बुंदेली मार्शल आर्ट के स्तंभ भगवानदास रैकवार का निधन, कला क्षेत्र में शोक छाया
सारांश
Key Takeaways
- भगवानदास रैकवार ने बुंदेली मार्शल आर्ट को नई पहचान दी।
- उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।
- उनका जीवन कला और संस्कृति के प्रति समर्पित रहा।
- कला जगत में उनका योगदान अमूल्य रहेगा।
- उनके निधन से शोक की लहर दौड़ गई है।
भोपाल, १८ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बुंदेली मार्शल आर्ट को नई दिशा देने वाले पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित प्रसिद्ध कलाकार भगवानदास रैकवार का शनिवार को इलाज के दौरान अत्यंत दुखद निधन हो गया। वे पिछले कई दिनों से बीमार थे और भोपाल के एक निजी अस्पताल में उनका उपचार चल रहा था।
जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा वर्ष २०२६ के लिए घोषित पद्म पुरस्कारों में भगवानदास रैकवार को मार्शल आर्ट के क्षेत्र में उनके अद्वितीय योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। उन्हें विशेष रूप से बुंदेली मार्शल आर्ट की पारंपरिक कला को संरक्षित और बढ़ावा देने के लिए यह मान्यता दी गई थी।
भगवानदास रैकवार ने अपने समस्त जीवन को बुंदेलखंड की पारंपरिक युद्धकला के संरक्षण और प्रचार में समर्पित किया। उन्होंने न केवल इस प्राचीन कला को जीवित रखा, बल्कि इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके प्रयासों से बुंदेली मार्शल आर्ट को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली।
उनके निधन की सूचना से कला जगत और बुंदेलखंड क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई है। कलाकारों, सामाजिक संगठनों और कला प्रेमियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।
मध्य प्रदेश के डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला ने रैकवार के निधन पर शोक व्यक्त किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, "सागर, मध्यप्रदेश के गौरव श्री भगवानदास रैकवार जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। समाज सेवा और समर्पण से परिपूर्ण आपका जीवन हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा। आपके अमूल्य योगदान सदैव स्मरणीय रहेंगे। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें एवं शोक संतप्त परिजनों को यह दुःख सहने की शक्ति दें।"