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ईंधन कीमतों में वृद्धि से थोक महंगाई में उछाल, ब्याज दरें स्थिर रखने की संभावना: अर्थशास्त्री

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ईंधन कीमतों में वृद्धि से थोक महंगाई में उछाल, ब्याज दरें स्थिर रखने की संभावना: अर्थशास्त्री

सारांश

ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी से थोक महंगाई दर में उछाल आया है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि केंद्रीय बैंक आने वाले समय में ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है। जानिए इस स्थिति का विस्तृत विश्लेषण।

मुख्य बातें

ईंधन कीमतों में वृद्धि का थोक महंगाई पर बड़ा प्रभाव पड़ा है।
केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को स्थिर रखने की संभावना है।
खाद्य महंगाई दर 1.8 प्रतिशत पर स्थिर है।
ग्लोबली कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने की संभावना है।
आरबीआई विकास संबंधी चिंताओं के चलते ब्याज दरों में जल्दबाजी नहीं करेगा।

नई दिल्ली, 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। ईंधन कीमतों में वृद्धि के कारण भारत में मार्च महीने में थोक महंगाई दर में वृद्धि हुई है, जिससे यह संभावना जताई जा रही है कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है। यह जानकारी अर्थशास्त्रियों ने बुधवार को साझा की।

आईसीआरए में वरिष्ठ अर्थशास्त्री राहुल अग्रवाल का कहना है कि थोक महंगाई में वृद्धि का आधार काफी विस्तृत था, जिसमें क्रूड पेट्रोलियम और नेचुरल गैस की कीमतों में वृद्धि शामिल है।

उन्होंने बताया, "मार्च 2026 में मुख्य महंगाई में 175 आधार अंकों की वृद्धि में से 150 आधार अंक इन दोनों समूहों से आए।"

अग्रवाल ने कहा कि मार्च में खाद्य महंगाई दर 1.8 प्रतिशत पर स्थिर रही, जबकि गैर-खाद्य वस्तुओं में थोक महंगाई फरवरी के 3.3 प्रतिशत से बढ़कर 41 महीनों के उच्चतम स्तर 3.7 प्रतिशत पर पहुँच गई।

उन्होंने बताया कि क्रमिक आधार पर मार्च में मुख्य सूचकांक में 0.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो पिछले तीन महीनों के औसत के अनुरूप है।

अर्थशास्त्री ने बताया कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के साथ शिपिंग, माल ढुलाई और इनपुट लागत में भी वृद्धि हो रही है, जिससे आयात लागत बढ़ सकती है। इस कारण अप्रैल में थोक महंगाई में और वृद्धि की संभावना है।

केयरएज रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा ने भी इसी चिंता को व्यक्त किया, यह कहते हुए कि हालिया थोक महंगाई डेटा पश्चिम एशिया संकट के गंभीर प्रभाव को दर्शाता है।

उन्होंने कहा, "यह अंतर थोक डीजल और अन्य वाणिज्यिक ईंधन की कीमतों में वृद्धि के कारण है, जबकि खुदरा पेट्रोल और डीजल की कीमतें अपरिवर्तित रही हैं।"

उन्होंने बताया कि रिफाइनरियों ने मार्च में थोक डीजल की कीमतों में 25 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की, जबकि घरेलू गैस सिलेंडरों की कीमत में 60 रुपए और वाणिज्यिक सिलेंडरों की कीमत में कुल 310 रुपए की वृद्धि दर्ज की गई।

सिन्हा ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया संकट का शीघ्र समाधान होने पर भी, वित्त वर्ष 2027 में वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें औसतन 85-90 डॉलर प्रति बैरल रहने की संभावना है।

उन्होंने कहा, "ऊंची कच्चे तेल की कीमतों का बोझ परिवारों, सरकार और तेल विपणन कंपनियों पर पड़ेगा।"

सिन्हा ने कहा कि मजबूत रिफाइनिंग मार्जिन के कारण तेल विपणन कंपनियाँ 100-105 डॉलर प्रति बैरल तक कच्चे तेल की कीमतों को सहन कर सकती हैं। उन्होंने अनुमान लगाया कि कच्चे तेल की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल मानते हुए, वित्त वर्ष 2027 में थोक महंगाई दर औसतन लगभग 5 प्रतिशत रहेगी।

मौद्रिक नीति के मामले में, उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा नीतिगत दरों में यथास्थिति बनाए रखने की संभावना है।

उन्होंने कहा, "विकास संबंधी चिंताओं को देखते हुए, आरबीआई ब्याज दरों में परिवर्तन करने में जल्दबाजी नहीं करेगा।"

यदि विकास का दृष्टिकोण दीर्घकालिक संभावित विकास से काफी नीचे गिरता है, तो केंद्रीय बैंक वित्त वर्ष के अंत में ब्याज दरों में कटौती करने की संभावना तलाश सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

ईंधन की कीमतों में वृद्धि से थोक महंगाई में वृद्धि हुई है, जिससे केंद्रीय बैंक के लिए ब्याज दरों को स्थिर रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यह स्थिति उपभोक्ताओं और व्यवसायों पर विभिन्न प्रभाव डाल सकती है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईंधन की कीमतों में वृद्धि का थोक महंगाई पर क्या प्रभाव है?
ईंधन की कीमतों में वृद्धि के कारण थोक महंगाई दर में उछाल आया है, जिससे यह संभावना है कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है।
क्या आरबीआई ब्याज दरों में बदलाव करेगा?
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आरबीआई विकास संबंधी चिंताओं को देखते हुए ब्याज दरों में बदलाव करने में जल्दबाजी नहीं करेगा।
थोक महंगाई में वृद्धि का मुख्य कारण क्या है?
थोक महंगाई में वृद्धि का मुख्य कारण ईंधन और ऊर्जा की कीमतों में वृद्धि है।
क्या वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें बढ़ेंगी?
विश्लेषकों का मानना है कि वित्त वर्ष 2027 में वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें औसतन 85-90 डॉलर प्रति बैरल रहने की संभावना है।
खाद्य महंगाई की स्थिति क्या है?
मार्च में खाद्य महंगाई दर 1.8 प्रतिशत पर स्थिर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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