दत्तात्रेय होसबाले के बयान पर मौलाना रजवी की मुहर — ज्ञानवापी और मथुरा ईदगाह पर कोई समझौता नहीं

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दत्तात्रेय होसबाले के बयान पर मौलाना रजवी की मुहर — ज्ञानवापी और मथुरा ईदगाह पर कोई समझौता नहीं

सारांश

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने RSS महासचिव दत्तात्रेय होसबाले के बयान को सही ठहराया और मोहन भागवत के विश्व गुरु संकल्प का समर्थन किया। साथ ही ज्ञानवापी और मथुरा ईदगाह पर किसी भी समझौते से साफ इनकार करते हुए बेंगलुरु CET विवाद पर न्याय की मांग की।

Key Takeaways

  • मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने RSS महासचिव दत्तात्रेय होसबाले के 'हिंदुओं ने कभी किसी पर हमला नहीं किया' वाले बयान को पूरी तरह सही बताया।
  • मौलाना ने ज्ञानवापी मस्जिद (वाराणसी) और शाही ईदगाह (मथुरा) पर किसी भी भविष्य के समझौते को स्वीकार करने से साफ इनकार किया।
  • बाबरी मस्जिद मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मुसलमानों ने स्वीकार किया, लेकिन अन्य धार्मिक स्थलों पर यही रवैया नहीं अपनाया जाएगा।
  • मोहन भागवत के 'विश्व गुरु भारत' के विजन का मौलाना रजवी ने समर्थन किया और इसे राष्ट्रीय एकता से जोड़ा।
  • बेंगलुरु CET में जनेऊ पहने छात्रों के साथ कथित भेदभाव को मौलाना ने संवैधानिक मूल्यों का उल्लंघन बताया और सरकार से कार्रवाई मांगी।
  • धीरेंद्र शास्त्री के बयानों को मौलाना रजवी ने समाज में विभाजन बढ़ाने वाला बताया।

बरेली, 25 अप्रैलमौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने शुक्रवार को राष्ट्र प्रेस से विशेष बातचीत में आरएसएस, धार्मिक सद्भाव, जनसंख्या नीति, शिक्षा और सांप्रदायिक बयानबाजी जैसे संवेदनशील विषयों पर अपना स्पष्ट पक्ष रखा। उन्होंने आरएसएस महासचिव दत्तात्रेय होसबाले के वाशिंगटन डीसी में दिए गए बयान का खुलकर समर्थन किया और साथ ही ज्ञानवापी मस्जिद (वाराणसी) तथा ईदगाह (मथुरा) को लेकर किसी भी प्रकार के समझौते को सिरे से नकार दिया।

होसबाले के बयान को मौलाना रजवी का समर्थन

दत्तात्रेय होसबाले ने हाल ही में वाशिंगटन डीसी में कहा था कि हिंदुओं ने कभी किसी देश या समुदाय पर आक्रमण नहीं किया। मौलाना रजवी ने इस बयान को पूरी तरह सही ठहराया। उन्होंने कहा कि भारत का हजारों वर्षों का इतिहास इस बात का प्रमाण है कि हिंदू धर्म ने कभी युद्ध नहीं थोपा।

मौलाना रजवी ने यह भी कहा कि इस्लाम का टकराव ऐतिहासिक रूप से यहूदियों और ईसाइयों से रहा है — न कि हिंदुओं, सनातन धर्म, आर्य समाज, बौद्ध, जैन या सिख धर्म से। उन्होंने वर्तमान वैश्विक संघर्षों, जैसे अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान की स्थिति, को भी इसी ऐतिहासिक संदर्भ में देखने की बात कही।

मोहन भागवत के 'विश्व गुरु' बयान का भी किया समर्थन

मौलाना रजवी ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के 'भारत को विश्व गुरु बनाने' के संकल्प का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति में ही यहां के हर नागरिक — चाहे वह हिंदू हो या मुसलमान — की भलाई निहित है। राष्ट्र के विकास से सभी समुदायों को लाभ मिलता है, यही सोच राष्ट्रीय एकता की नींव है।

ज्ञानवापी और मथुरा ईदगाह पर कड़ा रुख

मौलाना रजवी ने बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि मुसलमानों ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को मन से स्वीकार किया और राम मंदिर निर्माण पर कोई आपत्ति नहीं जताई। लेकिन उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि ज्ञानवापी मस्जिद (वाराणसी) और शाही ईदगाह (मथुरा) को लेकर भविष्य में कोई भी समझौता मंजूर नहीं होगा।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब ज्ञानवापी और मथुरा ईदगाह से जुड़े मुकदमे विभिन्न अदालतों में विचाराधीन हैं और इन मुद्दों पर राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ रहा है।

धीरेंद्र शास्त्री के बयानों पर कड़ी आपत्ति

मौलाना रजवी ने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री के बयानों की आलोचना करते हुए कहा कि उनकी टिप्पणियां अक्सर समाज में विभाजन और तनाव को बढ़ावा देती हैं। उन्होंने जनसंख्या को लेकर किसी विशेष समुदाय को निशाना बनाने की प्रवृत्ति पर भी नाराजगी जताई और कहा कि परिवार नियोजन हर व्यक्ति का निजी अधिकार है।

बेंगलुरु CET विवाद पर न्याय की मांग

मौलाना रजवी ने बेंगलुरु में कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (CET) के दौरान जनेऊ पहने छात्रों के साथ कथित भेदभाव के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने इसे संविधान के मूल्यों के विरुद्ध बताया और मांग की कि राज्य सरकार दोषियों पर सख्त कार्रवाई करे।

उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी धर्म के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए और परीक्षा केंद्रों पर निष्पक्ष एवं न्यायपूर्ण माहौल सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।

मौलाना रजवी के ये बयान ऐसे समय में महत्वपूर्ण हैं जब देश में धार्मिक सद्भाव और सांप्रदायिक संवाद की बहस तेज हो रही है। आने वाले दिनों में ज्ञानवापी और मथुरा ईदगाह मामलों में अदालती सुनवाई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

Point of View

दूसरी तरफ ज्ञानवापी और मथुरा पर कड़ा रुख अपनाकर अपने समुदाय को यह संदेश देते हैं कि वे झुके नहीं हैं। यह रणनीतिक संतुलन उस व्यापक प्रवृत्ति को दर्शाता है जिसमें मुस्लिम धर्मगुरु राष्ट्रवादी भाषा को अपनाते हुए भी धार्मिक पहचान की रक्षा की रेखा खींचते हैं। मुख्यधारा की कवरेज इस दोहरेपन को नजरअंदाज करती है — जबकि असली सवाल यह है कि क्या यह संवाद की शुरुआत है या केवल चुनावी मौसम की कूटनीति?
NationPress
25/04/2026

Frequently Asked Questions

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने दत्तात्रेय होसबाले के किस बयान का समर्थन किया?
मौलाना रजवी ने RSS महासचिव दत्तात्रेय होसबाले के वाशिंगटन डीसी में दिए गए उस बयान का समर्थन किया जिसमें कहा गया था कि हिंदुओं ने कभी किसी पर हमला नहीं किया। उन्होंने कहा कि भारत का इतिहास इस बात का प्रमाण है।
ज्ञानवापी और मथुरा ईदगाह पर मौलाना रजवी का क्या रुख है?
मौलाना रजवी ने स्पष्ट कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद (वाराणसी) और शाही ईदगाह (मथुरा) को लेकर भविष्य में कोई समझौता स्वीकार नहीं होगा। उन्होंने बाबरी मस्जिद मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला मानने की बात कही लेकिन अन्य मस्जिदों पर समझौते से इनकार किया।
मौलाना रजवी ने धीरेंद्र शास्त्री के बयानों पर क्या कहा?
मौलाना रजवी ने कहा कि धीरेंद्र शास्त्री के बयान अक्सर समाज में विभाजन को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने जनसंख्या को लेकर किसी समुदाय विशेष को निशाना बनाने की प्रवृत्ति को गलत बताया।
बेंगलुरु CET विवाद पर मौलाना रजवी की क्या मांग है?
मौलाना रजवी ने बेंगलुरु में CET परीक्षा के दौरान जनेऊ पहने छात्रों के साथ हुए कथित भेदभाव को संविधान के विरुद्ध बताया। उन्होंने राज्य सरकार से दोषियों पर सख्त कार्रवाई और परीक्षा में निष्पक्ष माहौल सुनिश्चित करने की मांग की।
क्या मौलाना रजवी ने मोहन भागवत के बयान का भी समर्थन किया?
हां, मौलाना रजवी ने RSS प्रमुख मोहन भागवत के 'भारत को विश्व गुरु बनाने' के संकल्प का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति से हिंदू और मुसलमान दोनों समुदायों को फायदा होगा।
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