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क्या ट्रंप के इजरायल के प्रति समर्थन ने नेतन्याहू को किया परेशान? लेबनान पर हमले की रोकथाम के बाद की बातें

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क्या ट्रंप के इजरायल के प्रति समर्थन ने नेतन्याहू को किया परेशान? लेबनान पर हमले की रोकथाम के बाद की बातें

सारांश

डोनाल्ड ट्रंप के लेबनान पर हमले रोकने के बयान ने इजरायल और अमेरिका के रिश्तों में नया मोड़ ला दिया है। नेतन्याहू की प्रतिक्रिया और ट्रंप का समर्थन इस मुद्दे को और भी जटिल बना रहा है। जानिए पूरी कहानी।

मुख्य बातें

ट्रंप का इजरायल को समर्थन नेतन्याहू की प्रतिक्रिया लेबनान पर हमले की रोकथाम अमेरिका की विदेश नीति में बदलाव ईरान संकट का प्रभाव

वॉशिंगटन, 19 अप्रैल (राष्ट्रीय प्रेस)। ईरान संकट के चलते इजरायल और अमेरिका के बीच तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हुई। हाल ही में, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लेबनान पर हमले को रोकने का एक महत्वपूर्ण बयान दिया, जिससे इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू बहुत नाराज हो गए। इसके तुरंत बाद, ट्रंप ने एक नया बयान दिया जिसमें उन्होंने इजरायल को अमेरिका का एक अद्भुत सहयोगी बताया।

ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट में लिखा, "चाहे इजरायल को पसंद करें या नहीं, उन्होंने अमेरिका का एक महान सहयोगी बनकर दिखाया है। वे साहसी, वफादार और बुद्धिमान हैं। दूसरों के विपरीत, जिन्होंने संघर्ष के समय अपनी असली पहचान दिखाई, इजरायल मेहनत करता है और जीतने का तरीका जानता है।"

वास्तव में, ट्रंप ने पोस्ट में कहा कि इजरायल को लेबनान में हवाई हमले करने से रोका गया है। इस बयान ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनके सलाहकारों को चौंका दिया, क्योंकि यह इजरायल और लेबनान के बीच सीजफायर समझौते के विपरीत था। इजरायल ने व्हाइट हाउस से स्पष्टीकरण मांगा।

ट्रंप के बयान से यह प्रतीत हुआ कि वह एक ऐसा आदेश दे रहे हैं जिसे इजरायल को मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। हालाँकि, यह ट्रंप का पुराना तरीका रहा है कि वे अक्सर सोशल मीडिया पर इस तरह के बयान देते हैं जिससे ऐसा लगता है कि दूसरे पक्ष के पास अमेरिका की बात मानने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है।

ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर लिखा, "इजरायल अब लेबनान पर बमबारी नहीं करेगा। अमेरिका ने उन्हें ऐसा करने से मना किया है। काफी हो चुका।" इसके अतिरिक्त, एक्सियोस के साथ एक साक्षात्कार में उन्होंने अपने बयान को दोहराते हुए कहा, "इजरायल को रुकना होगा। उन्हें इमारतों को उड़ाना जारी नहीं रखना चाहिए। मैं इसकी अनुमति नहीं दूंगा।"

इसके बाद, वॉशिंगटन में इजरायली राजदूत येचिएल लीटर समेत इजरायली अधिकारियों ने यह जानने की कोशिश की कि क्या अमेरिका की नीति बदल गई है। उन्होंने व्हाइट हाउस से स्पष्टीकरण मांगा और जोर दिया कि ट्रंप का बयान सीजफायर समझौते के खिलाफ है।

एक्सियोस ने अमेरिकी सरकारी अधिकारी से बात की, जिन्होंने स्पष्ट किया कि यह समझौता आक्रमणकारी सैन्य ऑपरेशन को रोकता है, लेकिन इजरायल के आत्मरक्षा के अधिकार को सुरक्षित रखता है।

इसके अतिरिक्त, अमेरिका की पूर्व उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने इजरायल पर आरोप लगाया। फॉक्स न्यूज के अनुसार, ईरान के साथ संघर्षों को लेकर हैरिस ने कहा, "यह स्पष्ट है कि अमेरिका एक ऐसे युद्ध में शामिल हो गया है जिसे अमेरिकी लोग नहीं चाहते। नेतन्याहू ने उन्हें इसमें खींच लिया, जिससे अमेरिकी सैनिकों को खतरा हो गया।"

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि नेतन्याहू की प्रतिक्रिया दर्शाती है कि वे इस स्थिति को लेकर चिंतित हैं।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डोनाल्ड ट्रंप का लेबनान पर हमला रोकने का क्या मतलब है?
यह ट्रंप का इजरायल के प्रति समर्थक रुख दर्शाता है, लेकिन साथ ही यह नेतन्याहू की नीति को चुनौती भी देता है।
क्या ट्रंप ने इजरायल को धमकी दी थी?
जी हाँ, ट्रंप ने इजरायल को लेबनान पर बमबारी रोकने के लिए कहा, जो नेतन्याहू के लिए एक उलटफेर है।
इस घटनाक्रम का इजरायल की सुरक्षा पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
यह इजरायल की सैन्य रणनीति पर सवाल उठाता है और अमेरिका के समर्थन की नींव को भी हिला सकता है।
कमला हैरिस का इजरायल के बारे में क्या कहना था?
हैरिस ने कहा कि अमेरिका एक ऐसे युद्ध में शामिल हो गया है जिसे अमेरिकी लोग नहीं चाहते।
क्या अमेरिका की नीति में बदलाव हो रहा है?
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का बयान अमेरिका की विदेश नीति में संभावित बदलाव का संकेत दे सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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