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भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों में रोजगार का बड़ा हिस्सा: नई रिपोर्ट

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भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों में रोजगार का बड़ा हिस्सा: नई रिपोर्ट

सारांश

भारत में रोजगार का बड़ा हिस्सा अब टियर-2 और टियर-3 शहरों में केंद्रित हो रहा है। एक नई रिपोर्ट से यह जानकारी सामने आई है कि इन क्षेत्रों में रोजगार की वृद्धि हो रही है। जानें क्या हैं प्रमुख आंकड़े और कौन से शहर बन रहे हैं नए रोजगार के केंद्र।

मुख्य बातें

भारत में 70 प्रतिशत नौकरियां टियर-2 और टियर-3 शहरों में हैं।
टियर-3 शहरों में 40 प्रतिशत रोजगार है।
रिटेल और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र मुख्य रोजगार प्रदाता हैं।
4.83 लाख कर्मचारियों का अध्ययन किया गया है।
यूएएन से कर्मचारियों को कई लाभ मिल रहे हैं।

नई दिल्ली, 23 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत के लगभग 70 प्रतिशत रोजगार अवसर गैर-मेट्रो, यानी टियर-2 और टियर-3 शहरों में उपलब्ध हैं। सोमवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, टियर-3 शहरों में अकेले 40 प्रतिशत रोजगार है, जबकि टियर-2 शहरों में 29 प्रतिशत लोगों को रोजगार मिलता है। इसके विपरीत, टियर-1 शहरों की हिस्सेदारी 31 प्रतिशत है।

स्टाफिंग फर्म क्वेस कॉर्प द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में बताया गया है कि बीएफएसआई (बैंकिंग, वित्तीय सेवा और बीमा) और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र मिलकर टियर-3 शहरों के 45 प्रतिशत से अधिक कार्यबल को रोजगार प्रदान कर रहे हैं, वहीं रिटेल सेक्टर की हिस्सेदारी 33 प्रतिशत है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि कोयंबटूर, इंदौर, सूरत, वडोदरा, नोएडा और लखनऊ जैसे तेजी से विकसित होते शहर अब रोजगार के बड़े केंद्र बनकर उभर रहे हैं। बढ़ती खपत और औद्योगिक कॉरिडोर इन शहरों के श्रम बाजार को नया आकार दे रहे हैं।

क्वेस कॉर्प के मुख्य कार्यकारी अधिकारी लोहित भाटिया ने कहा, "ये आंकड़े दर्शाते हैं कि रिटेल विस्तार, मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर और सेवाओं के विकेंद्रीकरण के कारण रोजगार के अवसर अब बड़े शहरों से बाहर फैल रहे हैं।"

रिटेल, बीएफएसआई, ईएमपीआई/मैन्युफैक्चरिंग, टेलीकॉम, एफएमसीजी/एफएमसीडी और लॉजिस्टिक्स सेक्टर मिलकर अधिकांश रोजगार के अवसर प्रदान कर रहे हैं। यही क्षेत्र टियर-2 और टियर-3 बाजारों में रोजगार वृद्ध‍ि के प्रमुख प्रेरक बने हुए हैं।

इन क्षेत्रों में स्टोर ऑपरेशंस, सेल्स, प्लांट संचालन और सप्लाई चेन जैसे विभिन्न प्रकार के पद शामिल हैं। यह दर्शाता है कि टियर-2 और टियर-3 शहरों में औपचारिक रोजगार तेजी से बढ़ रहा है।

4.83 लाख कर्मचारियों पर आधारित इस अध्ययन में पाया गया कि 64 प्रतिशत कर्मचारी 30 वर्ष से कम आयु के हैं। इसके अतिरिक्त, 55 प्रतिशत कर्मचारी अपनी वर्तमान नौकरी में एक वर्ष से भी कम समय से कार्यरत हैं। यह दर्शाता है कि प्रोजेक्ट आधारित कार्य और मौसमी मांग के कारण रोजगार में तेजी से बदलाव आ रहा है।

वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में 26,000 से अधिक नए यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) बनाए गए, जिससे पहले अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों को भविष्य निधि (पीएफ), ईएसआई, बीमा और अन्य वैधानिक लाभों तक पहुंच प्राप्त हुई।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पूरे देश में यूएएन बनाए जा रहे हैं, लेकिन साथ ही कार्यबल का बड़ा हिस्सा टियर-2 और टियर-3 शहरों की ओर स्थानांतरित हो रहा है। इससे स्पष्ट है कि गैर-मेट्रो क्षेत्रों में रोजगार में वृद्धि के साथ सामाजिक सुरक्षा कवरेज भी सशक्त हो रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह रिपोर्ट दर्शाती है कि भारत के विकास में टियर-2 और टियर-3 शहरों की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। रोजगार के अवसरों का फैलाव और सामाजिक सुरक्षा कवरेज का विस्तार इन क्षेत्रों के लिए सकारात्मक संकेत हैं। यह देश की आर्थिक स्थिरता और सामाजिक समृद्धि के लिए आवश्यक है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों में रोजगार कैसे बढ़ रहा है?
रिपोर्ट के अनुसार, टियर-2 और टियर-3 शहरों में रिटेल और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्रों में रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं।
कौन से शहर रोजगार के प्रमुख केंद्र बन रहे हैं?
कोयंबटूर, इंदौर, सूरत, वडोदरा, नोएडा और लखनऊ जैसे शहर तेजी से रोजगार के केंद्र बन रहे हैं।
इस अध्ययन में कितने कर्मचारियों का डेटा शामिल है?
इस अध्ययन में कुल 4.83 लाख कर्मचारियों का डेटा शामिल है।
क्या टियर-2 और टियर-3 शहरों में औपचारिक रोजगार में वृद्धि हो रही है?
हां, रिपोर्ट में यह दर्शाया गया है कि टियर-2 और टियर-3 शहरों में औपचारिक रोजगार तेजी से बढ़ रहा है।
यूएएन का क्या महत्व है?
यूएएन कर्मचारियों को भविष्य निधि, ईएसआई और अन्य लाभों तक पहुंच प्रदान करता है, इससे सामाजिक सुरक्षा कवरेज मजबूत हो रही है।
राष्ट्र प्रेस
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