वित्त वर्ष 2026 में भारत के रत्न और आभूषण निर्यात ने हासिल की 27.72 अरब डॉलर की ऊंचाई
सारांश
Key Takeaways
- वित्त वर्ष 2026 में निर्यात 27.72 अरब डॉलर पर पहुंचा।
- 0.93 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि डॉलर में 3.32 प्रतिशत की कमी आई।
- यूएई और ऑस्ट्रेलिया के साथ एफटीए ने निर्यात को बढ़ाने में मदद की।
- कट और पॉलिश किए गए हीरे का योगदान 43.9 प्रतिशत है।
- सोने के आभूषण का निर्यात स्थिर रहा।
नई दिल्ली, 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत का रत्न और आभूषण (जेम्स और ज्वेलरी) निर्यात वित्त वर्ष 2026 में 27.72 अरब डॉलर (लगभग 2,44,827.26 करोड़ रुपए) तक पहुंच गया। इस वर्ष, रुपए के संदर्भ में 0.93 प्रतिशत की हल्की बढ़त हुई, जबकि पिछले वित्त वर्ष 2025 में यह 2,42,559.39 करोड़ रुपए था।
डॉलर के संदर्भ में, निर्यात में सालाना आधार पर 3.32 प्रतिशत की मामूली गिरावट देखी गई।
जेम एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (जीजेईपीसी) ने एक बयान में कहा कि यह प्रदर्शन ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अनिश्चितता, अमेरिका की टैरिफ नीति में बदलाव और पश्चिम एशिया में तनाव जैसी चुनौतियां थीं। इसके बावजूद, यह भारत के जेम्स और ज्वेलरी सेक्टर में हो रहे महत्वपूर्ण परिवर्तनों को दर्शाता है।
जीजेईपीसी के अध्यक्ष किरित भंसाली ने कहा, "वित्त वर्ष 2025-26 भारतीय जेम्स और ज्वेलरी उद्योग के लिए बदलाव का एक महत्वपूर्ण समय रहा है, जहां विकास अब केवल एक बाजार पर निर्भर नहीं है। निर्यातकों ने नए देशों में विस्तार किया है और वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स पर अधिक ध्यान केंद्रित किया है।"
अमेरिका में टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण वहां निर्यात में गिरावट आई, लेकिन यूएई, हांगकांग, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों में अच्छी वृद्धि देखने को मिली।
किरित भंसाली ने बताया कि यूएई और ऑस्ट्रेलिया के साथ किए गए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) ने निर्यात को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अप्रैल-फरवरी 2026 के दौरान यूएई को निर्यात में 22 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई, हालांकि क्षेत्रीय तनाव के कारण पूरे वर्ष के लिए यह वृद्धि 10.52 प्रतिशत तक सीमित रही और कुल निर्यात 8.70 अरब डॉलर रहा।
वहीं, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में 38.33 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि देखी गई, जो यह दर्शाता है कि एफटीए के माध्यम से नए बाजारों में विस्तार कितना महत्वपूर्ण है।
इस वर्ष यूके और यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ संभावित एफटीए लागू होने से जेम्स और ज्वेलरी निर्यात को और भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
कट और पॉलिश किए गए हीरे (डायमंड) इस क्षेत्र में सबसे बड़ा योगदान देने वाला उत्पाद बना रहा, जिसकी हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2026 में कुल निर्यात का 43.9 प्रतिशत रही।
वहीं, सोने के आभूषणों (ज्वेलरी) का निर्यात, जिसमें सादे और जड़े हुए दोनों प्रकार शामिल हैं, लगभग स्थिर रहा और 11.36 अरब डॉलर पर रहा, जिसमें सालाना आधार पर 0.03 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज की गई।