करूर भगदड़: डीएमके का दावा — धूप में 10 घंटे बिना पानी खड़े रहे लोग, विजय की देरी बनी वजह
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की करूर रैली में हुई भगदड़ को लेकर द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने शुक्रवार, 10 जुलाई को स्पष्ट किया कि उस दिन लगभग 100 लोग चिलचिलाती धूप में बेहोश हुए थे — और इसका कारण पुलिस की लापरवाही नहीं, बल्कि 10 घंटे तक बिना पानी और भोजन के खड़े रहना था। एलंगोवन के अनुसार, विजय को दोपहर 12 बजे सभा को संबोधित करना था, लेकिन वे समय पर नहीं पहुँचे, जिससे भीड़ घंटों धूप में खड़ी रही।
क्या हुआ था करूर रैली में
एलंगोवन ने बताया कि रैली स्थल पर पुलिस सुरक्षा तो मौजूद थी, लेकिन भीड़ को पानी पिलाने या छाया की व्यवस्था नहीं थी। उनके अनुसार, करीब 100 लोग बेहोश हो गए और उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा। उन्होंने कहा, 'बेहोश होने वालों को पानी पिलाने के लिए भी कोई मौजूद नहीं था — यह एक प्राकृतिक कारण था।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि न कोई दुर्घटना हुई, न धक्का-मुक्की।
डीएमके सरकार की प्रतिक्रिया और राहत कार्य
एलंगोवन ने दावा किया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली DMK सरकार की त्वरित कार्रवाई से 60 लोगों की जान बचाई जा सकी। उन्होंने बताया कि करूर के सरकारी अस्पताल में पर्याप्त डॉक्टर नहीं थे, इसलिए अन्य सरकारी अस्पतालों से डॉक्टरों को तत्काल बुलाया गया। हालाँकि, 41 लोगों को नहीं बचाया जा सका — एलंगोवन के अनुसार, कथित तौर पर एम्बुलेंस को भीड़ के कारण समय पर अंदर जाने की अनुमति नहीं मिल पाई।
विजय की प्रतिक्रिया और अनुकंपा नियुक्तियाँ
यह बयान उस समय आया जब मुख्यमंत्री विजय ने करूर भगदड़ में अपनों को खोने वाले परिवारों को अनुकंपा नियुक्ति पत्र सौंपे। विजय ने इस त्रासदी को 'एक ऐसा जख्म बताया जो आज भी उनके दिल पर गहरा बोझ है।' गौरतलब है कि यह कदम पीड़ित परिवारों को सरकारी रोज़गार देने की दिशा में उठाया गया है।
पुलिस की भूमिका पर DMK का पक्ष
एलंगोवन ने पुलिस को इस घटना के लिए ज़िम्मेदार ठहराने से साफ इनकार किया। उनका तर्क था कि पुलिस का काम सुरक्षा देना है, न कि चिकित्सा सेवाएँ प्रदान करना। उन्होंने कहा, 'पुलिस इसमें क्या कर सकती थी? क्या वे डॉक्टर हैं जो दवा देकर उन्हें बचा सकें?' DMK का यह बयान उन आलोचनाओं के जवाब में आया है जिनमें पुलिस प्रबंधन पर सवाल उठाए गए थे।
आगे क्या
करूर भगदड़ तमिलनाडु की राजनीति में एक संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है। अनुकंपा नियुक्तियों के बाद अब यह देखना होगा कि विपक्ष इस मामले को किस दिशा में ले जाता है। पीड़ित परिवारों को न्याय और पारदर्शी जाँच की माँग अभी भी बनी हुई है।