19 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

गढ़वाली फिल्म 'ढोली' को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सिल्वर लोटस, सीएम धामी ने बताया ऐतिहासिक

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
गढ़वाली फिल्म 'ढोली' को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सिल्वर लोटस, सीएम धामी ने बताया ऐतिहासिक

सारांश

गढ़वाली सिनेमा ने राष्ट्रीय मंच पर बड़ी छलांग लगाई है — 'ढोली' को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सिल्वर लोटस मिला। सीएम धामी ने इसे उत्तराखंड की नई फिल्म नीति की जीत बताते हुए क्षेत्रीय भाषा और संस्कृति को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में अहम कदम करार दिया।

मुख्य बातें

गढ़वाली फिल्म 'ढोली' ने 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ गढ़वाली फिल्म का सिल्वर लोटस अवॉर्ड जीता।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे उत्तराखंडी सिनेमा के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।
धामी ने उत्तराखंड की नई फिल्म नीति को इस सफलता का श्रेय देते हुए स्थानीय युवाओं को मिल रहे रोज़गार अवसरों का उल्लेख किया।
सरकार का लक्ष्य स्थानीय भाषा, लोककला और परंपराओं को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुँचाना है।
मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि 'ढोली' की सफलता राज्य के युवा फिल्म निर्माताओं और कलाकारों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी।

गढ़वाली फिल्म 'ढोली' ने 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में फीचर फिल्म श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ गढ़वाली फिल्म का प्रतिष्ठित सिल्वर लोटस अवॉर्ड जीतकर उत्तराखंडी सिनेमा को राष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाई है। 18 जुलाई को इस उपलब्धि पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए इसे उत्तराखंडी सिनेमा के लिए ऐतिहासिक क्षण करार दिया।

मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि यह सम्मान केवल एक फिल्म की सफलता नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत और क्षेत्रीय सिनेमा की पहचान का प्रतीक है। उन्होंने फिल्म के निर्देशक, निर्माता, कलाकारों और पूरी टीम को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।

धामी ने कहा, 'उत्तराखंड की नई फिल्म नीति का सकारात्मक असर अब साफ दिखाई देने लगा है। राज्य सरकार द्वारा फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई नीतियों के कारण स्थानीय कलाकारों, निर्देशकों और निर्माताओं को नए अवसर मिल रहे हैं। इसी का परिणाम है कि आज उत्तराखंडी सिनेमा राष्ट्रीय मंच पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।'

नई फिल्म नीति का प्रभाव

मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य की नई फिल्म नीति के तहत फिल्म निर्माताओं को अनेक सुविधाएँ और प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। इससे उत्तराखंड में फिल्म निर्माण गतिविधियाँ बढ़ी हैं और स्थानीय युवाओं को अभिनय, निर्देशन, तकनीकी कार्यों सहित विभिन्न क्षेत्रों में रोज़गार के नए अवसर मिल रहे हैं।

धामी ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य केवल फिल्मों की शूटिंग को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि स्थानीय भाषा, संस्कृति, लोककला और लोक परंपराओं को देश और दुनिया तक पहुँचाना भी है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड अपनी प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक विरासत के साथ-साथ फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी तेज़ी से पहचान बना रहा है।

क्षेत्रीय सिनेमा के लिए मायने

गौरतलब है कि राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में गढ़वाली सिनेमा की यह उपस्थिति उत्तराखंड के सांस्कृतिक मानचित्र पर एक महत्त्वपूर्ण पड़ाव है। सिल्वर लोटस अवॉर्ड भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला प्रतिष्ठित सम्मान है, जो क्षेत्रीय भाषाओं में उत्कृष्ट सिनेमाई कार्य को मान्यता देता है। 'ढोली' की यह जीत हिंदी पट्टी के बाहर के क्षेत्रीय सिनेमा की बढ़ती स्वीकार्यता को भी रेखांकित करती है।

आगे की राह

मुख्यमंत्री धामी ने उम्मीद जताई कि 'ढोली' की यह सफलता राज्य के अन्य फिल्म निर्माताओं और युवा कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में उत्तराखंडी फिल्में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई उपलब्धियाँ हासिल करती रहेंगी और राज्य का नाम देश-दुनिया में रोशन करेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या राज्य की नई फिल्म नीति केवल शूटिंग-स्थलों को आकर्षित करने तक सीमित रहती है या स्थानीय भाषाओं में मौलिक कहानियाँ कहने वाले निर्माताओं को दीर्घकालिक समर्थन भी देती है। गढ़वाली और कुमाऊँनी सिनेमा दशकों से संसाधनों की कमी से जूझता रहा है — एक पुरस्कार नीतिगत निरंतरता का विकल्प नहीं हो सकता। मुख्यमंत्री के बयान में रोज़गार के आँकड़े और नीतिगत प्रोत्साहन के ठोस विवरण का अभाव है, जो इस उत्साह को जवाबदेही की कसौटी पर परखने से रोकता है।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गढ़वाली फिल्म 'ढोली' को कौन-सा राष्ट्रीय पुरस्कार मिला?
'ढोली' को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में फीचर फिल्म श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ गढ़वाली फिल्म का सिल्वर लोटस अवॉर्ड मिला। यह भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला प्रतिष्ठित सम्मान है जो उत्कृष्ट क्षेत्रीय सिनेमा को मान्यता देता है।
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने 'ढोली' की जीत पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि को उत्तराखंडी सिनेमा के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया और कहा कि यह सम्मान पूरे उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत और क्षेत्रीय सिनेमा की पहचान का प्रतीक है। उन्होंने फिल्म की पूरी टीम को बधाई दी।
उत्तराखंड की नई फिल्म नीति क्या है और इसका क्या असर हुआ है?
उत्तराखंड सरकार ने फिल्म निर्माताओं को सुविधाएँ और प्रोत्साहन देने के लिए एक नई फिल्म नीति बनाई है। मुख्यमंत्री धामी के अनुसार, इस नीति के कारण राज्य में फिल्म निर्माण गतिविधियाँ बढ़ी हैं और स्थानीय युवाओं को अभिनय, निर्देशन व तकनीकी क्षेत्रों में रोज़गार के अवसर मिल रहे हैं।
'ढोली' की जीत उत्तराखंडी सिनेमा के लिए क्यों महत्त्वपूर्ण है?
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में गढ़वाली सिनेमा की यह उपस्थिति उत्तराखंड के सांस्कृतिक मानचित्र पर एक अहम पड़ाव है। यह जीत क्षेत्रीय भाषाओं में उत्कृष्ट सिनेमाई कार्य को राष्ट्रीय मान्यता दिलाती है और हिंदी पट्टी के बाहर के सिनेमा की बढ़ती स्वीकार्यता को रेखांकित करती है।
क्या भविष्य में उत्तराखंडी फिल्में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बना सकती हैं?
मुख्यमंत्री धामी ने विश्वास जताया है कि आने वाले वर्षों में उत्तराखंडी फिल्में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई उपलब्धियाँ हासिल करेंगी। राज्य सरकार का लक्ष्य स्थानीय भाषा, लोककला और परंपराओं को वैश्विक मंच तक पहुँचाना है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले