खुदरा महंगाई दर वित्त वर्ष 27 में औसत 5.1% रहने का अनुमान, अप्रैल में 3.48% पर पहुँची

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खुदरा महंगाई दर वित्त वर्ष 27 में औसत 5.1% रहने का अनुमान, अप्रैल में 3.48% पर पहुँची

सारांश

क्रिसिल रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 27 में भारत की खुदरा महंगाई औसतन 5.1% रहेगी। अप्रैल में यह 3.48% पर मामूली बढ़ी, कोर मुद्रास्फीति चौथे महीने 3.7% पर स्थिर। ब्रेंट क्रूड 90-95 डॉलर और अल नीनो का जोखिम आगे दबाव बढ़ा सकता है।

मुख्य बातें

क्रिसिल रेटिंग्स के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 में खुदरा महंगाई औसतन 5.1 प्रतिशत रहने का अनुमान।
अप्रैल 2026 में खुदरा महंगाई 3.48 प्रतिशत रही, जो मार्च में 3.40 प्रतिशत थी।
कोर मुद्रास्फीति लगातार चौथे महीने 3.7 प्रतिशत पर स्थिर।
ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत वित्त वर्ष 27 में 90-95 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान — पिछले वर्ष से 32 प्रतिशत अधिक।
RBI आगामी मौद्रिक नीति में ब्याज दरें स्थिर रख सकता है।
अल नीनो और कम मानसून से खाद्य महंगाई पर नया दबाव बनने की आशंका।

क्रिसिल रेटिंग्स की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भारत में खुदरा महंगाई दर वित्त वर्ष 2026-27 में औसतन 5.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है। अप्रैल 2026 में खुदरा महंगाई मामूली रूप से बढ़कर 3.48 प्रतिशत हो गई, जो मार्च में 3.40 प्रतिशत थी। रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि उपभोक्ता फिलहाल तेज महंगाई के दबाव से काफी हद तक सुरक्षित बने हुए हैं।

महंगाई के मौजूदा रुझान

रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव को 74 दिन बीत चुके हैं, फिर भी खुदरा महंगाई के ऊपर जाने के जोखिम बेहद धीमी गति से सामने आ रहे हैं। कोर मुद्रास्फीति लगातार चौथे महीने 3.7 प्रतिशत पर स्थिर बनी रही, जिसका कारण ऊर्जा और अन्य इनपुट की बढ़ती लागत का उपभोक्ताओं तक अभी पूरी तरह न पहुँचना है।

अप्रैल में बेस इफेक्ट की वजह से बिजली, गैस और ईंधन की महंगाई में कमी दर्ज की गई। साथ ही, सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रखने के फैसले ने परिवहन ईंधन की महंगाई को नियंत्रण में रखा।

ऊर्जा संकट और कच्चे तेल का पूर्वानुमान

रिपोर्ट के अनुसार, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान से उपजे ऊर्जा संकट ने तेल की कीमतों के पूर्वानुमानों को ऊँचा कर दिया है। वित्त वर्ष 2026-27 में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत 90-95 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 32 प्रतिशत अधिक है।

रेस्तरां, आवास सेवाओं, घरेलू साज-सामान और उपकरणों की महंगाई में अपेक्षित वृद्धि दर्ज हुई, हालाँकि कीमती धातुओं की मुद्रास्फीति में धीमी बढ़त ने कुछ राहत प्रदान की।

आगामी महीनों में दबाव के संकेत

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि उत्पादकों पर ऊर्जा और अन्य इनपुट की लागत में तेज़ वृद्धि के साथ-साथ व्यापार एवं परिवहन की बढ़ती लागत का बोझ आने वाले महीनों में उपभोक्ताओं पर स्थानांतरित होने की आशंका है, जिससे कोर मुद्रास्फीति में वृद्धि हो सकती है।

इसके अतिरिक्त, संभावित अल नीनो स्थितियों और जारी लू के बीच सामान्य से कम मानसून वर्षा से कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे खाद्य महंगाई पर नया दबाव बन सकता है — जो अभी अपने निम्नतम स्तर से सामान्य की ओर लौट रही है।

RBI की मौद्रिक नीति पर असर

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा में ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अनिश्चितता के बीच केंद्रीय बैंक महंगाई और विकास दर के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। आने वाले महीनों में ऊर्जा और खाद्य कीमतों की दिशा ही यह तय करेगी कि RBI का रुख कितना सख्त होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चिंता यह है कि ऊर्जा लागत का बोझ अभी उपभोक्ताओं तक पूरी तरह नहीं पहुँचा है — यानी सबसे कठिन दौर अभी आना बाकी है। ब्रेंट क्रूड का 32 प्रतिशत उछाल और अल नीनो का संभावित प्रभाव एक साथ आएँ तो खाद्य और ईंधन महंगाई का दोहरा झटका मध्यम वर्ग की क्रय शक्ति को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। RBI के दरें स्थिर रखने की संभावना से यह भी स्पष्ट होता है कि केंद्रीय बैंक विकास दर को जोखिम में नहीं डालना चाहता — लेकिन यह रणनीति तब तक ही टिकेगी जब तक मुद्रास्फीति 6 प्रतिशत की सीमा से नीचे रहे।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वित्त वर्ष 27 में भारत की खुदरा महंगाई दर कितनी रहने का अनुमान है?
क्रिसिल रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की खुदरा महंगाई दर औसतन 5.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है। अप्रैल 2026 में यह 3.48 प्रतिशत दर्ज की गई, जो मार्च में 3.40 प्रतिशत थी।
कोर मुद्रास्फीति अभी किस स्तर पर है और यह स्थिर क्यों है?
कोर मुद्रास्फीति लगातार चौथे महीने 3.7 प्रतिशत पर स्थिर बनी हुई है। इसका मुख्य कारण यह है कि ऊर्जा और अन्य इनपुट की बढ़ती लागत अभी उत्पादकों से उपभोक्ताओं तक पूरी तरह नहीं पहुँची है।
RBI आगामी मौद्रिक नीति में क्या कदम उठा सकता है?
रिपोर्ट के अनुसार भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा में ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है। वैश्विक अनिश्चितता और घरेलू महंगाई के बीच संतुलन बनाना RBI की प्राथमिकता बताई जा रही है।
ब्रेंट क्रूड की कीमतों का महंगाई पर क्या असर पड़ेगा?
वित्त वर्ष 2026-27 में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत 90-95 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 32 प्रतिशत अधिक है। इससे परिवहन और ऊर्जा लागत बढ़ने से उपभोक्ता महंगाई पर दबाव पड़ सकता है।
खाद्य महंगाई पर क्या जोखिम हैं?
रिपोर्ट के अनुसार संभावित अल नीनो स्थितियों और जारी लू के कारण सामान्य से कम मानसून वर्षा की आशंका है, जिससे कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है और खाद्य महंगाई पर नया दबाव बन सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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