नेतन्याहू का ऐलान: 'ईरान भारी कीमत चुका चुका है, इस शासन का पतन होगा'
सारांश
मुख्य बातें
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने 2 जून 2026 को स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान अपने कार्यों की 'बहुत बड़ी कीमत' चुका चुका है और तेहरान के मौजूदा शासन की बुनियादें हिल चुकी हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि इजरायल के विरुद्ध षड्यंत्र रचने वाले किसी भी पक्ष को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
मोसाद विदाई समारोह में दिया बयान
सोमवार को मोसाद निदेशक डेविड बरनिया के विदाई समारोह में दिए गए संबोधन में नेतन्याहू ने यह बातें कहीं। मंगलवार को उन्होंने अपने एक्स (X) अकाउंट पर इन प्रमुख बातों को पोस्ट भी किया।
नेतन्याहू ने कहा, 'जो कोई भी इजरायल के खिलाफ बुरी नीयत से देखेगा, उसे यह जान लेना चाहिए कि उसकी साजिशें असफल होंगी। उसे इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। ईरान पहले ही बहुत बड़ी कीमत चुका चुका है। इस शासन की नींव दरक चुकी है। यह कभी पहले जैसा नहीं हो सकेगा, और अंततः इसका पतन होगा।'
ट्रंप-नेतन्याहू तनाव की पृष्ठभूमि
यह बयान ऐसे समय आया है जब कथित तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नेतन्याहू से लेबनान में हमले रोकने को कहा है। द टाइम्स ऑफ इजरायल ने एक्सियोस के हवाले से लिखा कि ट्रंप ने इस मुद्दे पर कड़े शब्दों में नाराजगी जताई। गौरतलब है कि यह अमेरिका-इजरायल संबंधों में बढ़ते तनाव का संकेत है, जो हाल के हफ्तों में कई बार सार्वजनिक हुआ है।
मोसाद की सराहना और बरनिया को विदाई
नेतन्याहू ने अपने संबोधन में मोसाद को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ खुफिया एजेंसी बताया। उन्होंने कहा कि इजरायल ने तकनीक, रक्षा, चिकित्सा और कृषि में वैश्विक पहचान बनाई है, लेकिन मोसाद का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद-रोधी और खुफिया श्रेष्ठता का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री ने निदेशक डेविड बरनिया के 30 वर्षीय कार्यकाल को इजरायल के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण दौरों में से एक करार दिया। उन्होंने कहा कि बरनिया के नेतृत्व में हासिल उपलब्धियों ने इजरायल की सुरक्षा को निर्णायक रूप से मजबूत किया।
क्षेत्रीय संदर्भ और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में तनाव कई मोर्चों पर एक साथ बना हुआ है — गाजा संघर्ष, लेबनान की स्थिति और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंतरराष्ट्रीय दबाव। नेतन्याहू का यह बयान इजरायल की आक्रामक रक्षा नीति की पुनः पुष्टि के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, मोसाद के नए नेतृत्व में इजरायल की खुफिया प्राथमिकताएँ और रणनीति आने वाले महीनों में स्पष्ट होंगी।