भारत की ग्रोथ स्टोरी पर वैश्विक भरोसा मजबूत, AI और कॉरपोरेट गवर्नेंस से आएगा टिकाऊ निवेश: PwC विशेषज्ञ
सारांश
मुख्य बातें
प्राइस वाटरहाउस चार्टर्ड अकाउंटेंट्स एलएलपी (PwC) के वरिष्ठ विशेषज्ञों ने 10 जुलाई 2025 को नई दिल्ली में कहा कि भारत की आर्थिक विकास यात्रा को लेकर वैश्विक निवेशकों का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है। उनके अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), पारदर्शी वित्तीय रिपोर्टिंग, सुदृढ़ कॉरपोरेट गवर्नेंस और विश्वसनीय संस्थागत ढाँचा — ये चार स्तंभ भारत को दीर्घकालिक आर्थिक विकास की राह पर आगे ले जा रहे हैं। केंद्र सरकार द्वारा कारोबार सुगमता के लिए उठाए जा रहे कदम भी देश में अधिक पूंजी, प्रतिभा और विदेशी निवेश खींचने में सहायक बन रहे हैं।
AI और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की भूमिका
PwC के पार्टनर राहुल चट्टोपाध्याय ने कहा कि आज लगभग हर कंपनी AI के रणनीतिक महत्व को भली-भाँति समझ चुकी है। उन्होंने कहा कि सूचना अब सभी के लिए सहजता से उपलब्ध है और कंपनियाँ AI-आधारित विकास को गति देने के लिए जरूरी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में निरंतर निवेश कर रही हैं। चट्टोपाध्याय के अनुसार, आने वाले वर्षों में AI ही कारोबार की दिशा तय करने वाला सबसे निर्णायक कारक बनेगा।
विश्वसनीयता — सबसे बड़ी कॉरपोरेट पूंजी
चट्टोपाध्याय ने जोर देकर कहा कि किसी भी संगठन के लिए विश्वसनीयता ही उसकी सबसे बड़ी संपत्ति होती है। उनके शब्दों में, "विश्वसनीयता केवल एक चीज से नहीं बनती — अच्छी कॉरपोरेट गवर्नेंस, पारदर्शी वित्तीय रिपोर्टिंग और मजबूत आंतरिक प्रणालियाँ मिलकर किसी कंपनी की साख तैयार करती हैं। ऐसी कंपनियाँ बेहतर निवेश, प्रतिभाशाली कर्मचारियों और दीर्घकालिक विकास को आकर्षित करने में सफल रहती हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि जब किसी कंपनी पर भरोसा बढ़ता है, तो उसे बेहतर निवेश मिलता है और यही निवेश आगे चलकर टिकाऊ विकास की नींव बनता है।
गवर्नेंस सुधार और सरकारी पहल
चट्टोपाध्याय ने बताया कि केंद्र सरकार कारोबार को सरल बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुधार लागू कर रही है। इन पहलों का मकसद भारत की आर्थिक वृद्धि को टिकाऊ बनाना और देश में अधिक निवेश, पूंजी तथा प्रतिभा को आकर्षित करना है। उन्होंने कहा कि भारत एक युवा देश है जहाँ मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था और बेहतर गवर्नेंस मौजूद है — यही बुनियाद आने वाले वर्षों में देश को स्थायी आर्थिक विकास की ओर ले जाएगी।
भरोसा बनाए रखना — सबसे बड़ी चुनौती
PwC के पार्टनर अनुराग खंडेलवाल ने कहा कि किसी भी संगठन के सामने सबसे कठिन चुनौती भरोसा कायम करना और उसे लंबे समय तक बनाए रखना है। उन्होंने कहा, "अर्थव्यवस्था में कई ऐसे उदाहरण हैं जहाँ कंपनियाँ शुरुआत में तेजी से आगे बढ़ीं, लेकिन भरोसा बनाए नहीं रख सकीं और लंबे समय तक टिक नहीं पाईं। इसलिए केवल विकास हासिल करना पर्याप्त नहीं — उसे लगातार बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।" खंडेलवाल के अनुसार, विश्वसनीय विकास का अर्थ केवल अधिक मुनाफा नहीं, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता देना है।
पूरे इकोसिस्टम की साझा जिम्मेदारी
खंडेलवाल ने रेखांकित किया कि भारतीय अर्थव्यवस्था और भारतीय कंपनियों में अपार संभावनाएँ हैं, लेकिन इतिहास गवाह है कि वही कंपनियाँ दीर्घकालिक रूप से सफल रही हैं जिन्होंने कॉरपोरेट गवर्नेंस को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि मजबूत और टिकाऊ विकास के लिए पूरे कारोबारी इकोसिस्टम को एकजुट होकर काम करना होगा — इसमें संस्थापकों, निवेशकों, स्वतंत्र वित्तीय निगरानी संस्थाओं और सभी हितधारकों की बराबर की भूमिका है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है और विदेशी संस्थागत निवेशकों की नजरें भारतीय बाजार पर टिकी हैं।