19 जुलाई 2026
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सेना की मुफ्त कोचिंग से असम के 30 छात्रों ने नीट 2026 क्वालिफाई किया, तिनसुकिया के 45 में से 30 सफल

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सेना की मुफ्त कोचिंग से असम के 30 छात्रों ने नीट 2026 क्वालिफाई किया, तिनसुकिया के 45 में से 30 सफल

सारांश

असम के तिनसुकिया में भारतीय सेना की रेड शील्ड डिवीजन की मुफ्त आवासीय कोचिंग पहल ने 30 छात्रों को नीट 2026 पास कराया। चाय बागान के रोशन कुजूर की 402 अंकों की सफलता बताती है कि सही अवसर मिले तो वंचित तबके के बच्चे भी देश की सबसे कठिन परीक्षाएँ जीत सकते हैं।

मुख्य बातें

भारतीय सेना समर्थित NIEDO कार्यक्रम के 45 में से 30 छात्रों ने नीट 2026 उत्तीर्ण किया।
कार्यक्रम स्पीयर कॉर्प्स की रेड शील्ड डिवीजन द्वारा तिनसुकिया, असम में संचालित है।
दिघलतरंग चाय बागान के रोशन कुजूर ने नीट 2026 में 402 अंक हासिल किए — पिता के निधन के बाद बड़े भाई की छोटी दुकान से परिवार चलता है।
कार्यक्रम आर्थिक रूप से कमज़ोर छात्रों को निःशुल्क आवास, भोजन और कोचिंग प्रदान करता है।
यह पहल पूर्वोत्तर भारत में सेना की व्यापक सामुदायिक आउटरीच और युवा सशक्तिकरण रणनीति का हिस्सा है।

तिनसुकिया जिले, असम में भारतीय सेना के सहयोग से संचालित नेशनल इंटीग्रिटी एंड एजुकेशनल डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (NIEDO) ने नीट 2026 में उल्लेखनीय सफलता दर्ज की है — कार्यक्रम के 45 में से 30 छात्रों ने देश की सबसे कठिन मेडिकल प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की। अधिकारियों ने 18 जुलाई 2026 को यह जानकारी दी। यह उपलब्धि स्पीयर कॉर्प्स के अंतर्गत रेड शील्ड डिवीजन की उस पहल का परिणाम है, जो आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों के मेधावी छात्रों को निःशुल्क आवास, भोजन और कोचिंग प्रदान करती है।

कार्यक्रम की संरचना और उद्देश्य

NIEDO का यह आवासीय कोचिंग कार्यक्रम पिछले कुछ वर्षों में ऊपरी असम में शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में उभरा है। भारतीय सेना के सहयोग से चलने वाला यह कार्यक्रम सुनिश्चित करता है कि वंचित पृष्ठभूमि के होनहार विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण कोचिंग और मेंटरशिप मिले, ताकि वे देश भर के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए प्रतिस्पर्धा कर सकें। अधिकारियों के अनुसार, यह पहल पूर्वोत्तर भारत में सेना की व्यापक सामुदायिक आउटरीच का अभिन्न हिस्सा है।

प्रेरणादायक कहानी: रोशन कुजूर की जीत

सफल उम्मीदवारों में तिनसुकिया के दिघलतरंग चाय बागान के रोशन कुजूर की कहानी विशेष रूप से उल्लेखनीय है। रोशन ने नीट 2026 में 402 अंक हासिल किए। बचपन में ही पिता को खो देने के बाद उनके बड़े भाई — जो तिनसुकिया में एक छोटी दुकान चलाते हैं — परिवार का एकमात्र सहारा बने। आर्थिक विपरीत परिस्थितियों के बावजूद रोशन ने अपनी पढ़ाई पर एकाग्रता बनाए रखी और NIEDO के कार्यक्रम का लाभ उठाते हुए यह परीक्षा उत्तीर्ण की।

सेना की प्रतिक्रिया और मूल्यांकन

सेना के अधिकारियों ने कहा कि रोशन जैसे छात्रों की सफलता उस जज़्बे को दर्शाती है जो कठिन परिस्थितियों में भी शिक्षा के अवसरों का सदुपयोग करके आगे बढ़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह उपलब्धि छात्रों की लगन, NIEDO के शिक्षकों और मेंटर्स के मार्गदर्शन तथा भारतीय सेना के निरंतर सहयोग का सामूहिक परिणाम है। स्पीयर कॉर्प्स के अंतर्गत यह कार्यक्रम सेना की ऑपरेशनल ज़िम्मेदारियों के साथ-साथ युवा सशक्तिकरण और सामुदायिक विकास के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

आगे की राह

नीट 2026 की इस सफलता को NIEDO कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब पूर्वोत्तर के दूरदराज़ इलाकों में मेडिकल शिक्षा तक पहुँच एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। आने वाले वर्षों में इस कार्यक्रम के विस्तार और अधिक छात्रों को लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ मेडिकल शिक्षा तक पहुँच और भी सीमित है, ऐसे कार्यक्रमों की माँग कहीं अधिक है। सेना की प्रतिबद्धता सराहनीय है, लेकिन इसे संस्थागत रूप देने की ज़िम्मेदारी नागरिक प्रशासन और राज्य सरकार की भी है।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

NIEDO कार्यक्रम क्या है और इसे कौन चलाता है?
NIEDO यानी नेशनल इंटीग्रिटी एंड एजुकेशनल डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन एक निःशुल्क आवासीय कोचिंग कार्यक्रम है, जो भारतीय सेना की स्पीयर कॉर्प्स के अंतर्गत रेड शील्ड डिवीजन के सहयोग से असम के तिनसुकिया जिले में संचालित होता है। यह आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों के मेधावी छात्रों को मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए मुफ्त रहने, खाने और कोचिंग की सुविधा देता है।
नीट 2026 में कितने NIEDO छात्र सफल हुए?
NIEDO कार्यक्रम के कुल 45 छात्रों में से 30 ने नीट 2026 उत्तीर्ण किया, जो लगभग 67% की सफलता दर है। अधिकारियों ने 18 जुलाई 2026 को यह जानकारी साझा की।
रोशन कुजूर कौन हैं और उनकी कहानी क्यों खास है?
रोशन कुजूर तिनसुकिया के दिघलतरंग चाय बागान के रहने वाले हैं, जिन्होंने नीट 2026 में 402 अंक हासिल किए। बचपन में पिता के निधन के बाद उनके बड़े भाई एक छोटी दुकान चलाकर परिवार का खर्च उठाते हैं; ऐसी आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद रोशन ने NIEDO कार्यक्रम का लाभ उठाकर यह परीक्षा पास की।
यह कार्यक्रम पूर्वोत्तर भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
पूर्वोत्तर के दूरदराज़ इलाकों में गुणवत्तापूर्ण मेडिकल कोचिंग तक पहुँच बेहद सीमित है और निजी कोचिंग की लागत अधिकांश परिवारों की पहुँच से बाहर है। यह कार्यक्रम उस खाई को पाटने का प्रयास करता है और सेना की सामुदायिक आउटरीच रणनीति का व्यावहारिक उदाहरण प्रस्तुत करता है।
क्या यह कार्यक्रम आगे और विस्तारित होगा?
अधिकारियों ने संकेत दिया है कि नीट 2026 की सफलता इस कार्यक्रम के लिए एक अहम मील का पत्थर है। हालाँकि विस्तार की कोई आधिकारिक घोषणा अभी तक नहीं की गई है; आने वाले वर्षों में अधिक छात्रों को इसका लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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