेत दिया है कि राज्य का दर्जा 'उचित समय' पर बहाल किया जाएगा, लेकिन कोई ठोस समयसीमा नहीं दी गई है।
आगे क्या होगा
फारूक अब्दुल्ला के जंतर-मंतर प्रदर्शन की तारीख अभी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं हुई है, लेकिन 52 दलों को भेजे गए पत्र से विपक्षी एकजुटता की कोशिश स्पष्ट है। भाजपा की कड़ी प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक रूप से और तीखा हो सकता है।