शिवाजी महाराज विवाद: धीरेंद्र शास्त्री बोले — 'सम्मान में कहा था, साजिश से काटा गया संदर्भ'
सारांश
Key Takeaways
- धीरेंद्र शास्त्री ने 26 अप्रैल 2025 को नागपुर में मीडिया से बात करते हुए शिवाजी महाराज विवाद पर सफाई दी।
- उन्होंने कहा कि बयान सम्मान की भावना से दिया गया था और संदर्भ काटकर फैलाया गया।
- साजिश की आशंका जताते हुए कहा कि सनातन विरोधी तत्व संतों की छवि धूमिल करने में लगे हैं।
- उन्होंने माफी और खेद दोनों व्यक्त किए, भले ही उनके अनुसार बयान गलत नहीं था।
- आस्था और अंधविश्वास का फर्क स्पष्ट करते हुए कहा कि उनका मंच भगवान हनुमान से जोड़ने के लिए है।
- जनसंख्या नियंत्रण पर कहा — नियम सभी समुदायों पर समान रूप से लागू होना चाहिए।
नागपुर, 26 अप्रैल — बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बागेश्वर बाबा) ने रविवार को नागपुर में मीडिया के सामने छत्रपति शिवाजी महाराज पर दिए गए अपने बयान को लेकर उठे विवाद पर विस्तृत सफाई पेश की। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका वक्तव्य पूरी तरह सम्मान की भावना से दिया गया था, लेकिन एक छोटा अंश संदर्भ से काटकर भ्रामक तरीके से फैलाया गया। उन्होंने इसके पीछे सनातन विरोधी साजिश की संभावना से भी इनकार नहीं किया।
नागपुर में हर बार विवाद — शास्त्री ने माना यह उनके भाग्य का हिस्सा
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, "नागपुर में जब भी हम आते हैं, कुछ न कुछ हो ही जाता है।" उन्होंने याद दिलाया कि पिछली बार भी बिना कुछ कहे विवाद खड़ा हो गया था। इस बार उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज की समर्थ रामदास स्वामी के प्रति अटूट निष्ठा और संत-भक्ति की प्रशंसा की थी, जिसे गलत रूप में प्रस्तुत किया गया।
उन्होंने कहा, "जो भी पूरा बयान सुनेगा और सही संदर्भ में समझेगा, वह इसे आपत्तिजनक नहीं मानेगा। हमने सम्मान व्यक्त करने के उद्देश्य से बात की थी।" इसके बावजूद उन्होंने खेद जताया और माफी भी मांगी।
बयान का असली संदर्भ — गुरु-शिष्य परंपरा और महाभारत का उदाहरण
धीरेंद्र शास्त्री ने स्पष्ट किया कि वे एक शिष्य की अपने गुरु के प्रति समर्पण की भावना पर बात कर रहे थे। उन्होंने महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे अर्जुन ने भगवान कृष्ण से कहा था कि वे अपनों से युद्ध नहीं करेंगे, तब श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश दिया — ठीक वैसे ही शिवाजी महाराज की गुरु-भक्ति का उल्लेख किया गया था।
उन्होंने कहा, "हमने संतों और महान विभूतियों से सुना है कि छत्रपति शिवाजी महाराज की अपने गुरु समर्थ रामदास स्वामी के प्रति गहरी निष्ठा थी। हमारा उद्देश्य उनकी महानता को उजागर करना था, न कि किसी का अपमान करना।"
साजिश की आशंका — सनातन और संतों को नीचा दिखाने की कोशिश
धीरेंद्र शास्त्री ने आरोप लगाया कि कुछ तत्व लगातार सनातन धर्म और संतों की छवि को धूमिल करने में लगे हैं। उन्होंने कहा, "यह भी संभव है कि इसके पीछे कोई सुनियोजित साजिश हो।" गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब बागेश्वर बाबा के बयानों को विवादास्पद बनाने की कोशिश हुई हो — इससे पहले भी उनके कई वक्तव्यों पर विवाद उठाया गया है।
विश्लेषकों का मानना है कि धार्मिक-सांस्कृतिक विमर्श में सक्रिय संतों के बयानों को क्लिप करके वायरल करने की प्रवृत्ति तेज हुई है, जो सोशल मीडिया युग में एक बड़ी चुनौती बन चुकी है।
आस्था बनाम अंधविश्वास — शास्त्री ने खींची स्पष्ट लकीर
धीरेंद्र शास्त्री ने आस्था और अंधविश्वास के बीच के अंतर को भी परिभाषित किया। उन्होंने कहा, "समझ पर आधारित विश्वास आस्था है, जबकि बिना समझ के अंधानुकरण अंधविश्वास है।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका मंच भगवान बालाजी हनुमान से लोगों को जोड़ने के लिए है, न कि खुद की पूजा करवाने के लिए।
उन्होंने कहा, "अगर हनुमान चालीसा पढ़ने की प्रेरणा देना या हनुमान मंदिर जाने के लिए कहना अंधविश्वास है, तो इस देश के सभी धर्मों को अंधविश्वास मानना पड़ेगा।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनका उद्देश्य तथाकथित चमत्कारों की आड़ में हो रहे धर्मांतरण को रोकना है।
जनसंख्या नियंत्रण पर भी बोले — सभी पर समान नियम लागू हों
धीरेंद्र शास्त्री ने जनसंख्या नियंत्रण के मुद्दे पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि यदि जनसंख्या नियंत्रण कानून बनता है तो वह सभी धर्मों और समुदायों पर समान रूप से लागू होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने हिंदुओं में चार बच्चों की बात की तो उसे विवाद बनाया गया, जबकि अन्य समुदायों में अधिक बच्चों पर कोई सवाल नहीं उठाया जाता।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में जनसंख्या नीति पर बहस तेज है और कई राज्य सरकारें इस दिशा में कानून बनाने पर विचार कर रही हैं। धीरेंद्र शास्त्री का यह रुख आने वाले दिनों में धार्मिक-राजनीतिक विमर्श को और गहरा कर सकता है।