आईएमएफ का कहना: एआई तकनीक का प्रभाव वैश्विक उत्पादकता पर अभी तक नहीं हुआ स्पष्ट
सारांश
Key Takeaways
- एआई तकनीक का प्रभाव अभी वैश्विक उत्पादकता पर स्पष्ट नहीं है।
- भविष्य में एआई आर्थिक विकास को बढ़ावा दे सकता है।
- भर्ती में नरमी आ रही है, विशेषकर एंट्री-लेवल नौकरियों में।
- आईएमएफ ने वित्तीय अस्थिरता के खतरे की चेतावनी दी है।
- नीति निर्माताओं को कर्मचारियों को नए कौशल सिखाने की जरूरत है।
वॉशिंगटन, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने बताया है कि तेजी से विकसित हो रही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक का प्रभाव अभी तक वैश्विक उत्पादकता के आंकड़ों में स्पष्ट रूप से नहीं दिखाई दे रहा है। हालांकि, इस तकनीक में भविष्य में आर्थिक विकास को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाने की क्षमता है।
भारत, जापान, यूएई, नीदरलैंड और चिली के पत्रकारों के साथ एक समूह साक्षात्कार के दौरान आईएमएफ के मुख्य अर्थशास्त्री पियरे-ओलिवियर गौरींचस ने कहा कि वर्तमान मैक्रोइकॉनॉमिक डेटा में एआई का प्रभाव स्पष्ट नहीं है।
उन्होंने कहा, "हमारे आकलन के अनुसार, हमें अभी तक उपलब्ध आंकड़ों में एआई से उत्पादकता में कोई महत्वपूर्ण सुधार नहीं दिखाई दे रहा है।"
गौरींचस ने बताया कि तकनीक में तेजी से प्रगति हुई है, लेकिन इसका व्यापक स्तर पर उपयोग अभी सीमित है। उन्होंने कहा, "हम तकनीकी प्रगति से प्रभावित हैं, लेकिन इसका बड़ा आर्थिक प्रभाव अभी नहीं दिख रहा है।"
आईएमएफ का मानना है कि भविष्य में एआई आर्थिक विकास के लिए एक बड़ा सकारात्मक कारक हो सकता है। उनके अनुसार, इससे हर साल उत्पादकता वृद्धि में 0.1 से 0.4 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है, जबकि कुछ अनुमानों में यह अधिक भी हो सकता है।
हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि इस बदलाव के दौरान रोजगार क्षेत्र में कुछ चुनौतियां आ सकती हैं।
गौरींचस ने कहा कि भर्ती में थोड़ी नरमी आ रही है, विशेषकर एंट्री-लेवल नौकरियों में, जो एआई के प्रभाव को दर्शाता है।
हालांकि उन्होंने बड़े पैमाने पर स्थायी बेरोजगारी की संभावना को खारिज किया, लेकिन कहा कि भविष्य में नौकरियों का स्वरूप काफी बदल जाएगा।
उन्होंने कहा, "हम नहीं मानते कि एआई से बड़े पैमाने पर बेरोजगारी होगी, लेकिन आने वाली नौकरियां काफी अलग होंगी।"
गौरींचस ने यह भी कहा कि बदलाव के दौरान असमानता हो सकती है, क्योंकि पुराने रोजगार खत्म होने से पहले नए रोजगार पूरी तरह से नहीं बन पाते।
आईएमएफ ने एक और चिंता जताई कि एआई क्षेत्र में अधिक निवेश और बढ़े हुए वैल्यूएशन से वित्तीय अस्थिरता का खतरा भी उत्पन्न हो सकता है।
गौरींचस ने कहा कि वर्तमान में कई कंपनियां बड़े स्तर पर फंडिंग जुटा रही हैं, जबकि संभव है कि बाजार में केवल कुछ ही कंपनियां टिक पाएं।
उन्होंने चेतावनी दी कि इससे बाजार में वैल्यूएशन में बड़ी गिरावट आ सकती है, जैसा कि पहले डॉट-कॉम बबल के दौरान हुआ था।
यदि इन निवेशों में अधिक कर्ज शामिल हुआ, तो इसका असर बैंकिंग सिस्टम पर भी पड़ सकता है।
आईएमएफ के इस आकलन से स्पष्ट है कि एआई में जहाँ अपार संभावनाएँ हैं, वहीं इसके साथ कई जोखिम भी जुड़े हुए हैं।
फिलहाल, तकनीकी प्रगति को लेकर उम्मीद बनी हुई है, लेकिन इसका असली लाभ कब और कितना मिलेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
नीति निर्माता और व्यवसाय इस बात पर ध्यान दे रहे हैं कि कर्मचारियों को नए स्किल्स सिखाए जाएं ताकि वे बदलती नौकरी की जरूरतों के अनुसार खुद को ढाल सकें। नियामक संस्थाएं भी बाजार में संभावित जोखिमों पर नजर बनाए हुए हैं।
जैसे-जैसे एआई का उपयोग बढ़ेगा, इसका दीर्घकालिक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि देश इन अवसरों और चुनौतियों को कैसे संभालते हैं।