क्या 2026 होगा आईटी सेक्टर के लिए टर्निंग पॉइंट?
सारांश
Key Takeaways
- 2026 आईटी सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण मोड़ हो सकता है।
- एआई और क्लाउड सेवाओं की मांग बढ़ रही है।
- कुछ कंपनियाँ जैसे एचसीएलटेक और टेक महिंद्रा ने बढ़त बनाई है।
- निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए, लेकिन दीर्घकालिक संभावनाएँ मजबूत हैं।
- वैश्विक आर्थिक हालात का सीधा असर आईटी सेक्टर पर पड़ेगा।
मुंबई, 4 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। नए साल 2026 की शुरुआत के साथ, भारतीय शेयर बाजार के निवेशक उन क्षेत्रों पर नजरें गड़ाए हुए हैं जहाँ भविष्य में मजबूत विकास देखने की संभावना है। भारतीय आईटी सेक्टर लंबे समय से निवेशकों के लिए एक पसंदीदा क्षेत्र रहा है, हालाँकि हाल के समय में वैश्विक आर्थिक दबावों के कारण इसकी गति थोड़ी धीमी हो गई थी। अब, ब्रोकरेज फर्मों की नई रिपोर्टें इस सेक्टर के प्रति फिर से आशा जगा रही हैं।
हाल ही में एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग द्वारा जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भले ही अमेरिका जैसे बड़े बाजारों में ग्राहक अभी पूरी तरह से खर्च करने के लिए तैयार नहीं हैं, लेकिन टेक्नोलॉजी में हो रहे परिवर्तनों ने आईटी कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। विशेषकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्लाउड, और डिजिटल सेवाओं की मांग धीरे-धीरे बढ़ रही है।
भारतीय आईटी कंपनियों की आमदनी का एक बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार से आता है, विशेषकर रिटेल सेक्टर से। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 की तीसरी तिमाही में अमेरिकी रिटेल कंपनियों की कमाई में हल्की बढ़ोतरी देखी गई है। इससे यह संकेत मिलता है कि बाजार भले ही तेजी में नहीं है, लेकिन स्थिरता की ओर बढ़ रहा है।
हालाँकि, उपभोक्ता विश्वास में आई कमी यह दर्शाती है कि अमेरिकी ग्राहक अभी भी बड़े और महंगे फैसलों से बच रहे हैं। लोग आवश्यक चीजों पर खर्च कर रहे हैं, लेकिन बड़े टेक प्रोजेक्ट्स और नई डील्स के लिए सतर्कता
रिपोर्ट के अनुसार, इस चुनौतीपूर्ण माहौल में भी कुछ भारतीय आईटी कंपनियाँ बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। एचसीएलटेक और टेक महिंद्रा ने एआई पर मजबूत ध्यान देकर अन्य कंपनियों से बढ़त बनाई है। इन कंपनियों ने एआई को न केवल अपनाया है, बल्कि इसे बड़े स्तर पर अपने व्यवसाय मॉडल में शामिल किया है।
वहीं, टीसीएस का मानना है कि बाजार में सतर्कता अभी भी बनी हुई है, लेकिन गिरावट का दौर अब थमने लगा है।
इंफोसिस के अनुसार, ग्राहक अब एआई, क्लाउड अपग्रेडेशन, और लागत कम करने वाले प्रोजेक्ट्स पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, हालाँकि डील्स को फाइनल होने में समय लग रहा है।
इस बीच, विप्रो अपने ग्राहकों के साथ मिलकर सप्लाई चेन में सुधार और खर्चों को कम करने के उपायों पर काम कर रही है।
ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि निकट भविष्य में कुछ चुनौतियाँ बनी रहेंगी, लेकिन मध्यम अवधि में आईटी सेवाओं की मांग मजबूत रहने की उम्मीद है। जैसे-जैसे वैश्विक आर्थिक हालात सुधरेंगे, भारतीय आईटी सेक्टर में तेज रिकवरी देखी जा सकती है।
फिलहाल, ब्रोकरेज ने एचसीएलटेक, कोफोर्ज, और एमफेसिस को अपनी पसंदीदा कंपनियों में शामिल किया है। इन कंपनियों की एआई आधारित रणनीति और मजबूत क्लाइंट पोर्टफोलियो उन्हें मुश्किल समय में भी टिकाए हुए हैं।
इस प्रकार, आईटी सेक्टर के लिए 2026 बदलाव और नए अवसरों का वर्ष साबित हो सकता है। कंपनियाँ अब पारंपरिक सेवाओं से आगे बढ़कर एआई, क्लाउड, और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रही हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, निवेशकों को वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए सावधानी बरतनी चाहिए, लेकिन लंबी अवधि के दृष्टिकोण से भारतीय आईटी कंपनियों की स्थिति अब भी मजबूत प्रतीत होती है। आने वाले समय में यह सेक्टर एक बार फिर निवेशकों को अच्छे रिटर्न दे सकता है।