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ट्रंप का दावा: 'मैं न होता तो इजरायल तबाह हो जाता', नेतन्याहू को लेबनान पर जिम्मेदारी की नसीहत

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ट्रंप का दावा: 'मैं न होता तो इजरायल तबाह हो जाता', नेतन्याहू को लेबनान पर जिम्मेदारी की नसीहत

सारांश

एवियन में जी7 के इतर ट्रंप का बड़ा दावा — 'मैं न होता तो इजरायल तबाह हो जाता।' नेतन्याहू को लेबनान पर जिम्मेदारी की नसीहत, ओबामा की ईरान नीति पर हमला, और सीरिया को हिज्बुल्लाह से निपटने का सुझाव — मध्य-पूर्व कूटनीति में नई हलचल।

मुख्य बातें

डोनाल्ड ट्रंप ने 16 जून को एवियन में दावा किया कि उनके बिना इजरायल तबाह हो सकता था।
ट्रंप ने बेंजामिन नेतन्याहू को लेबनान के संदर्भ में 'अधिक जिम्मेदारी से काम करने' की नसीहत दी।
इजरायल को सुझाव दिया कि हिज्बुल्लाह से निपटने की जिम्मेदारी सीरिया को सौंपी जाए।
लेबनान संघर्ष के लंबे खिंचने से ईरान परमाणु वार्ता पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका जताई।
पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की ईरान परमाणु नीति को 'बड़ी गलती' बताया और कहा कि उन्होंने वह समझौता समाप्त किया।
कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी की संयम और कूटनीतिक भूमिका के लिए सराहना की।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार, 16 जून को एवियन में कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में दावा किया कि यदि वे अमेरिकी राष्ट्रपति न होते, तो इजरायल का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता था। जी7 सम्मेलन के इतर हुई इस द्विपक्षीय बैठक में ट्रंप ने इजरायल, लेबनान और ईरान परमाणु समझौते पर कड़े बयान दिए।

ट्रंप का इजरायल पर बड़ा दावा

ट्रंप ने कहा, 'इजरायल का अस्तित्व और उसकी सुरक्षा में अमेरिका की भूमिका निर्णायक रही है। उनके नेतृत्व के बिना इजरायल की स्थिति कमजोर हो सकती थी, क्योंकि अन्य कोई राष्ट्रपति वह कदम उठाने को तैयार नहीं था जो उन्होंने उठाए।' उन्होंने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ अपने संबंधों को 'बेहद अच्छा' बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि नेतन्याहू को 'लेबनान के संदर्भ में अधिक जिम्मेदारी से काम करना चाहिए।'

लेबनान संघर्ष पर चिंता और नसीहत

लेबनान की बिगड़ती स्थिति पर चिंता जताते हुए ट्रंप ने कहा, 'यह देश पहले शिक्षकों, डॉक्टरों और वकीलों के लिए जाना जाता था, लेकिन अब इसकी स्थिति काफी खराब हो चुकी है।' उन्होंने इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच लंबे खिंचते संघर्ष पर कहा, 'किसी एक व्यक्ति को निशाना बनाने के लिए हर बार पूरी इमारत को गिराना उचित नहीं है, क्योंकि उन इमारतों में कई निर्दोष लोग भी रहते हैं, जो हिज्बुल्लाह से जुड़े नहीं हैं।'

ट्रंप ने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने इजरायल को सुझाव दिया था कि हिज्बुल्लाह से निपटने की जिम्मेदारी सीरिया को सौंपी जाए। उनका मानना है कि 'सीरिया शायद यह काम बेहतर तरीके से कर सकता है।' यह टिप्पणी उल्लेखनीय है क्योंकि यह वर्तमान क्षेत्रीय कूटनीतिक समीकरणों में एक नई दिशा का संकेत देती है।

ईरान परमाणु वार्ता पर असर की आशंका

ट्रंप ने आगाह किया कि लेबनान में लंबे खिंचते संघर्ष का नकारात्मक असर ईरान के साथ चल रही परमाणु वार्ता पर पड़ सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि ईरान के मुकाबले लेबनान का संघर्ष 'छोटा मामला' है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर कूटनीतिक प्रयास जारी हैं।

ओबामा की ईरान नीति पर हमला

ट्रंप ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की ईरान परमाणु नीति की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि ओबामा-युग का वह समझौता ईरान को परमाणु क्षमता की ओर ले जाने वाला रास्ता था। ट्रंप के अनुसार, उस समय इजरायल के प्रधानमंत्री ने वाशिंगटन जाकर ओबामा से उस समझौते को रोकने की अपील की थी, लेकिन वे सफल नहीं हुए। ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने बाद में उस समझौते को 'एक बड़ी गलती' करार देते हुए समाप्त कर दिया।

कतर के अमीर की सराहना

ट्रंप ने कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी की मुश्किल घड़ी में संयम से काम लेने के लिए प्रशंसा की और उन्हें अमेरिकी हितों के लिए अहम बताया। गौरतलब है कि कतर मध्य-पूर्व में कई कूटनीतिक मध्यस्थता प्रयासों में केंद्रीय भूमिका निभाता रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि ट्रंप के इन बयानों का मध्य-पूर्व की कूटनीति और ईरान वार्ता पर क्या असर पड़ता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे केवल व्यक्तिगत दंभ तक सीमित करना गलत होगा। यह बयान उस समय आया है जब अमेरिका-इजरायल संबंधों में लेबनान नीति को लेकर दरार की खबरें सामने आ रही हैं। नेतन्याहू को सार्वजनिक मंच पर 'जिम्मेदारी' की नसीहत देना और हिज्बुल्लाह प्रबंधन सीरिया को सौंपने का सुझाव — ये संकेत देते हैं कि वाशिंगटन और तेल अवीव के बीच रणनीतिक तालमेल उतना निर्बाध नहीं है जितना दिखता है। ईरान वार्ता को लेबनान संघर्ष से जोड़ने की ट्रंप की स्वीकारोक्ति यह भी बताती है कि मध्य-पूर्व की ये सभी कड़ियाँ एक-दूसरे से बंधी हैं — और किसी एक मोर्चे पर विलंब पूरे कूटनीतिक ढाँचे को प्रभावित कर सकता है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप ने एवियन में इजरायल को लेकर क्या दावा किया?
ट्रंप ने दावा किया कि यदि वे अमेरिकी राष्ट्रपति न होते तो इजरायल तबाह हो सकता था। उन्होंने कहा कि कोई अन्य राष्ट्रपति वे कदम उठाने को तैयार नहीं था जो उन्होंने इजरायल की सुरक्षा के लिए उठाए।
ट्रंप ने नेतन्याहू को लेबनान पर क्या नसीहत दी?
ट्रंप ने नेतन्याहू के साथ संबंधों को 'बेहद अच्छा' बताते हुए भी कहा कि उन्हें लेबनान के संदर्भ में अधिक जिम्मेदारी से काम करना चाहिए। उन्होंने निर्दोष नागरिकों को नुकसान पहुँचाने वाली कार्रवाइयों पर चिंता जताई।
ट्रंप ने हिज्बुल्लाह से निपटने के लिए क्या सुझाव दिया?
ट्रंप ने कहा कि उन्होंने इजरायल को सुझाव दिया था कि हिज्बुल्लाह से निपटने की जिम्मेदारी सीरिया को दी जाए। उनका मानना है कि सीरिया यह काम बेहतर तरीके से कर सकता है।
ट्रंप ने ईरान परमाणु समझौते पर क्या कहा?
ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की ईरान परमाणु नीति को 'बड़ी गलती' बताया और कहा कि वह समझौता ईरान को परमाणु क्षमता की ओर ले जाने वाला रास्ता था। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने उस समझौते को समाप्त किया और उनका दृष्टिकोण इसे रोकने वाला 'मजबूत ढाँचा' है।
कतर के अमीर के साथ ट्रंप की बैठक का क्या संदर्भ था?
जी7 सम्मेलन के इतर एवियन में ट्रंप ने कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी के साथ द्विपक्षीय बैठक की। ट्रंप ने अमीर की मुश्किल घड़ी में संयम से काम लेने के लिए प्रशंसा की और उन्हें अमेरिकी हितों के लिए अहम बताया।
राष्ट्र प्रेस
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