सेना की मुफ्त कोचिंग से असम के 30 छात्रों ने नीट 2026 क्वालिफाई किया, तिनसुकिया के 45 में से 30 सफल
सारांश
मुख्य बातें
तिनसुकिया जिले, असम में भारतीय सेना के सहयोग से संचालित नेशनल इंटीग्रिटी एंड एजुकेशनल डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (NIEDO) ने नीट 2026 में उल्लेखनीय सफलता दर्ज की है — कार्यक्रम के 45 में से 30 छात्रों ने देश की सबसे कठिन मेडिकल प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की। अधिकारियों ने 18 जुलाई 2026 को यह जानकारी दी। यह उपलब्धि स्पीयर कॉर्प्स के अंतर्गत रेड शील्ड डिवीजन की उस पहल का परिणाम है, जो आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों के मेधावी छात्रों को निःशुल्क आवास, भोजन और कोचिंग प्रदान करती है।
कार्यक्रम की संरचना और उद्देश्य
NIEDO का यह आवासीय कोचिंग कार्यक्रम पिछले कुछ वर्षों में ऊपरी असम में शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में उभरा है। भारतीय सेना के सहयोग से चलने वाला यह कार्यक्रम सुनिश्चित करता है कि वंचित पृष्ठभूमि के होनहार विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण कोचिंग और मेंटरशिप मिले, ताकि वे देश भर के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए प्रतिस्पर्धा कर सकें। अधिकारियों के अनुसार, यह पहल पूर्वोत्तर भारत में सेना की व्यापक सामुदायिक आउटरीच का अभिन्न हिस्सा है।
प्रेरणादायक कहानी: रोशन कुजूर की जीत
सफल उम्मीदवारों में तिनसुकिया के दिघलतरंग चाय बागान के रोशन कुजूर की कहानी विशेष रूप से उल्लेखनीय है। रोशन ने नीट 2026 में 402 अंक हासिल किए। बचपन में ही पिता को खो देने के बाद उनके बड़े भाई — जो तिनसुकिया में एक छोटी दुकान चलाते हैं — परिवार का एकमात्र सहारा बने। आर्थिक विपरीत परिस्थितियों के बावजूद रोशन ने अपनी पढ़ाई पर एकाग्रता बनाए रखी और NIEDO के कार्यक्रम का लाभ उठाते हुए यह परीक्षा उत्तीर्ण की।
सेना की प्रतिक्रिया और मूल्यांकन
सेना के अधिकारियों ने कहा कि रोशन जैसे छात्रों की सफलता उस जज़्बे को दर्शाती है जो कठिन परिस्थितियों में भी शिक्षा के अवसरों का सदुपयोग करके आगे बढ़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह उपलब्धि छात्रों की लगन, NIEDO के शिक्षकों और मेंटर्स के मार्गदर्शन तथा भारतीय सेना के निरंतर सहयोग का सामूहिक परिणाम है। स्पीयर कॉर्प्स के अंतर्गत यह कार्यक्रम सेना की ऑपरेशनल ज़िम्मेदारियों के साथ-साथ युवा सशक्तिकरण और सामुदायिक विकास के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
आगे की राह
नीट 2026 की इस सफलता को NIEDO कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब पूर्वोत्तर के दूरदराज़ इलाकों में मेडिकल शिक्षा तक पहुँच एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। आने वाले वर्षों में इस कार्यक्रम के विस्तार और अधिक छात्रों को लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।