धीरेंद्र शास्त्री खुद को भगवान समझ रहे हैं — हर्षवर्धन सपकाल का तीखा हमला
सारांश
Key Takeaways
- महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने 25 अप्रैल को मुंबई में धीरेंद्र शास्त्री को 'मानसिक विकृति' का शिकार बताया।
- धीरेंद्र शास्त्री ने नागपुर में कहा था कि हिंदू परिवार चार बच्चे पैदा करें और एक को आरएसएस को समर्पित करें।
- सपकाल ने आरोप लगाया कि शास्त्री छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में झूठ फैला रहे हैं।
- कांग्रेस नेता ने भाजपा पर अन्य दलों के नेताओं को तोड़कर पार्टी में शामिल करने का आरोप लगाया।
- सपकाल ने भाजपा नेताओं से कहा कि वे अपने बच्चों को आरएसएस में भेजें, लेकिन पहले 'तिरंगे से नफरत' दर्ज करवाएं।
- शिवाजी महाराज की विरासत पर दावेदारी महाराष्ट्र में एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा बनी हुई है।
मुंबई, 25 अप्रैल: महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री के विवादित बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि धीरेंद्र शास्त्री अब खुद को भगवान समझने लगे हैं और यह प्रवृत्ति गंभीर मानसिक विकृति की ओर इशारा करती है। नागपुर में धीरेंद्र शास्त्री के 'चार बच्चे पैदा करो, एक आरएसएस को दो' वाले बयान के बाद यह विवाद और गहरा हो गया है।
सपकाल ने धीरेंद्र शास्त्री पर क्या कहा?
हर्षवर्धन सपकाल ने मुंबई में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि धीरेंद्र शास्त्री महाराष्ट्र में छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में लगातार भ्रामक और झूठे बयान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद न तो भाजपा और न ही कोई अन्य नेता इस पर कुछ बोलने को तैयार है, जो अपने आप में चिंताजनक है।
सपकाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "यह मानसिक विकृति का संकेत है।" उनके अनुसार, किसी धार्मिक व्यक्तित्व का इस तरह से राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों में हस्तक्षेप करना और ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करना न केवल समाज के लिए हानिकारक है, बल्कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों के भी विरुद्ध है।
भाजपा और आरएसएस पर निशाना
हर्षवर्धन सपकाल ने भाजपा नेताओं पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि उन्हें अपने सभी बच्चों को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को सौंप देना चाहिए। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि भाजपा सदस्यों को विदेश में पढ़ रहे अपने बच्चों को भी संघ में भेजना चाहिए, लेकिन इससे पहले उन्हें यह दर्ज करवाना चाहिए कि उन्हें तिरंगे झंडे से नफरत है।
यह बयान धीरेंद्र शास्त्री के नागपुर में 25 अप्रैल को दिए गए उस बयान की प्रतिक्रिया में आया, जिसमें उन्होंने हिंदू परिवारों से कम से कम चार बच्चे पैदा करने और उनमें से एक को आरएसएस की सेवा में समर्पित करने की अपील की थी।
शिवाजी महाराज — बहुजन नायक और समानता के प्रतीक
हर्षवर्धन सपकाल ने छत्रपति शिवाजी महाराज को बहुजन नायक बताते हुए कहा कि उन्होंने महिला-पुरुष समानता और सर्वसमावेशी शासन का संदेश दिया था। उन्होंने कहा कि जो भी विचार सबको साथ लेकर चलने की बात करता है, जो सबके हित की बात करता है, उसे संघ और भाजपा मिटाना चाहती है।
यह टिप्पणी महत्वपूर्ण है क्योंकि महाराष्ट्र में शिवाजी महाराज की विरासत पर दावेदारी एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा रही है। गौरतलब है कि हाल के महीनों में शिवाजी महाराज की प्रतिमा गिरने और उनसे जुड़े बयानों को लेकर राज्य में कई बार राजनीतिक तनाव उत्पन्न हो चुका है।
आप सांसदों के भाजपा में शामिल होने पर प्रतिक्रिया
आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसदों के भाजपा में शामिल होने पर सपकाल ने कहा कि भाजपा में अपने नेताओं पर भरोसा नहीं है और न ही कोई करिश्मा बचा है। इसीलिए वे अन्य दलों के नेताओं को तोड़कर अपनी पार्टी में शामिल करने का एजेंडा चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि "पार्टी तोड़ना भाजपा की पुरानी फितरत है।"
विश्लेषण: धार्मिक बयानबाजी और राजनीतिक ध्रुवीकरण
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों के बाद की राजनीति अभी भी सुलग रही है और बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री लगातार राजनीतिक रूप से सक्रिय बयान दे रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि धार्मिक मंचों से जनसंख्या और संगठन से जुड़े बयान देना सामाजिक सद्भाव के लिए खतरनाक हो सकता है।
तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो यह पहली बार नहीं है जब धीरेंद्र शास्त्री के बयानों पर राजनीतिक प्रतिक्रिया आई हो। इससे पहले भी उनके कई बयानों पर विपक्षी दलों ने आपत्ति जताई है, लेकिन भाजपा और संघ की ओर से कोई स्पष्ट दूरी नहीं बनाई गई है, जो विपक्ष के लिए राजनीतिक हमले का आधार बनता है।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भाजपा इस मुद्दे पर कोई स्पष्टीकरण देती है या नहीं, और क्या धीरेंद्र शास्त्री अपने बयान पर कोई सफाई पेश करते हैं।