नेतन्याहू-ट्रंप की फोन पर ईरान को लेकर अहम बातचीत, फिर से सैन्य कार्रवाई की संभावना पर मंथन

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नेतन्याहू-ट्रंप की फोन पर ईरान को लेकर अहम बातचीत, फिर से सैन्य कार्रवाई की संभावना पर मंथन

सारांश

नेतन्याहू और ट्रंप के बीच फोन पर ईरान को लेकर हुई बातचीत ने 8 अप्रैल के युद्धविराम के बाद से सबसे तीखे तनाव का संकेत दिया है। ट्रंप की 'तूफान से पहले का सन्नाटा' वाली पोस्ट और इजरायली मंत्रिमंडल की आपात बैठक — दोनों मिलकर यह सवाल खड़ा करते हैं कि क्या क्षेत्र एक बार फिर संघर्ष की कगार पर है।

मुख्य बातें

बेंजामिन नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रंप के बीच 18 मई को फोन पर ईरान के विरुद्ध संभावित सैन्य कार्रवाई पर चर्चा हुई।
एक वरिष्ठ इजरायली अधिकारी के अनुसार, युद्ध दोबारा छिड़ने पर अमेरिका और इजरायल संयुक्त हमला कर सकते हैं।
बातचीत के बाद नेतन्याहू ने मंत्रिमंडल की आपात सुरक्षा बैठक बुलाई।
28 फरवरी को हमलों के बाद करीब 40 दिन के संघर्ष के उपरांत 8 अप्रैल को युद्धविराम हुआ था।
11-12 अप्रैल को इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता से कोई ठोस समझौता नहीं निकला।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान को चेतावनी दी — 'तूफान से पहले का सन्नाटा।'

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच 18 मई को फोन पर ईरान को लेकर अहम बातचीत हुई। इजरायल के सरकारी टीवी चैनल कान टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों नेताओं ने ईरान के विरुद्ध एक बार फिर सैन्य कार्रवाई शुरू करने की संभावना पर विचार-विमर्श किया। यह बातचीत ऐसे नाज़ुक दौर में हुई है जब यरूशलम और वाशिंगटन के बीच ईरान नीति को लेकर तनाव का स्तर फिर से बढ़ता दिख रहा है।

मंत्रिमंडल की आपात सुरक्षा बैठक

ट्रंप से फोन पर बातचीत के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अपने मंत्रिमंडल की आपात सुरक्षा बैठक बुलाई। इस बैठक में उन सभी मोर्चों की समीक्षा की गई जहाँ इजरायल इस समय सक्रिय संघर्ष में है। एक वरिष्ठ इजरायली अधिकारी के हवाले से रिपोर्टों में कहा गया कि अगर ईरान के खिलाफ युद्ध दोबारा छिड़ता है, तो अमेरिका और इजरायल संयुक्त रूप से सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं।

ट्रंप की कड़ी चेतावनी

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ईरान को सीधी चेतावनी देते हुए लिखा, 'ईरान के लिए समय तेजी से निकल रहा है। उन्हें जल्द फैसला लेना होगा, नहीं तो उनके पास कुछ भी नहीं बचेगा।' इसके अतिरिक्त फ्रांसीसी मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने कहा, 'अगर ईरान समझौता नहीं करता, तो उसके लिए बहुत मुश्किल समय आने वाला है। उन्हें जल्द कोई डील कर लेनी चाहिए।' ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक एआई-निर्मित तस्वीर भी साझा की, जिसमें वह अमेरिकी नौसेना के एक एडमिरल के साथ तूफानी समुद्र के सामने खड़े दिखाई दे रहे थे और तस्वीर पर लिखा था — 'तूफान से पहले का सन्नाटा।'

पृष्ठभूमि: युद्ध, युद्धविराम और वार्ता

गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले किए थे, जिसके बाद करीब 40 दिनों तक संघर्ष जारी रहा। 8 अप्रैल को ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच युद्धविराम पर सहमति बनी थी। युद्धविराम के बाद 11 और 12 अप्रैल को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधियों के बीच शांति वार्ता हुई थी, हालाँकि इन वार्ताओं से कोई ठोस समझौता नहीं निकल सका।

पाकिस्तान की मध्यस्थता और अटकी वार्ता

पिछले कुछ हफ्तों में पाकिस्तान की मध्यस्थता के ज़रिए दोनों पक्षों ने संघर्ष समाप्त करने के लिए कई प्रस्तावों का आदान-प्रदान किया है, लेकिन कोई निर्णायक सफलता नहीं मिली। यह ऐसे समय में है जब ट्रंप की ताज़ा चेतावनियाँ और नेतन्याहू की मंत्रिमंडल बैठक यह संकेत देती हैं कि युद्धविराम की नाज़ुक स्थिति पर दबाव बढ़ रहा है।

आगे क्या होगा

विश्लेषकों के अनुसार, ट्रंप और नेतन्याहू के बीच हुई इस बातचीत के बाद ईरान पर कूटनीतिक और सैन्य दबाव दोनों मोर्चों पर तेज़ होने की संभावना है। तेहरान की प्रतिक्रिया और आगामी दिनों में इस्लामाबाद चैनल से होने वाली किसी भी वार्ता की दिशा यह तय करेगी कि क्षेत्र में स्थिरता बनती है या तनाव फिर से चरम पर पहुँचता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुनियोजित दबाव की रणनीति के हिस्से लगते हैं। इस्लामाबाद वार्ता की विफलता यह दर्शाती है कि पाकिस्तान की मध्यस्थता की सीमाएँ हैं और ईरान अभी भी किसी बाध्यकारी समझौते के लिए तैयार नहीं है। असली सवाल यह है कि क्या यह कूटनीतिक दबाव की अगली कड़ी है या वास्तविक सैन्य कार्रवाई की पूर्व-तैयारी — और इसका जवाब तेहरान की अगली चाल पर निर्भर करेगा।
RashtraPress
18 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेतन्याहू और ट्रंप के बीच ईरान को लेकर क्या बातचीत हुई?
18 मई को दोनों नेताओं ने फोन पर ईरान के विरुद्ध फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू करने की संभावना पर चर्चा की। इजरायल के सरकारी चैनल कान टीवी के अनुसार, एक वरिष्ठ इजरायली अधिकारी ने कहा कि युद्ध दोबारा छिड़ने पर अमेरिका और इजरायल संयुक्त रूप से हमला कर सकते हैं।
ईरान और इजरायल के बीच युद्धविराम कब हुआ था?
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद करीब 40 दिनों के संघर्ष के उपरांत 8 अप्रैल को ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच युद्धविराम पर सहमति बनी थी।
इस्लामाबाद में ईरान-अमेरिका शांति वार्ता का क्या नतीजा रहा?
11 और 12 अप्रैल को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता से कोई ठोस समझौता नहीं निकल सका। पाकिस्तान की मध्यस्थता के ज़रिए कई प्रस्तावों का आदान-प्रदान हुआ, लेकिन कोई निर्णायक सफलता नहीं मिली।
ट्रंप ने ईरान को क्या चेतावनी दी है?
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि ईरान के लिए समय तेजी से निकल रहा है और उन्हें जल्द फैसला लेना होगा। फ्रांसीसी मीडिया से बातचीत में उन्होंने यह भी कहा कि अगर ईरान समझौता नहीं करता तो उसके लिए 'बहुत मुश्किल समय' आने वाला है।
नेतन्याहू ने ट्रंप से बातचीत के बाद क्या कदम उठाया?
ट्रंप से फोन पर बातचीत के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अपने मंत्रिमंडल की आपात सुरक्षा बैठक बुलाई। इस बैठक में उन सभी मोर्चों की समीक्षा की गई जहाँ इजरायल इस समय सक्रिय संघर्ष में है।
राष्ट्र प्रेस
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