नेतन्याहू-ट्रंप की फोन पर ईरान को लेकर अहम बातचीत, फिर से सैन्य कार्रवाई की संभावना पर मंथन
सारांश
मुख्य बातें
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच 18 मई को फोन पर ईरान को लेकर अहम बातचीत हुई। इजरायल के सरकारी टीवी चैनल कान टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों नेताओं ने ईरान के विरुद्ध एक बार फिर सैन्य कार्रवाई शुरू करने की संभावना पर विचार-विमर्श किया। यह बातचीत ऐसे नाज़ुक दौर में हुई है जब यरूशलम और वाशिंगटन के बीच ईरान नीति को लेकर तनाव का स्तर फिर से बढ़ता दिख रहा है।
मंत्रिमंडल की आपात सुरक्षा बैठक
ट्रंप से फोन पर बातचीत के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अपने मंत्रिमंडल की आपात सुरक्षा बैठक बुलाई। इस बैठक में उन सभी मोर्चों की समीक्षा की गई जहाँ इजरायल इस समय सक्रिय संघर्ष में है। एक वरिष्ठ इजरायली अधिकारी के हवाले से रिपोर्टों में कहा गया कि अगर ईरान के खिलाफ युद्ध दोबारा छिड़ता है, तो अमेरिका और इजरायल संयुक्त रूप से सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं।
ट्रंप की कड़ी चेतावनी
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ईरान को सीधी चेतावनी देते हुए लिखा, 'ईरान के लिए समय तेजी से निकल रहा है। उन्हें जल्द फैसला लेना होगा, नहीं तो उनके पास कुछ भी नहीं बचेगा।' इसके अतिरिक्त फ्रांसीसी मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने कहा, 'अगर ईरान समझौता नहीं करता, तो उसके लिए बहुत मुश्किल समय आने वाला है। उन्हें जल्द कोई डील कर लेनी चाहिए।' ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक एआई-निर्मित तस्वीर भी साझा की, जिसमें वह अमेरिकी नौसेना के एक एडमिरल के साथ तूफानी समुद्र के सामने खड़े दिखाई दे रहे थे और तस्वीर पर लिखा था — 'तूफान से पहले का सन्नाटा।'
पृष्ठभूमि: युद्ध, युद्धविराम और वार्ता
गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले किए थे, जिसके बाद करीब 40 दिनों तक संघर्ष जारी रहा। 8 अप्रैल को ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच युद्धविराम पर सहमति बनी थी। युद्धविराम के बाद 11 और 12 अप्रैल को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधियों के बीच शांति वार्ता हुई थी, हालाँकि इन वार्ताओं से कोई ठोस समझौता नहीं निकल सका।
पाकिस्तान की मध्यस्थता और अटकी वार्ता
पिछले कुछ हफ्तों में पाकिस्तान की मध्यस्थता के ज़रिए दोनों पक्षों ने संघर्ष समाप्त करने के लिए कई प्रस्तावों का आदान-प्रदान किया है, लेकिन कोई निर्णायक सफलता नहीं मिली। यह ऐसे समय में है जब ट्रंप की ताज़ा चेतावनियाँ और नेतन्याहू की मंत्रिमंडल बैठक यह संकेत देती हैं कि युद्धविराम की नाज़ुक स्थिति पर दबाव बढ़ रहा है।
आगे क्या होगा
विश्लेषकों के अनुसार, ट्रंप और नेतन्याहू के बीच हुई इस बातचीत के बाद ईरान पर कूटनीतिक और सैन्य दबाव दोनों मोर्चों पर तेज़ होने की संभावना है। तेहरान की प्रतिक्रिया और आगामी दिनों में इस्लामाबाद चैनल से होने वाली किसी भी वार्ता की दिशा यह तय करेगी कि क्षेत्र में स्थिरता बनती है या तनाव फिर से चरम पर पहुँचता है।