सागर खदान हादसा: तीन युवकों की डूबने से मौत, सीएम मोहन यादव ने दिए 4-4 लाख रुपए
सारांश
Key Takeaways
- सागर जिले के गुड़ा गांव के पास पत्थर खदान के गड्ढे में 25 अप्रैल को तीन युवक डूब गए।
- डूबने वाले युवकों के नाम तनिष कोरी, अभिषेक उर्फ अड्डा और तेजराम पटेल हैं।
- एसडीआरएफ ने देर रात अभिषेक का शव बरामद किया, शेष दो की तलाश जारी।
- मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रत्येक पीड़ित परिवार को 4 लाख रुपए अनुग्रह राशि देने की घोषणा की।
- स्थानीय विधायक प्रदीप लारिया मौके पर पहुंचे और परिवारों को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया।
- यह हादसा परित्यक्त खदानों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
भोपाल/सागर, 25 अप्रैल। मध्य प्रदेश के सागर जिले में एक दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया है, जहां गुड़ा गांव के पास एक पत्थर क्रशर खदान के गहरे जलभराव वाले गड्ढे में तीन युवक डूब गए। यह घटना 25 अप्रैल की दोपहर की है जब चार दोस्त गर्मी से राहत पाने के लिए खदान के पानी में नहाने उतरे थे। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस दुखद घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए प्रत्येक पीड़ित परिवार को 4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा
बहेड़िया पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली इस खदान में चार युवक दोपहर के समय नहाने पहुंचे थे। इनमें तनिष कोरी, अभिषेक उर्फ अड्डा, तेजराम पटेल और आयुष शामिल थे। प्रत्यक्षदर्शी शिवा वाल्मीकि के अनुसार, सबसे पहले तनिष कोरी गहरे पानी में डूबने लगा। उसे बचाने के लिए अभिषेक उर्फ अड्डा और तेजराम पटेल बिना देरी किए पानी में कूद पड़े, लेकिन खदान का पानी इतना गहरा था कि तीनों ही उसमें समा गए।
चौथे साथी आयुष ने भी अपने दोस्तों को बचाने की कोशिश की, लेकिन किनारे पर मौजूद लोगों ने समय रहते उसे बाहर खींच लिया, वरना वह भी इस हादसे का शिकार हो सकता था। मदद पहुंचने से पहले ही तीनों युवक पानी की गहराई में समा चुके थे।
बचाव अभियान और शव बरामदगी
सूचना मिलते ही बहेड़िया पुलिस मौके पर पहुंची और तत्काल राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) को बुलाया गया। एसडीआरएफ की टीम ने देर रात तक खदान में तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान अभिषेक उर्फ अड्डा का शव बरामद कर लिया गया, जबकि तनिष कोरी और तेजराम पटेल की खोज अगले दिन भी जारी रही।
खदान का पानी अत्यधिक गहरा और मटमैला होने के कारण बचाव दल को भारी मशक्कत करनी पड़ी। स्थानीय गोताखोरों की भी मदद ली गई। गुड़ा गांव में शोक का माहौल है और ग्रामीण बचाव कार्य में सहयोग कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री की घोषणा और सरकारी प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस घटना को अत्यंत दुखद बताते हुए तीनों युवकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने प्रत्येक पीड़ित परिवार को 4-4 लाख रुपए की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की और प्रशासन को तत्काल सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए।
स्थानीय विधायक प्रदीप लारिया भी मौके पर पहुंचे और शोकाकुल परिवारों से मिलकर उन्हें हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। प्रशासनिक अमले ने पीड़ित परिवारों से संपर्क स्थापित कर सरकारी सहायता की प्रक्रिया शुरू कर दी।
परित्यक्त खदानें: एक बड़ा सुरक्षा संकट
यह हादसा एक बार फिर मध्य प्रदेश सहित पूरे देश में परित्यक्त खदानों से उत्पन्न खतरे को उजागर करता है। गर्मियों में जब तापमान 40-45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, तब युवा और बच्चे इन खदानों के पानी में नहाने के लिए आकर्षित होते हैं। इन गड्ढों का पानी देखने में उथला लगता है, लेकिन वास्तव में यह कई मीटर गहरा होता है और इनकी दीवारें सीधी कटी होती हैं जिससे बाहर निकलना लगभग असंभव हो जाता है।
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में खनन गतिविधियों के बाद छोड़े गए ऐसे सैकड़ों गड्ढे हैं जिनके आसपास कोई सुरक्षा बाड़ या चेतावनी बोर्ड नहीं लगाए जाते। खनन विभाग के नियमों के अनुसार खदान बंद होने के बाद उसे भरना या सुरक्षित करना अनिवार्य है, लेकिन जमीनी स्तर पर इन नियमों का पालन नहीं होता। यह सागर में इस गर्मी में डूबने की पहली बड़ी घटना नहीं है — इससे पहले भी ऐसे हादसे सामने आ चुके हैं।
आलोचकों का कहना है कि खनन ठेकेदारों की जवाबदेही तय किए बिना और परित्यक्त खदानों की नियमित निगरानी के बिना ऐसे हादसे रुकने वाले नहीं हैं। प्रशासन को अब इन खदानों की पहचान कर उन्हें तत्काल बंद करने या सुरक्षित करने की जरूरत है।
आने वाले दिनों में एसडीआरएफ की टीम शेष दोनों युवकों के शव की बरामदगी के प्रयास जारी रखेगी। साथ ही यह देखना होगा कि सरकार परित्यक्त खदानों को लेकर कोई ठोस नीतिगत कदम उठाती है या यह हादसा भी केवल मुआवजे की घोषणा तक सीमित रहता है।