पवन ऊर्जा में भारत की बड़ी छलांग: 56 गीगावाट क्षमता पार, PM मोदी ने 'मन की बात' में बताई विकास की नई कहानी
सारांश
Key Takeaways
- PM नरेंद्र मोदी ने 26 अप्रैल 2025 को 'मन की बात' के 133वें एपिसोड में पवन ऊर्जा की उपलब्धि साझा की।
- भारत की पवन ऊर्जा क्षमता 56 गीगावाट से अधिक हो गई है — एक वर्ष में 6 गीगावाट नई क्षमता जुड़ी।
- गुजरात (कच्छ, पाटन, बनासकांठा), तमिलनाडु, राजस्थान और महाराष्ट्र पवन ऊर्जा में अग्रणी राज्य हैं।
- भारत 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
- पवन और सौर ऊर्जा क्षेत्र युवाओं के लिए नई स्किल और रोजगार के अवसर पैदा कर रहे हैं।
- वैश्विक स्तर पर भारत पवन ऊर्जा उत्पादन में शीर्ष चार देशों में शामिल है।
नई दिल्ली, 26 अप्रैल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 133वें एपिसोड में देशवासियों को संबोधित करते हुए पवन ऊर्जा (विंड एनर्जी) और सौर ऊर्जा को भारत के विकास के लिए अनिवार्य बताया। उन्होंने घोषणा की कि भारत की पवन ऊर्जा उत्पादन क्षमता अब 56 गीगावाट से अधिक हो चुकी है — जो देश की नवीकरणीय ऊर्जा यात्रा में एक ऐतिहासिक पड़ाव है।
पवन-शक्ति: अदृश्य लेकिन अपरिहार्य ऊर्जा
पीएम मोदी ने प्राचीन भारतीय ग्रंथों का हवाला देते हुए कहा, "वायुर्वा इति व्यष्टिः, वायुरवै समष्टिः" — अर्थात वायु केवल एक तत्व नहीं, बल्कि जीवन की मूल ऊर्जा है। उन्होंने कहा कि यही पवन-शक्ति आज भारत के विकास की नई कहानी लिख रही है।
उन्होंने देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा, "मन की बात के एक और एपिसोड में आप सबसे जुड़कर खुशी हो रही है। इधर चुनाव की भागदौड़ रही है, लेकिन देश की उपलब्धियां हमें एक-दूसरे से जोड़ती रही हैं।"
56 गीगावाट से अधिक पवन ऊर्जा क्षमता — क्या है इसका महत्व?
पीएम मोदी ने बताया कि पिछले एक वर्ष में ही लगभग 6 गीगावाट नई पवन ऊर्जा क्षमता जोड़ी गई है। यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस लक्ष्य को पूरा करने में पवन और सौर ऊर्जा की केंद्रीय भूमिका है।
वैश्विक स्तर पर देखें तो भारत पहले से ही पवन ऊर्जा उत्पादन में दुनिया के शीर्ष चार देशों में शामिल है। चीन, अमेरिका और जर्मनी के बाद भारत की स्थिति मजबूत हो रही है, और 56 गीगावाट की क्षमता इस दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।
गुजरात, तमिलनाडु, राजस्थान और महाराष्ट्र — राज्यों की अग्रणी भूमिका
प्रधानमंत्री ने गुजरात के कच्छ, पाटन और बनासकांठा जैसे क्षेत्रों का विशेष उल्लेख किया, जो कभी बंजर रेगिस्तान थे और आज वहां विशाल नवीकरणीय ऊर्जा पार्क स्थापित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु, महाराष्ट्र और राजस्थान भी इस क्षेत्र में परचम लहरा रहे हैं।
गौरतलब है कि तमिलनाडु भारत का सबसे बड़ा पवन ऊर्जा उत्पादक राज्य रहा है, जबकि राजस्थान सौर ऊर्जा में अग्रणी है। इन राज्यों का संयुक्त योगदान भारत की समग्र हरित ऊर्जा क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है।
युवाओं के लिए रोजगार और नई संभावनाएं
पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है — यह लाखों युवाओं के लिए रोजगार और नई स्किल के अवसर भी पैदा कर रहा है। ऊर्जा पार्कों की स्थापना से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिल रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत का नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र 2030 तक 10 लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित कर सकता है। ग्रीन एनर्जी में टेक्नीशियन, इंजीनियर और प्रबंधन पेशेवरों की मांग तेजी से बढ़ रही है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु प्रतिबद्धता
यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब भारत COP29 और अंतरराष्ट्रीय जलवायु मंचों पर अपनी हरित ऊर्जा प्रतिबद्धताओं को दोहरा रहा है। पेरिस समझौते के तहत भारत ने 2070 तक नेट-जीरो का लक्ष्य रखा है, और पवन-सौर ऊर्जा में यह तेज प्रगति उसी दिशा में एक ठोस कदम है।
आलोचकों का कहना है कि ऊर्जा वितरण और ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर में अभी भी सुधार की जरूरत है ताकि उत्पादित बिजली का पूरा लाभ आम उपभोक्ताओं तक पहुंच सके। आने वाले महीनों में सरकार की नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन और PM सूर्य घर योजना इस दिशा में और तेजी ला सकती हैं।