रामटेक मंदिर ट्रस्ट में राजनेता नहीं, भोसले परिवार को जगह दो — जयंत पाटिल की महाराष्ट्र सरकार को कड़ी चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के वरिष्ठ विधायक जयंत पाटिल ने 10 जुलाई 2026 को महाराष्ट्र विधानसभा में 'श्री राम मंदिर देवस्थान ट्रस्ट प्रबंधन, रामटेक विधेयक' पर बहस के दौरान राज्य सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने आगाह किया कि यदि ट्रस्ट में राजनेताओं को शामिल किया गया, तो भ्रष्टाचार इतना गहरा हो सकता है कि यह मामला अयोध्या से जुड़े विवादों को भी पीछे छोड़ देगा।
रामटेक विधेयक पर आपत्तियाँ
पाटिल ने सवाल उठाया कि ऐतिहासिक भोसले परिवार — जिसका रामटेक मंदिर से सदियों पुराना पारंपरिक संबंध है — का केवल एक सदस्य ट्रस्ट में क्यों रखा गया है। उन्होंने माँग की कि भोसले परिवार के कम-से-कम दो सदस्यों को ट्रस्ट में स्थान दिया जाए और राजनीतिक नेताओं को बाहर रखा जाए।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण देते हुए कहा, 'ट्रस्ट में राजनेताओं को शामिल करके आप मंदिर का राजनीतिकरण कर रहे हैं। यहाँ तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट में किसी विधायक या सांसद को जगह नहीं दी। अगर आप उनका अनुसरण करते हैं तो आपको उनसे यह सीख लेनी चाहिए।'
पाटिल ने यह भी आपत्ति जताई कि विधेयक के तहत ट्रस्ट सदस्यों को दैनिक भत्ते और परिवहन भत्ते देने का प्रावधान है। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा, 'जब भगवान मंदिर के भीतर हैं, तो ट्रस्ट के सदस्यों को बाहर घूमने की क्या जरूरत है?'
उन्होंने विधेयक के उस प्रावधान को भी संविधान-विरोधी बताया जिसमें ट्रस्ट सदस्यों को भगवान राम का भक्त होने की शपथ देनी होगी। पाटिल के अनुसार, यह व्यवस्था संविधान में निहित धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों के विरुद्ध है और भगवान हनुमान की पूजा करने वाले व्यक्ति के लिए भी हितों के टकराव की स्थिति पैदा कर सकती है।
उन्होंने माँग की कि विधेयक को विस्तृत समीक्षा के लिए संयुक्त चयन समिति के पास भेजा जाए और अगले विधानसभा सत्र में दोबारा पेश किया जाए।
दान पेटी और वित्तीय पारदर्शिता
पाटिल ने विधेयक में दान पेटी खोलने और धनराशि गिनने की स्पष्ट प्रक्रिया न होने पर चिंता जताई। उन्होंने सुझाव दिया कि दान पेटियों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएँ, प्रतिदिन प्राप्त नकदी उसी दिन रजिस्टर में दर्ज की जाए और चोरी रोकने के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए जाएँ।
इसके अलावा, उन्होंने एक सख्त प्रावधान की माँग की जो स्थानीय विधायकों और नगर पालिका अध्यक्षों को मंदिर के निर्धारित क्षेत्र से बाहर ट्रस्ट फंड के उपयोग से रोके।
कानून-व्यवस्था पर गंभीर आरोप
रामटेक विधेयक के अलावा पाटिल ने राज्य की बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर भी राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी अक्सर विधानसभा की कार्यवाही से अनुपस्थित रहते हैं।
उन्होंने मार्च 2013 में विलास और प्रशांत वाघमारे की दोहरी हत्या का मामला उठाया और बताया कि इस मामले के मुख्य गवाह दादासो नामदेव वाघमारे का 5 मई 2026 को अदालत में गवाही देने जाते समय कथित तौर पर अपहरण कर हत्या कर दी गई। पाटिल ने आरोप लगाया कि आरोपियों को राजनीतिक और आर्थिक संरक्षण मिल रहा है और पूरे मामले की विशेष जाँच दल (SIT) से जाँच कराने की माँग की।
सांगली जिले में एक आदतन अपराधी द्वारा 13 वर्षीय वेदांग बंदगर की कथित तौर पर गोली मारकर हत्या का मामला भी पाटिल ने उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल के एक नेता ने पहले पुलिस इंस्पेक्टर पर उस आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज न करने का दबाव बनाया था, जिसके परिणामस्वरूप बाद में बच्चे की जान गई।
पुलिस भ्रष्टाचार और नशे का कारोबार
पाटिल ने नागपुर में एक बड़े घोटाले का उल्लेख किया जिसमें नौ पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ऑनलाइन गेमिंग से जुड़ी महज ₹500 की शिकायत पर कार्रवाई के नाम पर पुलिस की दो टीमें वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति के बिना मुंबई और पुणे गईं, जहाँ उन्होंने ₹250 करोड़ के क्रिकेट सट्टेबाजी रैकेट का भंडाफोड़ किया, सरगना को गिरफ्तार किया और कथित तौर पर भारी रिश्वत लेकर उसे छोड़ दिया।
महाराष्ट्र में फैलते नशे के कारोबार पर गहरी चिंता जताते हुए पाटिल ने कहा कि यह पुलिस के लिए 'कमाई का दूसरा स्रोत' बन गया है। उन्होंने बताया कि अकेले 2026 में 2,438 मामले दर्ज हुए, 3,173 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया और ₹239 करोड़ मूल्य का प्रतिबंधित सामान जब्त हुआ। नेरल में मेफेड्रोन (एमडी) की बड़ी खेप बरामद होने का हवाला देते हुए उन्होंने खुफिया तंत्र पर सवाल उठाए।
डोंबिवली के शास्त्रीनगर अस्पताल में एक स्थानीय जनप्रतिनिधि पर स्वास्थ्यकर्मियों से मारपीट के आरोप का जिक्र करते हुए पाटिल ने कहा कि राज्य में डॉक्टर अब सुरक्षित नहीं हैं।
बुनियादी ढाँचे की खामियाँ
संस्थागत भ्रष्टाचार का एक और उदाहरण देते हुए पाटिल ने बताया कि नांदेड़ में हाल ही में बने एक पुल का हिस्सा ढह गया, जिसमें दो छात्र बाल-बाल बचे। उन्होंने स्थानीय अधिकारियों के उस दावे को खारिज किया जिसमें पुल गिरने के लिए भूकंप को जिम्मेदार ठहराया गया था। पाटिल ने पूछा कि यदि भूकंप आया था, तो आसपास की एक भी झोपड़ी को नुकसान क्यों नहीं पहुँचा। यह टिप्पणी राज्य में बुनियादी ढाँचे की गुणवत्ता और जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े करती है।