नेतन्याहू का बड़ा बयान: ट्रंप से बातचीत के बाद ईरान पर कड़ा दबाव, लेबनान शांति प्रक्रिया में नई उम्मीद

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नेतन्याहू का बड़ा बयान: ट्रंप से बातचीत के बाद ईरान पर कड़ा दबाव, लेबनान शांति प्रक्रिया में नई उम्मीद

सारांश

इजरायली PM नेतन्याहू ने ट्रंप से बातचीत के बाद कहा — ईरान पर आर्थिक-सैन्य दबाव और बढ़ेगा। लेबनान के साथ ऐतिहासिक शांति प्रक्रिया शुरू, लेकिन हिजबुल्लाह बाधक। ट्रंप ने युद्धविराम 3 सप्ताह बढ़ाया।

Key Takeaways

  • इजरायली PM नेतन्याहू ने 24 अप्रैल को 'एक्स' पर पोस्ट कर ट्रंप के साथ हुई बातचीत की जानकारी दी।
  • ईरान पर आर्थिक और सैन्य दोनों मोर्चों पर दबाव बढ़ाने की पुष्टि की गई।
  • इजरायल-लेबनान के बीच ऐतिहासिक शांति प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हुई।
  • हिजबुल्लाह शांति प्रक्रिया में बाधा डाल रहा है — इजरायल ने जवाबी कार्रवाई जारी रखने की चेतावनी दी।
  • ट्रंप ने इजरायल-लेबनान युद्धविराम को 3 सप्ताह के लिए बढ़ाया और वाशिंगटन में सीधी वार्ता का संकेत दिया।
  • ओवल ऑफिस बैठक में राजदूत नादा हमादेह मोवाद और राजदूत येचिएल लीटर ने भाग लिया।

नई दिल्ली, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शुक्रवार, 24 अप्रैल को स्पष्ट संकेत दिया कि मध्य-पूर्व की भू-राजनीति को नया आकार देने की उनकी मुहिम तेज हो रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई अहम बातचीत का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि ईरान पर आर्थिक और सैन्य दोनों मोर्चों पर दबाव बढ़ाया जा रहा है और लेबनान के साथ ऐतिहासिक शांति स्थापित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा चुके हैं।

नेतन्याहू का 'एक्स' पर बड़ा एलान

नेतन्याहू ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट 'एक्स' पर लिखा, "मैंने वादा किया था कि हम मध्य-पूर्व का चेहरा बदल देंगे — और हम ठीक वैसा ही कर रहे हैं।" उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के साथ उनकी बातचीत बेहद सकारात्मक रही और दोनों नेता पूरी तरह समन्वय के साथ काम कर रहे हैं।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रंप ईरान पर आर्थिक और सैन्य — दोनों स्तरों पर अत्यंत कड़ा दबाव बना रहे हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

लेबनान शांति प्रक्रिया और हिजबुल्लाह की चुनौती

नेतन्याहू ने घोषणा की कि इजरायल और लेबनान के बीच ऐतिहासिक शांति स्थापित करने की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो चुकी है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि हिजबुल्लाह इस प्रक्रिया में बाधा डालने की कोशिश कर रहा है।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "हमने कल भी हमला किया और आज भी — हम किसी भी उभरते खतरे के खिलाफ कार्रवाई करने की पूरी स्वतंत्रता रखते हैं।" उत्तरी इजरायल के नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता बताई गई।

ट्रंप की युद्धविराम पहल और वाशिंगटन बैठक

इससे पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने इजरायल-लेबनान युद्धविराम को तीन सप्ताह के लिए बढ़ाने की घोषणा करते हुए इसे "ऐतिहासिक कदम" करार दिया था। उन्होंने वाशिंगटन में दोनों पक्षों के बीच सीधी वार्ता की संभावना का भी संकेत दिया।

यह निर्णय ओवल ऑफिस में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद सामने आया, जिसमें अमेरिका में लेबनान की राजदूत नादा हमादेह मोवाद और इजरायल के राजदूत येचिएल लीटर सहित दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।

राजदूतों की प्रतिक्रिया और साझा रुख

इजरायली राजदूत येचिएल लीटर ने कहा कि इजरायल शांति और नागरिक सुरक्षा चाहता है और दोनों सरकारें हिजबुल्लाह के प्रभाव से अपने-अपने देशों को मुक्त कराने के लिए एकजुट हैं।

लेबनान की राजदूत नादा हमादेह मोवाद ने अमेरिकी समर्थन का स्वागत करते हुए कहा, "आपकी मदद से हम लेबनान को फिर से स्थिर और समृद्ध बना सकते हैं।" यह बयान इस बात का संकेत है कि लेबनान भी इस शांति प्रक्रिया में सकारात्मक भागीदारी के लिए तैयार है।

व्यापक रणनीतिक संदर्भ और आगे की राह

ट्रंप ने युद्धविराम की इस पहल को ईरान से जुड़ी व्यापक अमेरिकी कूटनीति से जोड़ा। उन्होंने कहा, "इजरायल-लेबनान वार्ता उन कुछ कठिन मुद्दों की तुलना में आसान होनी चाहिए जिन पर हम काम कर रहे हैं — दोनों पक्ष एक साझा खतरे के खिलाफ एकजुट हैं।"

गौरतलब है कि नवंबर 2024 में इजरायल-हिजबुल्लाह के बीच युद्धविराम समझौता हुआ था, लेकिन तब से कई बार इसका उल्लंघन हो चुका है। हिजबुल्लाह की सैन्य क्षमता को कमजोर करने के बाद अब इजरायल राजनयिक रास्ते से स्थायी समाधान की तलाश में है — और इसमें ट्रंप प्रशासन की भूमिका निर्णायक दिख रही है।

आने वाले हफ्तों में वाशिंगटन में इजरायल-लेबनान के बीच सीधी वार्ता हो सकती है, जो मध्य-पूर्व की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत हो सकती है।

Point of View

उसी समय उस पर 'अधिकतम दबाव' की नीति भी लागू है — यह विरोधाभास अमेरिकी विदेश नीति की जटिलता को उजागर करता है। लेबनान शांति प्रक्रिया की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि हिजबुल्लाह को कितना कमजोर किया जा सकता है, जो अंततः ईरान की क्षेत्रीय शक्ति से जुड़ा सवाल है। मुख्यधारा की मीडिया जहां इसे केवल युद्धविराम की खबर के रूप में पेश कर रही है, वहीं असली दांव है — मध्य-पूर्व में ईरान के प्रभाव को स्थायी रूप से सीमित करना।
NationPress
24/04/2026

Frequently Asked Questions

नेतन्याहू ने ट्रंप से बातचीत के बाद क्या कहा?
नेतन्याहू ने कहा कि ट्रंप ईरान पर आर्थिक और सैन्य दोनों स्तरों पर कड़ा दबाव बना रहे हैं और दोनों नेता पूरी तरह समन्वय के साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने लेबनान के साथ ऐतिहासिक शांति प्रक्रिया शुरू होने की भी घोषणा की।
इजरायल और लेबनान के बीच शांति प्रक्रिया क्यों मुश्किल है?
नेतन्याहू के अनुसार हिजबुल्लाह इस शांति प्रक्रिया में जानबूझकर बाधा डाल रहा है। इजरायल ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी उभरते खतरे के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित रखता है।
ट्रंप ने इजरायल-लेबनान युद्धविराम को कितने समय के लिए बढ़ाया?
राष्ट्रपति ट्रंप ने इजरायल-लेबनान युद्धविराम को तीन सप्ताह के लिए बढ़ाने की घोषणा की। उन्होंने इसे 'ऐतिहासिक कदम' बताया और वाशिंगटन में दोनों पक्षों के बीच सीधी वार्ता का संकेत दिया।
ओवल ऑफिस की बैठक में कौन-कौन शामिल थे?
वाशिंगटन में ओवल ऑफिस की बैठक में अमेरिका में लेबनान की राजदूत नादा हमादेह मोवाद और इजरायल के राजदूत येचिएल लीटर सहित दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।
ईरान पर अमेरिका और इजरायल किस तरह का दबाव बना रहे हैं?
अमेरिका ईरान पर आर्थिक प्रतिबंधों और सैन्य दबाव — दोनों का एक साथ इस्तेमाल कर रहा है। इजरायल और अमेरिका मिलकर ईरान की क्षेत्रीय शक्ति और हिजबुल्लाह जैसे उसके प्रॉक्सी संगठनों को कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
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