महिला आरक्षण पर बड़ा आंदोलन: कांग्रेस रविवार को भोपाल में निकालेगी विरोध मार्च, जीतू पटवारी करेंगे नेतृत्व

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महिला आरक्षण पर बड़ा आंदोलन: कांग्रेस रविवार को भोपाल में निकालेगी विरोध मार्च, जीतू पटवारी करेंगे नेतृत्व

सारांश

नारी शक्ति वंदन अधिनियम को तत्काल लागू करने की मांग को लेकर मध्य प्रदेश कांग्रेस रविवार को भोपाल में विरोध मार्च निकालेगी। जीतू पटवारी के नेतृत्व में प्लैटिनम प्लाजा से रोशनपुरा तक मार्च होगा। 27 अप्रैल के विधानसभा विशेष सत्र में भी यह मुद्दा गूंजेगा।

Key Takeaways

  • मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एमपीसीसी) रविवार को भोपाल में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को तत्काल लागू करने की मांग को लेकर विरोध मार्च निकालेगी।
  • मार्च दोपहर 4 बजे प्लैटिनम प्लाजा से शुरू होकर रोशनपुरा स्क्वायर पर समाप्त होगा।
  • एमपीसीसी अध्यक्ष जीतू पटवारी वरिष्ठ नेताओं के साथ मार्च का नेतृत्व करेंगे।
  • कांग्रेस ने लोकसभा में 33%25 महिला आरक्षण को परिसीमन की शर्त से मुक्त कर तत्काल लागू करने की मांग की है।
  • भाजपा का तर्क है कि अधिनियम का क्रियान्वयन जनगणना और परिसीमन के बाद ही संवैधानिक रूप से संभव है।
  • 27 अप्रैल को मध्य प्रदेश विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र में यह मुद्दा और तेज होने की संभावना है।

भोपाल, 26 अप्रैल। नारी शक्ति वंदन अधिनियम को तत्काल लागू करने की मांग को लेकर मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एमपीसीसी) रविवार को भोपाल में एक बड़ा विरोध मार्च आयोजित करने जा रही है। यह मार्च भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के महिला आरक्षण ढांचे को लागू करने में हो रही कथित देरी के विरोध में निकाला जाएगा। एमपीसीसी अध्यक्ष जीतू पटवारी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ इस मार्च की अगुवाई करेंगे।

मार्च का रूट और समय

यह विरोध मार्च दोपहर 4 बजे प्लैटिनम प्लाजा से शुरू होगा। मार्च टॉप एंड टाउन और न्यू मार्केट से गुजरते हुए रोशनपुरा स्क्वायर पर समाप्त होगा। कांग्रेस का कहना है कि यह प्रदर्शन भाजपा सरकार के 'महिला-विरोधी रवैये' को जनता के सामने उजागर करने का एक निर्णायक कदम है।

एमपीसीसी ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि पार्टी लोकसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को परिसीमन की शर्त से मुक्त कराने के लिए सड़क से संसद तक संघर्ष जारी रखेगी।

कांग्रेस की प्रमुख मांगें

कांग्रेस ने मांग की है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को परिसीमन से जोड़े बिना तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। इसके अलावा पार्टी ने यह भी मांग की है कि आरक्षण ढांचे में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए समुचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए।

जीतू पटवारी ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में पारित 73वें और 74वें संवैधानिक संशोधनों ने पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों में महिलाओं की व्यापक राजनीतिक भागीदारी की नींव रखी थी। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि महिला आरक्षण विधेयक 2010 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में राज्यसभा में पारित हो चुका था।

भाजपा का पक्ष और संवैधानिक तर्क

भाजपा ने इस विधेयक को महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक सुधार बताते हुए अपने रुख का पुरजोर बचाव किया है। पार्टी का तर्क है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम का क्रियान्वयन संवैधानिक रूप से अगली जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन से जुड़ा हुआ है, जो निर्वाचन क्षेत्रवार आरक्षण निर्धारित करने के लिए अनिवार्य प्रक्रिया है।

गौरतलब है कि सितंबर 2023 में संसद के विशेष सत्र में यह विधेयक पारित हुआ था, लेकिन इसके क्रियान्वयन की समयसीमा अभी तय नहीं हुई है। आलोचकों का कहना है कि जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया में वर्षों लग सकते हैं, जिससे यह आरक्षण व्यावहारिक रूप से अगले एक दशक तक लागू नहीं हो पाएगा।

विधानसभा सत्र में उठेगा मुद्दा

यह राजनीतिक टकराव 27 अप्रैल को मध्य प्रदेश विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र में और तेज होने की संभावना है। कांग्रेस ने अपने विधायकों की एक विशेष बैठक बुलाई है, जिसमें सदन में उठाई जाने वाली विधायी रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर यह विवाद केवल एक कानूनी बहस नहीं, बल्कि एक व्यापक चुनावी रणनीति का हिस्सा बन चुका है। दोनों दल आगामी चुनावों से पहले महिला मतदाताओं के बीच अपनी साख मजबूत करने की कोशिश में हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 27 अप्रैल के विधानसभा सत्र में यह मुद्दा किस दिशा में जाता है और क्या सत्तारूढ़ दल कोई ठोस समयसीमा देने की स्थिति में होगा।

Point of View

लेकिन डेढ़ साल बाद भी इसकी क्रियान्वयन तिथि अनिश्चित है — यह विरोधाभास खुद बोलता है। भाजपा का 'जनगणना-परिसीमन' तर्क संवैधानिक रूप से सही हो सकता है, लेकिन जब सरकार जनगणना की तारीख ही तय नहीं कर पाई, तो यह तर्क एक सुविधाजनक टालमटोल बन जाता है। दूसरी तरफ, कांग्रेस का आक्रोश भी तब ज्यादा विश्वसनीय लगता जब उसने 2010 में राज्यसभा में पारित अपने ही विधेयक को लोकसभा में पारित कराने की राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई होती। असली सवाल यह है कि क्या भारत की राजनीति में महिला आरक्षण एक नीतिगत प्रतिबद्धता है या केवल चुनावी मौसम में निकाला जाने वाला एक सदाबहार हथियार?
NationPress
26/04/2026

Frequently Asked Questions

कांग्रेस भोपाल में विरोध मार्च क्यों निकाल रही है?
कांग्रेस नारी शक्ति वंदन अधिनियम को तत्काल लागू करने की मांग को लेकर भोपाल में विरोध मार्च निकाल रही है। पार्टी का आरोप है कि भाजपा सरकार इस कानून को जानबूझकर परिसीमन की आड़ में टाल रही है।
भोपाल में कांग्रेस का विरोध मार्च कब और कहाँ से शुरू होगा?
यह विरोध मार्च रविवार, 27 अप्रैल को दोपहर 4 बजे प्लैटिनम प्लाजा से शुरू होगा। मार्च टॉप एंड टाउन और न्यू मार्केट होते हुए रोशनपुरा स्क्वायर पर समाप्त होगा।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम अभी तक लागू क्यों नहीं हुआ?
भाजपा सरकार का कहना है कि यह अधिनियम संवैधानिक रूप से अगली जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया के बाद ही लागू हो सकता है। चूंकि जनगणना की तारीख अभी तय नहीं है, इसलिए इसके क्रियान्वयन में देरी हो रही है।
महिला आरक्षण विधेयक पर कांग्रेस की क्या मांगें हैं?
कांग्रेस की मांग है कि लोकसभा में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़े बिना तुरंत लागू किया जाए। साथ ही OBC, SC और ST महिलाओं के लिए भी आरक्षण ढांचे में समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए।
27 अप्रैल को मध्य प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र में क्या होगा?
27 अप्रैल को मध्य प्रदेश विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र में महिला आरक्षण का मुद्दा प्रमुखता से उठाया जाएगा। कांग्रेस ने अपने विधायकों की बैठक बुलाकर रणनीति तैयार की है और वह सदन में भाजपा सरकार को घेरने की तैयारी में है।
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