मोहिनी एकादशी 2026: 27 अप्रैल को बन रहा दुर्लभ संयोग, भगवान विष्णु को ये चीजें अर्पित करें

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मोहिनी एकादशी 2026: 27 अप्रैल को बन रहा दुर्लभ संयोग, भगवान विष्णु को ये चीजें अर्पित करें

सारांश

मोहिनी एकादशी 27 अप्रैल 2026 को सोमवार के दिन पड़ रही है, जिससे इसका महत्व दोगुना हो गया है। पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 9:02 से 10:40 बजे तक है। तुलसी, चंदन और पीले पुष्प अर्पण से भगवान विष्णु शीघ्र प्रसन्न होते हैं। यह व्रत समुद्र मंथन की कथा से जुड़ा है।

Key Takeaways

  • मोहिनी एकादशी 2026 का व्रत 27 अप्रैल, सोमवार को रखा जाएगा।
  • एकादशी तिथि 26 अप्रैल शाम 6:06 बजे से 27 अप्रैल शाम 6:15 बजे तक रहेगी।
  • पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 9:02 बजे से 10:40 बजे तक है।
  • भगवान विष्णु को तुलसी, चंदन, पीले पुष्प और पंचामृत अर्पित करना विशेष फलदायी है।
  • इस एकादशी का संबंध भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार और समुद्र मंथन की कथा से है।
  • इस वर्ष सोमवार को पड़ने के कारण यह एकादशी दोहरे धार्मिक महत्व से युक्त है।

नई दिल्ली, 26 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मोहिनी एकादशी 2026 का पावन पर्व 27 अप्रैल, सोमवार को मनाया जाएगा। वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की यह एकादशी सनातन धर्म में भगवान विष्णु की उपासना के लिए सर्वश्रेष्ठ तिथियों में से एक मानी जाती है। इस वर्ष इस दिन एक विशेष खगोलीय संयोग भी बन रहा है, जिससे इस व्रत का महत्व और भी बढ़ गया है।

मोहिनी एकादशी 2026: तिथि और समय

वैदिक पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि का प्रारंभ 26 अप्रैल 2026 की शाम 6 बजकर 6 मिनट पर होगा और इसका समापन 27 अप्रैल की शाम 6 बजकर 15 मिनट पर होगा। उदया तिथि के नियम के अनुसार यह व्रत 27 अप्रैल, सोमवार को रखा जाएगा।

इस दिन भक्तगण प्रातःकाल से ही भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए उपवास रखेंगे। सोमवार का दिन भगवान शिव को भी प्रिय होता है, इसलिए इस बार की मोहिनी एकादशी दोहरे धार्मिक महत्व से युक्त है।

पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि

मोहिनी एकादशी के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त प्रातः 9 बजकर 2 मिनट से लेकर 10 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। यह समय पूजा-अर्चना के लिए सर्वाधिक फलदायी माना गया है।

श्रद्धालुओं को चाहिए कि वे सूर्योदय से पूर्व स्नान करें और स्वच्छ पीले या सफेद वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने दीप प्रज्वलित करें।

पूजा में चंदन, पीले पुष्प, तुलसी के पत्ते, पंचामृत और मिष्ठान का भोग लगाएं। धार्मिक मान्यता है कि तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है और इसे अर्पित करने से वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं। साथ ही विष्णु सहस्रनाम या ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करना विशेष फलदायी होता है।

मोहिनी एकादशी का पौराणिक महत्व

मोहिनी एकादशी का संबंध सीधे समुद्र मंथन की पौराणिक कथा से है। मान्यता है कि इसी तिथि को भगवान विष्णु ने मोहिनी अवतार धारण किया था। जब समुद्र मंथन से अमृत कलश निकला, तब असुरों ने उसे छीनने का प्रयास किया।

तब भगवान विष्णु ने एक अत्यंत सुंदर स्त्री का रूप — मोहिनी — धारण किया और असुरों को मोहित कर देवताओं को अमृत पिलाया। इस प्रकार देवताओं की रक्षा की गई और सृष्टि में धर्म की पुनर्स्थापना हुई। इसी घटना की स्मृति में इस एकादशी को मोहिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है।

धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि यह व्रत सहस्र गोदान के पुण्य के समान फल देता है। यह एकादशी पापों के नाश और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करती है।

व्रत से मिलने वाले आध्यात्मिक और जीवन लाभ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मोहिनी एकादशी का व्रत श्रद्धापूर्वक करने से व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। मानसिक कलह, आर्थिक संकट और पारिवारिक विवादों से मुक्ति मिलती है।

विशेष रूप से जो लोग पितृदोष, ग्रहदोष या नकारात्मक प्रभावों से पीड़ित हैं, उनके लिए यह व्रत अत्यंत लाभकारी बताया गया है। व्रत के अगले दिन 28 अप्रैल को द्वादशी तिथि पर पारण किया जाएगा।

आने वाले दिनों में वैशाख पूर्णिमा और अन्य धार्मिक पर्व भी निकट हैं, जो श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत शुभ समय का संकेत देते हैं।

Point of View

बल्कि भारतीय सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रतीक है जो समुद्र मंथन जैसी गहन पौराणिक घटना को जनमानस से जोड़ता है। इस वर्ष सोमवार को पड़ने वाली यह एकादशी उन लाखों श्रद्धालुओं के लिए विशेष है जो आर्थिक और मानसिक संकट के बीच आध्यात्मिक सहारा ढूंढते हैं। यह तथ्य उल्लेखनीय है कि भारत में एकादशी व्रत का पालन करने वालों की संख्या करोड़ों में है, जो दर्शाता है कि आधुनिकता के बावजूद सनातन परंपराएं कितनी जीवंत हैं। राष्ट्र को इस सांस्कृतिक विरासत पर गर्व होना चाहिए और इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
NationPress
26/04/2026

Frequently Asked Questions

मोहिनी एकादशी 2026 कब है?
मोहिनी एकादशी 2026 का व्रत 27 अप्रैल, सोमवार को रखा जाएगा। एकादशी तिथि 26 अप्रैल की शाम 6:06 बजे से शुरू होकर 27 अप्रैल की शाम 6:15 बजे तक रहेगी।
मोहिनी एकादशी पर पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
मोहिनी एकादशी 2026 पर पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 9 बजकर 2 मिनट से 10 बजकर 40 मिनट तक है। इस समय भगवान विष्णु की पूजा करना सर्वाधिक फलदायी माना गया है।
मोहिनी एकादशी पर भगवान विष्णु को क्या अर्पित करें?
मोहिनी एकादशी पर भगवान विष्णु को तुलसी के पत्ते, चंदन, पीले पुष्प, पंचामृत और मिष्ठान अर्पित करें। तुलसी विष्णु को सर्वाधिक प्रिय है और इसके अर्पण से वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
मोहिनी एकादशी का क्या महत्व है?
मोहिनी एकादशी का संबंध समुद्र मंथन से है जब भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर देवताओं को अमृत पिलाया था। यह व्रत पापनाशक, मनोकामना पूर्ण करने वाला और मोक्षदायी माना जाता है।
मोहिनी एकादशी व्रत का पारण कब करें?
मोहिनी एकादशी 2026 का पारण 28 अप्रैल, मंगलवार को द्वादशी तिथि पर किया जाएगा। पारण सूर्योदय के बाद और द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना शास्त्रसम्मत माना जाता है।
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