मराठी भाषा सर्वप्रथम: शाइना एनसी ने किया महाराष्ट्र सरकार के बड़े फैसले का जोरदार बचाव
सारांश
Key Takeaways
- महाराष्ट्र सरकार ने 1 मई 2025 से ऑटोरिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य की।
- शिवसेना प्रवक्ता शाइना एनसी ने फैसले का बचाव करते हुए कहा — मराठी हमारी पहचान और गौरव है।
- मोटर व्हीकल एक्ट के तहत मराठी में बुनियादी दक्षता न दिखाने पर लाइसेंस रद्द किया जाएगा।
- विरोधियों पर शाइना एनसी ने दादागिरी की राजनीति और अवसरवाद का आरोप लगाया।
- मरीन ड्राइव, मुंबई पर पिछले 12 वर्षों से प्रत्येक रविवार योग सत्र आयोजित हो रहे हैं।
- शाइना एनसी ने प्रधानमंत्री मोदी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग को प्रसिद्ध बनाने के लिए धन्यवाद दिया।
मुंबई, 26 अप्रैल। महाराष्ट्र सरकार द्वारा 1 मई 2025 से राज्य के सभी लाइसेंसधारी ऑटोरिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य किए जाने के फैसले पर विवाद गहराता जा रहा है। इस बीच शिवसेना की राष्ट्रीय प्रवक्ता शाइना एनसी ने सरकार का पुरजोर बचाव करते हुए स्पष्ट कहा कि मराठी भाषा हमारे लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मराठी अनिवार्यता: क्या है सरकार का आदेश?
महाराष्ट्र सरकार ने मोटर व्हीकल एक्ट के तहत यह नियम लागू किया है कि राज्य में कार्यरत सभी ऑटोरिक्शा और टैक्सी चालकों को मराठी पढ़ना, लिखना और बोलना आना चाहिए। यह नियम 1 मई 2025 से प्रभावी होगा।
आदेश के अनुसार, यदि कोई चालक मराठी भाषा में बुनियादी दक्षता प्रदर्शित करने में असमर्थ रहता है, तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस रद्द किया जा सकता है। इस निर्णय का उद्देश्य यात्रियों की सुविधा सुनिश्चित करना बताया जा रहा है।
शाइना एनसी का पक्ष: मराठी गौरव और पहचान
शिवसेना की राष्ट्रीय प्रवक्ता शाइना एनसी ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "मराठी भाषा हमारा गौरव और हमारी पहचान है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि मोटर व्हीकल एक्ट में यह पहले से अनिवार्य है कि कोई भी सेवा प्रदाता — चाहे ऑटोरिक्शा चालक हो या टैक्सी चालक — यात्रियों की सुविधा के लिए मराठी बोलने में सक्षम हो।
शाइना एनसी ने विरोध करने वालों पर निशाना साधते हुए कहा, "कुछ लोगों ने इसे दादागिरी की राजनीति का हिस्सा बना दिया है और अपने अवसरवाद के चलते इसे राजनीतिक रंग दे दिया है।" उन्होंने जोड़ा कि राज्य में अधिक से अधिक लोगों का मराठी सीखना और बोलना हमारे लिए गर्व की बात है।
विवाद का राजनीतिक संदर्भ
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में मराठी अस्मिता का मुद्दा राजनीतिक दलों के बीच तनाव का केंद्र बना हुआ है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) और शिवसेना जैसे दल वर्षों से मराठी भाषा संरक्षण की मांग करते रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि यह नीति उत्तर भारतीय और अन्य राज्यों के प्रवासी चालकों को प्रभावित कर सकती है, जो मुंबई और पुणे जैसे महानगरों में बड़ी संख्या में कार्यरत हैं।
गौरतलब है कि इससे पहले भी महाराष्ट्र में दुकानों के बोर्ड पर मराठी को अनिवार्य बनाने जैसे कदम उठाए गए हैं। भाषाई अनिवार्यता का यह क्रम दर्शाता है कि मराठी अस्मिता आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में भी एक प्रमुख मुद्दा बन सकती है।
स्वास्थ्य और योग पर शाइना एनसी का संदेश
इसी बातचीत में शाइना एनसी ने देश में बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से 'डायबिटीज कैपिटल' बनता जा रहा है और मोटापे तथा महिलाओं में कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
शाइना एनसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रेरणास्रोत बताते हुए कहा कि व्यायाम और योग मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य हैं। उन्होंने बताया कि मुंबई के मरीन ड्राइव पर पिछले 12 वर्षों से प्रत्येक रविवार योग सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें बच्चों और बुजुर्गों की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाता है।
उन्होंने कहा, "भारत ने योग पूरे विश्व को दिया है और प्रधानमंत्री मोदी ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित बनाया है — इसके लिए हम उनका अभिनंदन करते हैं।" उनका संदेश था — 'हेल्थ इज वेल्थ' को जीवन का मूल मंत्र बनाएं।
आगे क्या?
1 मई 2025 से यह नियम लागू होने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इसे कितनी सख्ती से लागू करता है और प्रवासी चालक संगठन इस पर क्या रुख अपनाते हैं। विरोधी दलों की प्रतिक्रिया और संभावित कानूनी चुनौतियां भी इस मुद्दे को आने वाले हफ्तों में और गर्म बना सकती हैं।