मार्च में थोक महंगाई दर 3.88 प्रतिशत: गैर-खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि

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मार्च में थोक महंगाई दर 3.88 प्रतिशत: गैर-खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि

सारांश

मार्च में थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है। यह आंकड़ा 3.88 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो फरवरी के 2.13 प्रतिशत से काफी अधिक है। जानिए इसके पीछे के कारण और बाजार पर प्रभाव।

Key Takeaways

  • मार्च में थोक महंगाई दर 3.88 प्रतिशत रही।
  • फरवरी में यह दर 2.13 प्रतिशत थी।
  • कच्चे तेल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी ने महंगाई को प्रभावित किया।
  • ईंधन और ऊर्जा की कीमतों में 4.13 प्रतिशत का इजाफा हुआ।
  • थोक खाद्य महंगाई दर 1.85 प्रतिशत पर स्थिर रही।

मुंबई, 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मार्च में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित महंगाई दर 3.88 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि फरवरी में यह 2.13 प्रतिशत थी। यह जानकारी वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा बुधवार को साझा की गई।

मार्च में थोक महंगाई दर में वृद्धि का मुख्य कारण कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस, गैर-खाद्य वस्तुओं, बुनियादी धातुओं के निर्माण और खाद्य उत्पादों की कीमतों में वृद्धि रही है।

आंकड़ों के अनुसार, मार्च में ईंधन और ऊर्जा की कीमतों में 4.13 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसी बीच, खनिज तेल की कीमतों में पिछले महीने की तुलना में 8.77 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि, बिजली की कीमतों में 5.07 प्रतिशत की कमी आई है।

मंत्रालय ने बताया कि 22 विनिर्माण समूहों में से 16 में मार्च में कीमतों में वृद्धि हुई है, जबकि 6 समूहों में गिरावट आई है। थोक खाद्य महंगाई दर मार्च में 1.85 प्रतिशत पर स्थिर रही, जो फरवरी में भी इसी स्तर पर थी।

इससे पहले सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने सोमवार को जारी खुदरा महंगाई दर के आंकड़ों में बताया कि मार्च में यह 3.4 प्रतिशत रही, जिसमें क्रमिक आधार पर 0.19 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। फरवरी में यह 3.21 प्रतिशत थी।

मंत्रालय के अनुसार, मार्च में ग्रामीण क्षेत्रों में खुदरा महंगाई दर 3.63 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 3.11 प्रतिशत रही है।

खाद्य महंगाई दर मार्च में 3.87 प्रतिशत रही, जबकि फरवरी में यह 3.47 प्रतिशत थी। ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य महंगाई दर 3.96 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 3.71 प्रतिशत रही।

पिछले महीने प्याज की महंगाई -27.76 प्रतिशत, आलू -18.98 प्रतिशत, लहसुन -10.18 प्रतिशत, अरहर -9.56 प्रतिशत और मटर, चना -7.87 प्रतिशत रही, जो राष्ट्रीय स्तर पर सबसे कम महंगाई वाले शीर्ष 5 उत्पाद थे। इन सभी में महंगाई दर सालाना आधार पर नकारात्मक रही है।

वहीं दूसरी ओर, चांदी की ज्वैलरी में 148.61 प्रतिशत, सोना/हीरा/प्लेटिनम ज्वैलरी में 45.92 प्रतिशत, कोपरा में 45.52 प्रतिशत, टमाटर में 35.99 प्रतिशत और फूलगोभी में 34.11 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। ये सभी उत्पाद राष्ट्रीय स्तर पर सबसे अधिक महंगाई वाले शीर्ष 5 आइटम में शामिल हैं।

Point of View

जिससे उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ सकता है।
NationPress
18/04/2026

Frequently Asked Questions

थोक महंगाई दर क्या है?
थोक महंगाई दर उस दर को दर्शाती है, जिस पर थोक स्तर पर वस्तुओं की कीमतें बढ़ रही हैं।
महंगाई दर में वृद्धि का क्या असर होता है?
महंगाई दर में वृद्धि से उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति प्रभावित होती है और जीवन स्तर में गिरावट आ सकती है।
कौन से उत्पादों में महंगाई बढ़ी है?
मार्च में कच्चे तेल, गैस, और कई गैर-खाद्य वस्तुओं में महंगाई बढ़ी है।
क्या थोक महंगाई दर और खुदरा महंगाई दर में कोई संबंध है?
हाँ, थोक महंगाई दर में वृद्धि अक्सर खुदरा महंगाई दर को भी प्रभावित करती है।
महंगाई दर की गणना कैसे की जाती है?
महंगाई दर की गणना उपभोक्ता मूल्य सूचकांक और थोक मूल्य सूचकांक के आधार पर की जाती है।
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